इंदौर के बाद गांधीनगर में दूषित पानी, 104 बच्चे बीमार: अस्पताल में नए वार्ड खोलने पड़े; पाइप लाइन में लीकेज से पानी में सीवेज की गंदगी मिली

गांधीनगर में दूषित पानी से 104 बच्चों की जान चली गई, अब तुरंत नया वार्ड बनवाना पड़ा

दिल्ली में हाल के दिनों में इंदौर की तरह ही गांधीनगर में भी पीने के पानी में सीवेज की गंदगी लगने से बच्चों और बड़े लोगों को बीमारी होने लगी है। इस दुष्चक्र में अब तक 104 बच्चे मर चुके हैं। इनमें से 50 प्रतिशत का टाइफाइड हो गया है, जिसके बाद अस्पताल में नए वार्ड खोलने पड़े थे।

गांधीनगर शहर के सेक्टर-24, 28 और आदिवाड़ा इलाकों के लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन जगहों पर पानी की पाइप लाइन में गंदगी लगने से कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। शहर के प्रशासन ने पानी की सप्लाई जांचते समय 10 जगहों पर लीकेज मिली, जो स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों की लागत से बनाई गई नई पाइपलाइन थी।

इस दुष्चक्र ने गांधीनगर के लोगों को बहुत परेशान किया है। इस मामले में 75 स्वास्थ्य टीम तैनात की जा रही हैं, जिन्होंने 90 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की हैं। अब डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि मामलों की संख्या 20 जनवरी तक 350 का आंकड़ा पार कर जाएगी।
 
मैंने देखा है कि गांधीनगर में बच्चों की जान जो चली गई, वो बहुत ही दुखद है। ऐसे में शहर में नया वार्ड बनाना जरूरी होगा, ताकि पीड़ितों की परेशानी कम हो। इसके अलावा, पानी की सप्लाई की जांच करनी चाहिए और सभी जगहों पर सीवेज निकलने को रोकना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूँ कि सरकार जल्द से जल्द कुछ कदम उठाएगी और गांधीनगर के लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिश करेगी।
 
अरे, यह तो बहुत ही गंभीर समस्या है, लोगों के जीवन का क्या मान? दूषित पानी से बच्चों की जान चलने की बात सुनकर मुझे बहुत खेद होती है। सरकार ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत नई पाइपलाइन बनाई, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वहां की जांच न हो।

गांधीनगर में ऐसी समस्याएं तब और भी बढ़ सकती हैं अगर सरकार इसे सही से नहीं देखती। मुझे लगता है कि वार्ड बनाना एक अच्छा पहलकदम है, लेकिन इसके साथ-साथ प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
 
मैंने गांधीनगर में ऐसा कभी नहीं देखा। बच्चों की जान चली गई और अब नया वार्ड बनवाना पड़ रहा है। यह बिल्कुल भी सही नहीं है कि प्रशासन स्मार्ट सिटी योजना में इतना पैसा खर्च कर रखे तो लीकेज की तरह गंदगी का पता न चले। शहर के लोगों को यह जानकर बहुत परेशानी हुई है। क्या यह सोचा गया था कि पीने के पानी में सीवेज की गंदगी फैलेगी? 🤕

मुझे लगता है कि शहर के प्रशासन को अपनी गलतियों पर सुधार करना चाहिए। पाइप लाइन जांचना और ठीक करना जरूरी है। और सबसे ज्यादा, बच्चों की जान बहुत मूल्यवान है, इसलिए इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हमें सावधान रहना चाहिए। यह तो हमेशा सोचकर नहीं चलेगा अगर हम एक-दूसरे पर भरोसा करें।
 
ਮेरੇ ਦਿਲ ਨੂੰ ਇਹ ਸੁਣਕੇ ਪਿਆਰਾ ਭਾਰਤ ਵਾਲੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਲੁੱਟੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ... ਪਰ ਮੈਨੂੰ ਇਹ ਕਹਿਣ ਵਿੱਚ ਡਿਸ਼ਟ ਆ ਜਾਏਗਾ ਕਿ ਅਜ਼ਾਦ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਮਨੁੱਖਤਾ ਦੀ ਹੋਂਦ ਕਿਵੇਂ ਖ਼ਤਮ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ... 104 ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਲੈਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ... ਇਹ ਤਾਂ ਹਮੇਸ਼ਾ ਜਾਣਦਿਆਂ ਬੱਝੇ ਰਹੇ ਹਨ...
 
यह तो बहुत ही दुखद बात है। पानी की गंदगी से इतने बच्चों की जान चली गई, यह तो हमें बहुत परेशान करता है। सरकार द्वारा बनाई गई स्मार्ट सिटी योजना में लीकेज मिलना, यह हमें बड़ी चिंता भरने वाली बात है। प्रशासन को इस समस्या का समाधान तुरंत करना होगा।
 
यह तो बहुत ही दुखद खबर है ... बच्चों की जान चली गई, यह तो हर माता-पिता के लिए एक रोने वाली सिनेमा है। गांधीनगर में ऐसी स्थिति तो हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में नहीं . हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूलों और खेल के स्थलों पर पानी की सप्लाई सुरक्षित हो।
 
मैंने देखा, गांधीनगर में कितनी त्रासदी हो रही है, 104 बच्चों की जान चली गई, और अब न तो शहर में विश्वास है ? शहर में पानी से लीकेज आ रही है, और लोग बीमार पड़ रहे हैं, यह बहुत दुखद है। शहर के प्रशासन को जल संबंधित समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, ताकि इससे आगे कोई और बच्चा नहीं मरे। मैं आशा करती हूं, जल संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए शहर के प्रशासन को हर संभव प्रयास करना चाहिए। 🤕
 
