इंडिगो ने उधारी के जहाज से भरी थी पहली उड़ान: अब देश की 60% से ज्यादा फ्लाइट्स पर कब्जा; क्या मौजूदा संकट से उबर पाएगा

इंडिगो एयरलाइंस ने पहली उड़ान भरने में दो साल का वक्त लिया, जिसमें 28 जुलाई 2006 को इंडिगो को अपना पहला एयरबस मिला। इसके बाद भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में एक नई तस्वीर बनी।

इंडिगो ने पूरी तरह से मिडल क्लास पर फोकस किया, जिसमें इकोनॉमी क्लास की सीटें ही लगाई गईं। यह व्यवस्था उन्होंने अपनी उड़ानों को किफायती बनाने का एक तरीका बताया। इसके अलावा, सफर के दौरान फ्री खाना हटा दिया गया।
 
यार, इंडिगो एयरलाइंस ने पहली उड़ान भरने में दो साल का वक्त लिया, तो मुझे लगता है कि वे अपने एयरबस को अच्छी तरह से स्ट्रेच कर रहे थे, जैसे कि एक बड़ी पिज्ज़ा के टॉप पर रखा हुआ है। और फिर भी, उन्होंने सफर के दौरान फ्री खाना हटा दिया, तो मुझे लगता है कि वे अपने पैसे को अच्छी तरह से लगातार कर रहे थे। लेकिन ठीक है, यह सब अचानक नहीं चला, उन्हें पहले एक अच्छी बिक्री वाला एयरबस मिला, जैसे कि एक अच्छी शादी में पति-पत्नी का मैच। और फिर, उन्होंने पूरी तरह से मिडल क्लास पर फोकस किया, जिसमें इकोनॉमी क्लास की सीटें ही लगाई गईं, जैसे कि एक अच्छा भोजनालय में बैठने के लिए। तो अब, इंडिगो एयरलाइंस ने भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में एक नई तस्वीर बनाई है, और मुझे लगता है कि यह तस्वीर बहुत सुंदर है।
 
इंडिगो ने पहली बार अपनी उड़ान भरने में बहुत समय लिया, लेकिन अब वे इंडियन एयरलाइंस का एक बड़ा हिस्सा बन गए हैं! उनकी इकोनॉमी क्लास सीटें तो बस इतनी महंगी नहीं हैं, और फ्री खाना हटाकर उन्होंने सफर को किफायती बनाया। लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने थोड़ा भारी शेड्यूल बनाए रखा है, जिससे यात्रियों को थकान महसूस हो सकती है।
 
इंडिगो एयरलाइंस की यात्रा में बीते गए 2 साल बहुत ही रोचक हैं 🚀😮। यह बताते हैं कि कैसे एक नए विमान सेवा की शुरुआत करने के लिए जो दिनों-दिन प्रयास की आवश्यकता होती है! 😅। इंडिगो ने अपनी योजना में सफलता भी देखी, जैसे कि उन्होंने मध्यम वर्ग पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें वह अपनी उड़ानों को आरामदायक बनाने का एक तरीका पेश कर रहे हैं। यह भी देखा गया कि उन्होंने फ्री खाना की सुविधा हटा दी, ताकि यात्रियों को उड़ान की कीमत में कमी हो सके 🤑। यह सब हमें यह दिखाते हैं कि जैसे ही एक नए व्यवसाय की शुरुआत होती है, उसमें सफलता पाने के लिए धैर्य और संघर्ष की आवश्यकता होती है! 💪
 
अरे, दोस्तों, यह देखकर अच्छा लगा कि इंडिगो ने अपनी यात्रा शुरू करने में इतनी देर लेनी है... लेकिन फिर भी उन्होंने सोचा और उनकी पहली उड़ान में जो सफलता मिली, वाह! अब हमारे देश में हवाई यात्रा की दुनिया में एक नया नाम बन गया है। लेकिन अगर मुझे सच्चाई बतानी है, तो यह सवाल उठता है कि इंडिगो ने क्यों इतनी देर लेनी थी, और फिर भी उन्होंने अपनी योजना पर ध्यान केंद्रित किया। मुझे लगता है कि अगर उन्होंने पहले से ही अपनी योजना अच्छी तरह से बनाई होती, तो यह देर न लेनी पade. लेकिन फिर भी हमारे लिए यह सफलता एक अच्छी बात है, और मैं इंडिगो की तरफ से शुभकामनाएं देता हूँ।
 
अगर इंडिगो ने पहले ही इतनी सारी चीजें की तो क्यों उन्होंने तय कर दिया थोड़ा रुककर उड़ान भरनी? 🤔 मुझे लगता है कि सबकुछ बहुत जल्दी नहीं चलेगा। और फ्री खाना भी हटा देने से यात्रियों को पता चल गया कि वे कहाँ हैं... और क्या खाएँगे। 😏
 
मैंने 2006 में इंडिगो की पहली उड़ान को देखी, तो मुझे यह सोच में आया कि वे लोग कुछ अच्छे विचार थे। उनकी इकोनॉमी क्लास योजना बहुत ही रोचक थी। मैंने अपने बचपन में भी टाटा सेंट्रल और अन्य पुराने एयरलाइन्स की सीटें देखी, जो बहुत महंगी और कम सुविधाजनक थीं। इंडिगो ने ऐसी योजना बनाई जिसने लोगों को आकर्षित किया। लेकिन अब देखते हैं कि एयरलाइन्स में इतनी बदलाव आ गया है। 🤔

