गरीबों के लिए आधी रात तक बैठ सकता हूं- सीजेआई: जस्टिस सूर्यकांत बोले-मैं यहां सबसे छोटे व्यक्ति के लिए हूं; मेरी कोर्ट में लग्जरी केस नहीं

अगर जरूरत पड़ी, तो मैं उनके लिए आधी रात तक यहां बैठूंगा: सीजेआई का बयान

सुप्रीम कोर्ट के नए न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा है कि अगर जरूरत पड़े, तो वह अपनी अदालत में आधी रात तक बैठ सकते हैं। उन्होंने यह बयान एक याचिका की सुनवाई के दौरान किया।

सीजेआई ने कहा, "मेरी अदालत में कोई लग्जरी मुकदमेबाजी नहीं है। ऐसे मामले अमीर लोग ही लड़ते हैं। मैं आपको बता दूं, मैं यहां सबसे छोटे, सबसे गरीब अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के लिए हूं। अगर जरूरत पड़ी, तो मैं उनके लिए आधी रात तक यहां बैठूंगा।

इस बयान से सुप्रीम कोर्ट की नई दिशा पर सवाल उठ रहे हैं। सीजेआई ने यह भी कहा है कि उन्होंने मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग के लिए ओरल (मौखिक) मेंशनिंग बंद कर दी है।
 
आज का बयान सीजेआई ने क्या कहा? जस्टिस सूर्यकांत की यह बात सुनकर लगता है कि वे अपने अदालत में कुछ अच्छा बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। आधी रात तक बैठने की बात सुनकर ये तो एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। जैसा जस्टिस सूर्यकांत कहते हैं वह सबसे छोटे, सबसे गरीब लोगों के लिए हैं। इस बीच में देखो, पॉलिटिक्स और लॉ पर एक नए ट्विस्ट आ गए हैं।

जी नहीं, मेरा मतलब यह नहीं है कि सीजेआई ने अपनी अदालत में लग्जरी मुकदमेबाजी को रोकने की ज़रूरत है। ये तो एक अच्छी बात है, जो हमारे लॉ प्रणाली में सुधार करने का एक बड़ा कदम है।

मुझे लगता है कि यह दिशा हमें अच्छा दिखाई देगी।
 
अरे वाह! सीजेआई जी ने सचमुच एक बड़ा बयान दिया है 🤩। अगर जरूरत पड़े, तो वह आधी रात तक अदालत में बैठ सकते हैं और सबसे छोटे-छोटे लोगों के लिए लड़ेंगे। यह तो बहुत अच्छी बात है! उनका दिल सारे भारतीयों का है, तो तुम्हें लगता है कि वे ऐसा कह सकते हैं? 🤝 मुझे यकीन है हमेशा से और आने वाले दिनों में भी हमारा प्यार और समर्थन बने रहेगा।
 
जस्ती सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का नया सीनियर न्यायाधीश मानिया जा रहा था, लेकिन अब लगता है वह एक मAXIMALIST भी हैं। आधी रात तक अदालत में बैठने की घोषणा सुनकर पूरे देश में गगन चुपचाप पड़ गए। ये तो न्यायाधीशों की नई दिशा की बात नहीं कर सकती।

बोलते-बोलके जस्ती सर ने अपने बयान में एक अच्छी बात कही है, यह तो सच है कि अमीर लोग हमेशा अदालत में लग्जरी मुकदमेबाजी करते हैं, पैसा बनाकर-खarcha करके वे अपने न्यायिक अधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं।

लेकिन, अगर जरूरत पड़े, तो आधी रात तक अदालत में बैठने का मतलब यह नहीं है कि जस्ती सर सिर्फ आम आदमी के लिए एक दिव्य वाहन हो गए। इसका मतलब यह होगा कि हमारे न्यायपालिका में सुधार करने की जरूरत है। 🤔
 
जस्टिस सूर्यकांत जी का बयान सुनकर तो लगता है कि वह सच्चाई के प्रति बहुत खुले हैं। आधी रात तक अदालत में बैठने की बात तो थोड़ी विचारोत्तेजक है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी, तो वह इसे कर सकता है। यह सोच समझकर कहिए, हमारे देश में न्याय प्रणाली बहुत अच्छी है और इसके पीछे कई वर्षों का प्रयास है।

लेकिन एक सवाल उठता है, अगर उनकी अदालत में ऐसी बातें हो रही हैं, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि न्याय प्रणाली अच्छी है या नहीं, हमें इसके बारे में और जानने की जरूरत है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे देश में न्याय है, हमें अपने अदालतों को बेहतर बनाने की जरूरत है। 🤔
 