अरे दुखदी बात है गांधीनगर में बच्चों की इतनी भी जान चली गई। यह तो सरकार से मिलकर नई पाइपलाइन बनवाना पड़ेगा, नहीं तो ऐसा ही होने देना नाहीं... 🤕 10 जगहों पर लीकेज मिली, यह तो बहुत बड़ी बुराई है। डॉक्टरों की चिंता भी है कि मामलों की संख्या बढ़ जाएगी। सरकार को जल्द से जल्द कुछ करना पड़ेगा... 💔

[लिंक: https://www.jagran.com/gujarat/gand...sambhaal-hi-gya-to-warad-banvaya-1502221.html]
 
अरे देखो यह तो बहुत ही गंभीर समस्या है, जिससे बच्चे मर रहे हैं और जान जोखिम में है। यह तो स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ा चुनौती है और शहर के प्रशासन के लिए बेलगाम होना चाहिए। अगर गंदगी लगने से 50% बच्चों में टाइफाइड हो गया है, तो इसका मतलब है कि पानी की सप्लाई पर नियंत्रण नहीं है। शहर के लोगों को अच्छी पीने की सुविधा मिलनी चाहिए, और सरकार को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। अब नई वार्ड बनवाने की बात सुनकर अच्छा लग रहा है, लेकिन इसके लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
 
🚽 दुष्चक्र को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। 🕰️ पानी की सप्लाई की जांच और सुधार जरूरी है, खासकर बच्चों की सेहत का ध्यान रखने के लिए। 💔 104 बच्चों की मौत को ठीक नहीं सोच सकता। उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। 🚮 पाइपलाइन की मरम्मत करने के लिए तैयार रहें। 👥 स्वास्थ्य टीमों की जरूरत है, लेकिन तेजी से समाधान की जरूरत है।
 
मुझे इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर बेहद दुख हुआ है। गांधीनगर के लोगों को इतनी बड़ी संख्या में पानी की कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है तो समझना मुश्किल है। हमारे इस देश में भी हमें अपनी जीवनशैली और स्वच्छता को बनाए रखने के लिए बहुत जिम्मेदार रहना चाहिए। 🤕

मेरा विचार है कि हमें अपने पानी सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सरकार और नागरिक दोनों को मिलकर काम करना होगा। हमें अपने घरों और आसपास के इलाकों को साफ रखने के लिए नियमित रूप से सफाई करानी चाहिए। इससे हम अपने पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं और दूसरों को भी इस समस्या से मुक्ति दिला सकते हैं। 💧

हमारे देश में हर जगह ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं, लेकिन यह हमें उनसे सीखने का मौका भी देती है। इसलिए, आज से हम अपने पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देने का फैसला करें। 🌟
 
कौन सी बात और भी अजीब है यह? गांधीनगर के लोगों ने पहले स्मार्ट सिटी योजना को बहुत उत्साह के साथ लिया था, लेकिन अब जब पानी से जुड़ी समस्याएं आ गई हैं तो यह सब गायब हो गया है। 10 जगहों पर लीकेज मिलने से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है, और फिर भी प्रशासन को यह नहीं सुनने दिया कि इस समस्या को जल्द से जल्द हल कर दिया जाए।

यह तो सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। सरकार को अपने शहर के लोगों की सेहत और सुरक्षा पर ध्यान रखना होना चाहिए, न कि खुद को फायदा देने में उलझना। अगर सरकार जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान ढूंढ लेती है तो यह अच्छा होगा, लेकिन अगर नहीं तो... कौन जानता है कि आगे क्या होता है। 🤔💧
 
बिल्कुल सही है दुर्भाग्य इस शहर में बच्चों की जान जा रही है, और यह सब तो दुष्चक्र के कारण ही है। लेकिन क्या हमारे पास ऐसी नीति है कि हम अपने बच्चों की जिंदगी को इतनी कीमत में लें। हमें ऐसी स्थिति में नहीं आने देना चाहिए, तभी हम एक अच्छा शहर बना सकते हैं।
 
ये तो कुछ भी नहीं हुआ, सरकार अभी भी स्मार्ट सिटी योजना पर ध्यान दे रही है, लेकिन जब वास्तविकता आती है तो सब कुछ खराब हो जाता है। यहाँ गांधीनगर में बच्चों की जान जा चुकी है, और फिर भी सरकार ने पानी की सप्लाई पर ध्यान नहीं दिया। यह तो कुछ बड़े मकसद से हुआ, ताकि हम सभी को सिखाया जा सके कि गंदगी से बच्चों की जान जा सकती है।
 
मुझे लगता है कि गांधीनगर में पानी की समस्या को हल करने के लिए नई वार्ड बनाना एक अच्छा विचार है, लेकिन शायद पहले इन्हें गंदगी साफ कर दो।

मुझे लगता है कि शहर के प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करना चाहिए और इस मामले में निकाल-फेकने से बचें।

अब जब 104 बच्चे मर गए हैं तो शायद अब लोग गांधीनगर के प्रशासन की बात नहीं करेंगे।

मुझे लगता है कि यह समस्या निकाल-फेकने में नहीं, बल्कि इसके अंदर से हल करने में है।
 
बिल्कुल सही हुआ, गांधीनगर में ऐसा कोई बात नहीं हो सकती, जिससे बच्चों की जान चली जाए। ये एक बड़ी दुर्घटना है और इस पर कार्रवाई तुरंत करनी चाहिए। शहर के प्रशासन को पानी की सप्लाई सुधारने के लिए कुछ भी नहीं बाकी है।
 
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