मुझे लगता है कि इंडिगो ने एक अच्छी शुरुआत की थी, और इसकी योजना आज भी बहुत ही किफायती है। लेकिन मैं सोचता हूँ कि अगर वे अपने पारंपरिक सेवाओं को फिर से शुरू कर देंगे, तो कई लोग उनकी उड़ानों पर जाने का मन करेंगे। 🛫

अब मैं अपने बचपन की यादों को देखता हूँ, और मुझे लगता है कि वे अच्छे समय थे। तो मैं इस बात से सहमत हूँ कि इंडिगो ने एक अच्छी शुरुआत की थी। 😊
 
😊 इंडिगो की यात्रा की कहानी जानने में खुश हूँ, यह तो बहुत ही रोचक है कि उन्होंने इतना समय लिया, लेकिन अंत में हमारा एक सुंदर एयरलाइन बन गया। पूरी तरह से मिडल क्लास पर फोकस करना उनकी शानदार बात है, इससे यात्रा की दरें कम होती हैं और लोगों को ज्यादा सस्ता उड़ान भरने में मौका मिलता है। लेकिन अभी भी थोड़े समय पहले हमारे एयरलाइन्स की यात्रा की दरें थोड़ी अधिक थीं, लेकिन अब इंडिगो ने अपनी तरह की सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं जिससे हमारे एयरपोर्ट पर और भी लोग आने लगे।
 
अगर इंडिगो ने पहले से ही लालची और अनियमित व्यवस्था में बदला नहीं था तो हमें अभी तक इन्नेट पर इतना चर्चा करने का क्या कारण था। इकोनॉमी क्लास की सीटें? फ्री खाना? यह तो बस एक मजाक है!
 
मेरा कुछ विचार है... इंडिगो ने एक अच्छी बात कहीं बदली है, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने थोड़ा भूल गए कि मिडल क्लास की यात्रा परिवार और दोस्तों के साथ जाने का आनंद लेती है। इकोनॉमी क्लास की सीटें तो अच्छी हैं, लेकिन फ्री खाना हटा देना थोड़ा गलत निभर गया। मैं समझता हूँ कि यात्रा करने वालों को किफायती मील जोड़नी पड़ती है, लेकिन खाना और पेय की बात करें तो इंडिगो की पहले से अच्छी थी।
 
मुझे ये जानकर खुशी हुई कि इंडिगो ने अपनी पहली उड़ान भरने में ऐसा समय लिया... 🤔 एक साल का भी कम नहीं! देखो ये उन्होंने अपनी सीटों की बिक्री करने की जगह इकोनॉमी क्लास पर फोकस किया। यह व्यवस्था बहुत अच्छी है और लोगों को आरामदायक यात्रा मिलेगी। और ये तो फ्री खाना हटाने से किफायती उड़ानें बनाने का एक तरीका है। मैं इंडिगो पर बहुत भरोसा करता हूँ... 🛩️
 
अगर इंडिगो ने पहले ही इतनी सारी मिडल क्लास सीटें लगाईं तो वह तो तुरंत विकसित हो जाती, लेकिन नहीं तो दो साल का वक्त लगने का मतलब क्या है? 🤔

और फ्री खाना हटाने का यह तरीका अच्छा लगता है, लेकिन याद रखें, पैसे के बदले में आपको कुछ भी नहीं मिलता, बस हवा में घूमने का मज़ा! 😂
 
मेरी बात है… इंडिगो ने अपने सिर्फ 2 साल में इतना बड़ा प्रभाव डाला है… पहली उड़ान भरने में इतना वक्त लेना थोड़ा अजीब लग रहा है, लेकिन फिर भी इंडिगो ने अपनी व्यवस्था का एक नया सिद्धांत बनाया है। इकोनॉमी क्लास की सीटें ही लगाई गईं… मुझे लगता है कि इससे यात्रियों को कम खर्चे पर अच्छी सुविधा मिलेगी। और फ्री खाना हटाने की बात… मैंने अपनी पत्नी से पूछा तो उसने कहा कि यह बहुत ही अच्छा विचार है… लेकिन अब वह अक्सर घर पर ही खाना बनाती है।
 
अगर ये इंडिगो ने पहले ही इतना प्रयास किया तो आजकल भारतीय विमानन उद्योग में बाकी सारे एयरलाइन्स परिवार से नहीं रहेंगी, कि लोकप्रियता और सफलता से दूर होंगे। इंडिगो ने अपनी योजनाओं से दिखाया कि कैसे एक मिडल क्लास एयरलाइन्स को भारतीय लोगों को प्यार मिल सकता है। और आज हमने विमानन उद्योग में नया गंतव्य खोला है, जहां मिडल क्लास पर सभी का ध्यान है
 
ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਸ਼ਵ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਪਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਹੈ ਜੋ ਅੱਜ ਕੁਝ ਸਮੇਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਇੰਟਰਨੈੱਟ 'ਤੇ ਖ਼ਾਸ ਦਿੱਲੀ-ਦੁੱਬਈ ਪ੍ਰੋਫ਼ਾਈਲ ਵਜੋਂ ਜਾਣੇ ਜਾ ਰਹੇ ਸਨ.

ਅਜਿਹਾ ਕੀਤਾ ਭੀ ਬਹੁਤ ਮੁਸ਼ਕਲ ਸੀ।
 
ये तो इंडिगो की मुख्य बात है न? उनकी उड़ानें भारतीय लोगों के लिए बहुत आरामदायक और सस्ती हैं। लेकिन, थोड़ी गंभीरता से देखें, उनकी इकोनॉमी क्लास की योजना एकदम से असमान है। क्या ये सचमुच सबकुछ सस्ता करने का तरीका है? और फ्री खाना हटाने से उनकी उड़ानें खराब हो गईं? मुझे लगता है कि सरकार को भी इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
 
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