ICMR अलर्ट: 2030 तक भारत में बढ़ेगा फेफड़ों का कैंसर, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

भारत में फेफड़ों के कैंसर की दर बढ़ रही है, और आगे चलकर 2030 तक यह समस्या बदतर हो सकती है। अध्ययन से पता चलता है कि केरल के जिलों में, जहां तंबाकू और शराब का सेवन कम है, पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर अधिक होती है। लेकिन वहीं दक्षिण भारत में महिलाओं में हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।

उत्तर भारत में श्रीनगर में पुरुषों की तुलना में फेफड़ों के कैंसर की दर अधिक रही, जबकि उसी शहर और पुलवामा में महिलाओं में नशे की संख्या कम होने के बावजूद उच्च दर से आंकी गई। यह समस्या महिलाओं को भी प्रभावित कर रही है, खासकर उन जिन्होंने नशीली दवाओं का सेवन कम किया है।

आखिरकार, यह सवाल उठता है कि हम क्या कर सकते हैं अपने देश में फेफड़ों के कैंसर की समस्या को रोकने के लिए? इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा। हमें जागरूकता बढ़ानी होगी, तंबाकू और शराब के सेवन को कम करना होगा, और विशेष रूप से महिलाओं को फेफड़ों के कैंसर के खतरों के बारे में जागरूक करना होगा।
 
तंबाकू और शराब की समस्या बहुत बड़ी है हमें इसके बारे में सोचना होगा 🤔। यह तो सही कहिए फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है तो लोगों को जागरूक करना होगा। शायद सरकार और पुलिस को भी अपने दम पर काम करना होगा लेकिन लोगों को भी इसके बारे में सोचना होगा। हमें अपने गाँव-गांव जाकर फेफड़ों के कैंसर के बारे में बताना होगा, और लोगों को समझाना होगा कि इससे बचने के लिए क्या करें।
 
देखो देश की समस्याएं बढ़ रही हैं तो... पुरुषों के फेफड़ों के कैंसर में वृद्धि तो एक बात है, लेकिन महिलाओं की दर भी बढ़ गई है जैसे हैदराबाद और बेंगलुरु में नशीली दवाओं का सेवन कर रही हैं। श्रीनगर में भी पुरुषों की तुलना में फेफड़ों के कैंसर की दर अधिक थी, लेकिन वहीं महिलाओं में नशे की संख्या कम थी। इसका कारण क्या है? हमें अपने बच्चों को धूम्रपान न करने के लिए पूरी दुनिया से सबक सीखना होगा।
 
मुझे लगता है कि हमें तंबाकू और शराब की समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। अगर हमारे देश में लोग जागरूकता बढ़ाएं, तो शायद लोग अपने स्वास्थ्य को भूलकर तंबाकू और शराब का सेवन कम करेंगे।

अगर हम महिलाओं को बेहद महत्वपूर्ण बनाएं, तो शायद वे ही इस समस्या से निपटने में मदद करेंगी। उनको फेफड़ों के कैंसर के खतरों के बारे में जागरूक करना हमें जरूरी होगा। अगर हमारे देश में लोग तुम्हारे स्वास्थ्य को बहुत महत्वपूर्ण समझें, तो शायद हम यह समस्या रोक सकते हैं।

कोई भी ऐसा काम करना होगा जिससे हम अपने देश में फेफड़ों के कैंसर की समस्या से निपटने के लिए कुछ कर सकें।
 
यह बहुत बड़ी समस्या है देश की, हमारे लिए भी बहुत बड़ा खतरा है। तंबाकू और शराब की समस्या निकालकर नहीं जा सकती, इसके लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा। लेकिन एक सवाल यह भी उठता है कि क्या सरकार वास्तव में तैयार है, इस समस्या से निपटने के लिए? हमें देख रहे हैं कि बिगड़ने वाली समस्याओं पर सरकार को क्या करना है? या फिर यह एक राजनीतिक मुद्दा है जिस पर सरकार से निपटने की जरूरत नहीं है। हमें लगता है कि अगर हम महिलाओं और विकलांगों सहित कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देते हैं, तो फिर हम इस समस्या को सुलझाने में सफल हो सकते हैं।
 
तंबाकू और शराब की दुर्गंध में हम सब एक-दूसरे को गले लगाने वाले हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि महिलाओं को फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा लगता है। और ये सवाल उठता है कि सरकार हमें तंबाकू और शराब की दुर्गंध से मुक्त कराने के लिए क्या कर सकती है? शायद फिर भी हमें अपने घरों पर आगे बढ़ने की जरूरत है। 🙏🚭
 
Back
Top