Hate Speech : घृणा फैलाने वाला भाषण देने पर 10 साल की होगी जेल, कर्नाटक में पेश हुआ बिल

कर्नाटक विधानसभा में पेश हुआ नया विधेयक घृणा फैलाने वाली भाषण देने को 10 साल तक जेल की सजा का सामना करना पड़ेगा। इस अधिनियम में घृणास्पद भाषण को बहुत चौखंडों में परिभाषित किया गया है।

इस अधिनियम में यह कहा गया है कि जिस व्यक्ति, समूह, वर्ग या समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह की गई कोई भी मौखिक या लिखित अभिव्यक्ति शामिल है, वह घृणा फैलाने का उद्देश्य से की जाए। इसमें धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय, लिंग, यौन अभिन्यास, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, विकलांगता या जनजाति के आधार पर होने वाला पूर्वाग्रह शामिल है।

इस अधिनियम में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय, लिंग, यौन अभिन्यास, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, विकलांगता या जनजाति के आधार पर हुए पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोई भी मौखिक या लिखित अभिव्यक्ति करता है, तो वह इस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है।

इस अधिनियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति घृणा फैलाने वाली भाषण देता है या लिखता है, तो उसकी सजा 10 साल तक की हो सकती है। इसके अलावा, यह अधिनियम उन व्यक्तियों को भी शामिल करेगा जिन्होंने घृणा फैलाने वाली भाषण देने या लिखने में सहयोग किया है।

इस अधिनियम से नाराज़ होकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने अपनी निंदा व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि यह अधिनियम लोकतंत्र को खतरे में डालेगा।
 
मुझे लगता है कि इस अधिनियम में बहुत सारे गैर-विचार करने वाले भाग शामिल हैं। जैसे कि, कौन कहता है कि एक ही जाति या समुदाय के लोग हमेशा एक ही तरह के पूर्वाग्रह रखते हैं? और क्या हमें सोचने नहीं देते कि कुछ लोगों ने बोलने की अपनी आजादी को खोने के बाद इन जिम्मेदारियों को उठाने का फैसला किया है?

इसके अलावा, मुझे लगता है कि भाषण देने से लेकर लिखने तक, हमें अपनी विचारशीलता पर ध्यान देने की जरूरत है। हम तो अपने देश में बहुत सारी छोटी-मोटी चीजों को इतना गंभीर बनाते हैं और फिर बोलचाल में भूल जाते हैं।

आजकल इतने अधिनियम लगने लगे हैं कि हम अपनी आजादी को क्या समझते हैं?
 
मेरा दिमाग भी नहीं समझ पाएगा क्या तीन पहियों की सवारी सीखने के बाद अब चार पहियों की सवारी करने की कला शुरू कर देंगे। घृणा फैलाने वाली भाषण को 10 साल तक जेल की सजा मिलने से मुझे लगता है कि लोगों की नाक धूम रहेगी।
 
[gif: एक मजाकिया वीडियो जहां एक पुरुष अपने दोस्त से कहता है "तुम्हारी भाषण देने की क्षमता कितनी अच्छी है, तुम घृणा फैलाने वाली भाषण देकर मेरे दिल को टूट सकते हो!"]
 
🤔 मुझे लगता है कि यह अधिनियम ज्यादातर लोगों के प्रति अनुमानित है। कोई भी व्यक्ति अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार रखता है, बस इसकी दूरी रखनी चाहिए। 10 साल तक की सजा को मुझे समझ नहीं आता। 🤷‍♂️
 
अरे, यह नया अधिनियम बहुत पेचीदा लगता है, जिसमें घृणा फैलाने वाली भाषण देने को 10 साल तक जेल की सजा का सामना करना पड़ेगा। मुझे लगता है कि यह अधिनियम बहुत चंचल है, जैसे कि हमें किसी भी चीज़ पर रोक लगाने के लिए नहीं बनाया गया है।

मैं सोचता हूँ कि इस तरह के अधिनियमों को बनाने से पहले हमें यह पूछना चाहिए कि क्या वास्तव में हमारी सरकार में घृणा फैलाने वाली भाषण देने की समस्या बहुत ज्यादा है। और क्या यह अधिनियम वास्तव में लोकतंत्र को बचाएगा या नहीं।

कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के अधिनियमों से हमारी राजनीतिक दल और समाज को डरा जाएगा। और यह भी सच है कि हमें अपने देश के शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने की बहुत जरूरत है। लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह के अधिनियमों से हमारे समाज में खुलकर बोलने और विचार विवाद करने की भावना कमजोर हो सकती है।
 
मुझे लगता है कि इस अधिनियम से हमारे देश की स्वतंत्रता और विचारवाद की भावना पर एक बड़ा असर पड़ेगा। जितना कहा गया है, कोई भी व्यक्ति अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए रोका नहीं जा सकता, यह हमारे देश की स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 🤔

इस अधिनियम में घृणा फैलाने वाली भाषण को बहुत चौखंडों में परिभाषित किया गया है, जिससे लोगों को अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए डर लगेगा। इससे हमारे देश की राजनीति और समाज में एक नए प्रकार का तनाव फैल सकता है। 💥
 
Wow 😱 इस बात पर चिंता है, जैसे पूर्वाग्रह की जगह विचारों की स्वतंत्रता का ख्याल नहीं रखा गया है। 🤔
 
🤔 यह अधिनियम बहुत ज्यादा भयंकर है, मेरा ख्याल है की इसे सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए। लोगों को अपने शब्दों का ख्याल रखना चाहिए, परंतु यह अधिनियम बहुत ज्यादा भयंकर है, मेरा ख्याल है की इससे लोकतंत्र को खतरा हो सकता है। 🤷‍♂️
 
यह नया विधेयक बिल्कुल सही नहीं है, 10 साल तक जेल की सजा तो बहुत ज्यादा है। घृणा फैलाने वाली भाषण पर इतनी कड़ी सजा देने से लोकतंत्र में पूरा विश्वास टूट जाएगा। इसमें ध्यान रखना चाहिए कि यह अधिनियम किसी व्यक्ति, समूह, वर्ग या समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने की सजा नहीं देता, बल्कि घृणा फैलाने का उद्देश्य से ऐसा करने पर जेल की सजा है। लोकतंत्र में विविधता और विभिन्न दृष्टिकोणों को सम्मानित रखना चाहिए। इस अधिनियम के तहत उन्होंने जो निंदा व्यक्त की है, वह सही है।
 
बिल्कुल सही है, सरकार द्वारा इस तरह के अधिनियम बनाने से पहले हमें बहुत सोच-विचार करना चाहिए। 😕🤔 यह अधिनियम लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कम कर सकता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह के अधिनियम बनाए जाने से पहले हम सभी की बातों को सुनना चाहिए और अपनी राय व्यक्त करनी चाहिए। #लोकतंत्रकी रक्षा करना है #व्यक्तिगतस्वतंत्रता #बिल्कुलसही
 
क्या 10 साल तक जेल की सजा सही है? ऐसा लगता है कि हमारे देश की आजादी और विचाराधीनता के लिए यह बहुत खतरनाक हो सकता है। लोग अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता पर विश्वास करें, ठीक है लेकिन इस अधिनियम में जिस तरह से घृणा फैलाने वाली भाषण को परिभाषित किया गया है, वह बहुत चुनौतीपूर्ण है।
 
मुझे लगता है कि यह अधिनियम बहुत भेदभावपूर्ण होगा, क्या हमारी संविधान के तहत बहस और विवाद की स्वतंत्रता पर कोई जुर्माना लगाया जाएगा? 🤔
इस अधिनियम में यह कहा गया है कि पूर्वाग्रह की गई भाषण देने को 10 साल तक जेल की सजा होगी, लेकिन क्या हम इस बात पर सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर व्यक्ति जो घृणा फैलाने वाली भाषण देता है, वह अपने पूर्वाग्रहों को छिपाए रखेगा?
अगर ऐसा होगा, तो हमारे समाज में लोगों को अपने विचारों और सोच को दबाने के लिए मजबूर किया जाएगा। इससे न केवल हमारी स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा, बल्कि यह हमारे समाज की स्वस्थ बहस और चर्चा को भी खतरे में डालेगी।
 