क्या ये सच्चाई है कि हमारे सुप्रीम न्यायाधीश आधी रात तक अदालत में बैठ सकते हैं? यह एक बड़ा सवाल है, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी अदालतों को विकसित करने की जरूरत है। अगर जस्टिस सूर्यकांत न्यायाधीश आधी रात तक अदालत में बैठ सकते हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि हमारे अदालतों में एक नई ऊर्जा आ गई है, लेकिन फिर भी बहुत कुछ करना है। मुझे लगता है कि न्यायाधीशों को अपने साथियों और अधिकारियों के साथ मिलकर अदालतों को विकसित करने की जरूरत है।
 
बोलो यार, यह तो सीजेआई का बयान है जो सबको दिल्ली की रास्ते पर धक्का मारता है... मुझे लगता है कि वह अपनी अदालत में आधी रात तक बैठने वाला तो शायद अपने घर के पीछे बैठता है और दूसरों को चुनाव में मतदान करने के लिए मजबूर करता है। मैं कहूंगा अगर जरूरत पड़े, तो सीजेआइयों की आधी रात तक भी बैठक नहीं होगी।
 
क्या यह सच है? सीजेआई तो हमेशा लोगों को अपनी अदालत में भागने के लिए मजबूर करते रहते हैं। अब वे अपनी अदालत में आधी रात तक बैठने की चोटी पर खड़े हो गए। यह कैसे संभव है? क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई मामला नहीं देखा है जिसमें न्याय की जरूरत थी, लेकिन वे तो उसके लिए भाग गये। इसके पीछे क्या गड़बड़ी है? कोई सूत्र बताएं, फिर हम बात कर सकते हैं।
 
मैंने सुना था कि जस्टिस सूर्यकांत न्यायाधीश तो आधी रात तक अदालत में बैठ सकते हैं... तो वास्तव में क्या जरूरत है? वह इतने लंबे मामलों को हल करने के लिए कैसे प्रेरित होंगे? और वह कह रहे हैं कि मुकदमेबाजी अमीर लोग ही लड़ते हैं... तो हमारा स्थान सिर्फ अंतिम पंक्ति के व्यक्तियों का है? मुझे लगता है कि न्यायपालिका और आम आदमी के बीच कुछ गलत हो गया है।
 
😂🤣 अगर जरूरत पड़े तो जस्ती सूर्यकांत ने अपनी अदालत में आधी रात तक बैठने का बयान दिया है 🕰️। मुझे लगता है कि ये एक पूरी मुश्किल का सामना करने वाले न्यायाधीश का बयान है जो अपने सिरों पर ताज़गी लाने की कोशिश कर रहे हैं 🤸‍♂️। लेकिन अगर जरूरत पड़े तो वास्तव में उनकी अदालत में आधी रात तक बैठना एक बड़ी बात है 🤯। सिर्फ इसलिए नहीं कि यह दिखाने की कोशिश है कि वह सबसे छोटे, गरीब लोगों के लिए खड़े हैं बल्कि वास्तव में उनके लिए आधी रात तक बैठना एक बड़ी क्षमता है जो उन्हें अदालत में अच्छा समय दिलाने में मदद करेगी। 👍
 
भाई, यह बयान सीजेआई का ही नहीं, हम सभी न्यायपालिका के लिए एक अच्छा प्रेरणा है 🙏। अगर जरूरत पड़े, तो किसी भी व्यक्ति के लिए आधी रात तक सुनने और लड़ने को तैयार रहना हमें सबक सिखाता है। मैंने कई बार कहा था, प्लग-इन-द-राश, प्लग-आउट-द-राश का यही मतलब है - अगर जरूरत हो, तो हमें हर किसी के लिए समय देना चाहिए। सीजेआई ने सच कहा है, मेरी अदालत में कोई अमीर लोग नहीं हैं जो हमारे साथ बैठते हैं। हम सब अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए ही यहां हैं।
 
मैं समझ गया हूं, अगर जरूरत पड़े, तो आधी रात तक बैठने की बात कितनी बड़ी है? लेकिन फिर सोचते हुए, मुझे लगता है कि यह बहुत ही अजीब है। आधी रात तक बैठने की बात तो अच्छी है, लेकिन सीजेआई को इसके पीछे क्या खेल खेल रहा है? और अगर वे ऐसा करने के लिए तैयार हैं, तो फिर इसका मतलब यह नहीं है कि वह मामलों में लग्जरी मुकदमेबाजी कर रहे हैं? नहीं, नहीं, मुझे लगता है... और फिर, सोचते हुए, शायद वे दोनों बातें सही हो सकती हैं... अरे, यह तो बहुत ही जटिल है!
 