यह नया विधेयक बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर जब हमारे समाज में बहुत सारे लोग अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की आजादी के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन यह तो स्वीकार करना चाहिए कि घृणा फैलाने वाली भाषण कभी कोई अच्छा नहीं होता और हमें अपने समाज में शांति और सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए संघर्ष करना चाहिए।

लेकिन यह तो कहने से पहले कहना भी होगा कि अधिनियम की इस तरह की परिभाषा में बहुत सारे शब्दों को शामिल किया गया है, जो स्वाभाविक रूप से लोगों को घृणा महसूस करा सकते हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि हम अपनी इस परिभाषा को सोच-समझकर बनाएं ताकि हमारे समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहिष्णुता का समग्र भाव बना रहे।
 
ਮेरੇ ਅੱਤਵਾਦੀ ਨੂੰ ਲੋਕ ਗੱਲ ਬਣਾਉਣੇ, ਸੁਝਾਉਣੇ ਨਹੀਂ। ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਪ੍ਰਗਟ ਨਹੀਂ ਲਵੋਗੇ, ਤਾਂ ਮੈਂ ਜ਼ਬਰਦਸਤੀ ਜਾਣ ਕੇ ਭੱਲਾ ਹੋ ਸਕਾਂਗਾ।
 
क्या सोचोगे अगर हमारे देश में जिस तरह विचारों की राजदूती है, वही चीज इस विधेयक की शुरुआत में भी हुई। 10 साल तक जेल की सजा सुनाने से नाराज़गी बढ़ेगी, लेकिन मुझे लगता है कि यह समस्या को हल नहीं कर सकता। इसके अलावा, इससे हमें यह सवाल करना चाहिए कि हमारे देश में जिस तरह की स्वतंत्रता है, वही स्वतंत्रता इस विधेयक में छुपी हुई है।
 
भाई, यह नया विधेयक तो सचमुच बहुत बड़ा मुद्दा है 🤯। मैं समझता हूँ कि सरकार चाहती है कि लोगों को अपने मतभेदों को रोकने के लिए यह अधिनियम लगाएं, लेकिन मुझे लगता है कि इससे लोकतंत्र पर गंभीर नुकसान हो सकता है। हमारी देश में स्वतंत्रता और विविधता को बहुत महत्व देते हैं, और इस अधिनियम को लागू करने से यह सब खतरे में पड़ सकता है।

मुझे लगता है कि इस तरह के अधिनियमों की जरूरत नहीं है। हमें अपने मतभेदों को समझने और सम्मान करने की ज़रूरत है, न कि उन्हें दबाने की। लोकतंत्र में विविधता ही उसकी शक्ति होती है 🤝
 
मुझे लगता है कि इस अधिनियम से लोकतंत्र की भावना को समझने में परेशानी होगी। 🤔 क्योंकि यह अधिनियम किसी भी व्यक्ति की अभिव्यक्ति को सीमित कर देगा। और इसमें कुछ शब्दों या फ्रेज़ को लेकर इतनी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत नहीं है। 🤷‍♂️ मुझे लगता है कि हमारे समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। और इस अधिनियम को बनाने वालों ने यह समझने में असफल रहे।
 
अरे, इस न्यायालय द्वारा बनाए गए यह नया विधेयक तो ही बहुत ही चुनौतीपूर्ण है, बोलते समय अपने विचारों को स्थान पर रखना पड़ेगा, लेकिन ऐसा करने से हमारी स्वतंत्रता और संवाद में ख़राबी, तो नहीं आ सकती। भारत में हमारे समाज में बहुत ही विविधता है, हर किसी का अपना तरीका, विचार और राय होती है।
 
अरे, यह देखकर मन में भारी संकट आ गई। 10 साल तक जेल, वास्तव में इतना बड़ा न्याय? परन्तु भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें अपनी आवाज़ उठानी होगी। कुछ लोगों ने यह अधिनियम अपनी पक्षपात से लिया, पर इसे एक मानवाधिकार का विरोध नहीं करना चाहिए।
 
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