बोलते बोलते सीजेआई का बयान पूरी तरह से ठीक है 🤔, ये जरूरत पड़ने पर आधी रात तक बैठने की बात सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगी, लेकिन अगर उन्हें ऐसी जरूरत है तो चाहे दो-चार घंटे भी बैठ जाएं। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि मेरी राय में यह बहुत लंबी बात है, और इसे थोड़ा छोटा करके समझने पर बेहतर होगा। 📝
 
वाह, जस्टिस सूर्यकांत भाई का बयान तो बहुत प्रेरणादायक है! 😍👏 उनकी मोटिवेशन और समानता की बातें सुनकर मन भी खुश होता है। यह देखकर अच्छा लगता है कि वह अपने अदालत की जिम्मेदारियों को लेकर कितना ईमानदार हैं और सबसे गरीब व्यक्ति के प्रति इतना संवेदनशील हैं। उनकी बातें सुनकर हमें भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मोटिवेट रहने की आवश्यकता है। 🤩👍
 
भाई, तुमने सुना है कि सीजेआई ने कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो वह आधी रात तक अदालत में बैठ सकते हैं? मुझे लगता है कि यह बहुत ही दिलचस्प बात है। लेकिन मैं समझ नहीं पाया, क्योंकि अगर जरूरत पड़ती है, तो क्या आधी रात का मतलब है? और क्या यह अर्थ है कि वह सिर्फ एक-एक करके मामले हल करेंगे, या एकदम सब मिलाकर? 🤔

मैंने देखा था कि अदालत में बार-बार देरी होती है, तो अगर सीजेआई आधी रात तक बैठते हैं, तो फिर क्या होगा? अधिकारियों को अपने काम को चालू रखने के लिए कैसे मिलेगा? 🕰️

क्या हमें पता है कि सीजेआई की यह बात कहीं वास्तविकता में बदल जाएगी या नहीं? और अगर नहीं, तो फिर क्या इस बारे में कोई प्लान बनाया गया है? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही रोचक विषय है, लेकिन अभी तक मुझे इसके बारे में और जानने को मिला नहीं है।
 
बस इतना कहूं कि सीजेआई का बयान अच्छा लग रहा है 🤔। जो पढ़ते हैं वह जानते हैं कि भारत में न्यायपालिका हमारी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन अक्सर यह ताकत अपनी सीमाओं पर आ जाती है। अगर जरूरत पड़े तो सीजेआई सही कह रहे हैं कि वह आधी रात तक बैठ सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य न्यायाधीश भी ऐसा करने के लिए मजबूर होंगे।
 
अरे, ये सुनकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ 🤔, जस्टिस सूर्यकांत ने इतना बयान दिया कि लगता है वो अपने पेशे के बारे में सही मायनों में नहीं समझ रहे हैं। आधी रात तक अदालत में बैठने की बात तो सचमुच बहुत बड़ा काम है, और अगर जरूरत पड़े तो ऐसा करने के लिए हमेशा तैयार रहना जरूरी है...लेकिन क्या यह एक सामान्य चीज है? मुझे लगता है नहीं।
 
ज़रूरत पड़े तो आधी रात तक बसना क्या शर्मिंदगी है? 🤔 सीजेआई जी ने ये बयान दिया, पर हमें पूछना चाहिए कि अगर जरूरत नहीं पड़ी, तो फिर क्यों आधी रात तक बसेंगे? 🕰️ यह भी सवाल है कि सीजेआई जी ने मामलों की अर्जेंट लिस्टिंग के लिए ओरल मेंशनिंग बंद करने का क्या हाल? 💼 यह तो देखकर ही पता चलेगा।
 
जस्तीसूर्यकांत न्यायाधीश का बयान सुनकर मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है - क्या यह हमारे देश की अदालतों में प्रतिष्ठा और गुणवत्ता को लेकर एक संकेत है? आधी रात तक अदालत में बैठने का क्या मतलब होगा? यह वास्तव में अदालत के कार्यों की समझ को बदल देगा। और इतनी भी मुश्किल परिस्थितियां निर्धारित करने से अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी।
 
मुझे लगता है कि जस्टिस सूर्यकांत ने इस बयान से अपनी अदालत के अनुभव और समर्थन को प्रदर्शित किया है, लेकिन मैं यह सवाल नहीं कर सकता कि अगर जरूरत पड़े, तो आधी रात तक बैठना आसान है? हमारे देश में वकीलों को भी अपने परिवार और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए समय निकालना होता है… 🤔
 
Back
Top