ईडी की छापेमारी के खिलाफ टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन, महुआ मोइत्रा समेत 8 सांसद पुलिस की हिरासत में

आज दिल्ली में ईडी की छापेमारी के खिलाफ टीएमसी सांसदों ने एक बड़ा प्रदर्शन किया है। इन्होंने अपने विरोध को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर शांति से जारी रखा, जहां उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उनका 'वसूली निदेशालय' उनकी पार्टी को लूटपाट कर रहा है, राजनीतिक जासूसी करने और चुनावी डेटा और दस्तावेज चुराने में शामिल है।

टीएमसी सांसदों ने अपने विरोध में कहा, ईडी केवल विपक्ष के लिए है, नहीं तो यह हमारी पार्टी के नेताओं पर भी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा ने अपने 'वसूली निदेशालय' से उनकी पार्टी को धमकाने और चुनाव में जीतने की कोशिश करने की कोशिश कर रही है।

महुआ मोइत्रा, टीएमसी की एक सांसद, ने कहा, हम भाजपा को हराएंगे। देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस एक चुने हुए सांसद के साथ कैसा बर्ताव कर रही है। वहीं, डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा, आप देख रहे हैं कि यहां सांसदों के साथ क्या हो रहा है।

इस विरोध के दौरान, पुलिस ने कई सांसदों और उनके समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना में महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ'ब्रायन, और अन्य कई सांसद शामिल थे।
 
ईडी की छापेमारी के बाद यह तो बहुत बड़ा प्रदर्शन हुआ है 🚔। मैंने देखा है कि टीएमसी के सांसदों ने अपने विरोध में बहुत जोर से कहा है, लेकिन मुझे लगता है कि उनकी बात समझी नहीं जा रही है। यह तो भाजपा पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन चुनावी डेटा और दस्तावेज चुराने की बात करना थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है 🤔। मुझे लगता है कि ईडी को विपक्ष के लिए तो तैयार किया जा रहा है, लेकिन अपनी पार्टी के नेताओं पर भी पड़ने देने से यह अच्छा नहीं है 🤷‍♂️
 
ईडी की छापेमारी पर टीएमसी सांसदों के विरोध को देखकर मुझे लगता है कि यह सब बहुत ही राजनीतिक है। भाजपा के खिलाफ आरोप लगाने से पहले हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ईडी का उद्देश्य केवल अपराधों को रोकना और न्याय को सुनिश्चित करना है। लेकिन जब भाजपा अपने विरोधियों पर आरोप लगाती है, तो हमें यह नहीं चाहते कि सब हरकत में आ जाएं।

मुझे लगता है कि यह विरोध एक अच्छा अवसर है कि हमें भाजपा और ईडी के बीच की राजनीतिक खेल को समझने का। लेकिन इसके बाद भी, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा देश बहुत बड़ा है, और हर किसी को अपने अधिकारों का प्रयोग करने का मौका मिलना चाहिए।
 
एड्स! आज दिल्ली में ईडी की छापेमारी के बाद तो बहुत ही गंभीर माहौल हो गया है। मुझे लगता है कि यह विरोध बहुत ही स्पष्ट रूप से भाजपा के खिलाफ खड़ा है, जिन्होंने अपने 'वसूली निदेशालय' से कई तरह के आरोप लगाए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि विरोध करने वालों ने उनके दावे पर बहुत ही ठोस सबूत नहीं दिखाए हैं।

मुझे लगता है कि यह विरोध अच्छी बात है, लेकिन इससे पहले हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हमारी पार्टियों में सभी सदस्यों को समान अधिकार और सम्मान मिले। इससे हम अपनी पार्टियों को मजबूत बना सकते हैं और भारतीय जनता के लिए बेहतर नेतृत्व दे सकते हैं। 🤝
 
भाई अरे, यह तो बहुत ही बुरी बात है कि पुलिस ने टीएमसी सांसदों को गिरफ्तार कर लिया है। उनका ये विरोध बहुत ही शांतिपूर्ण था, बस एक मुद्दा उठाने की कोशिश थी। मुझे लगता है कि भाजपा ने इसे धमकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह नहीं होगा। हमारी पार्टी मजबूत है, और हमें चुनाव में जीतने की संभावना है।

मुझे लगता है कि ईडी को अपना काम करने दो, इस पर रोक लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि हम भाजपा के खिलाफ खड़े नहीं हैं, लेकिन हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की जरूरत है। मैं इस विरोध से पूरी तरह से सहमत हूं।
 
अरे भाइयो, यह ईडी छापेमारी का बहुत बड़ा विवाद है। मुझे लगता है कि यह हमारे देश की राजनीतिक जड़ी-बूटियों को देखने का एक अच्छा अवसर है। टीएमसी सांसदों ने भाजपा पर आरोप लगाया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह विरोध थोड़ा भीषण है।

मैं समझता हूँ कि पार्टियाँ अपनी-अपनी राजनीतिक शक्तियों को सुरक्षित करने के लिए ऐसा करती हैं, लेकिन यह बहुत ही खतरनाक है। मुझे लगता है कि हमें अपने देश की राजनीति में थोड़ा और न्यायप्रियता की आवश्यकता है।

🤔
 
ना तो ये देखकर मन भी न चाहता कि पुलिस ने इतने जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। क्या ये न्याय है? यह सांसद और उनके समर्थक गरीब लोग के बीच सड़क पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करने की स्वतंत्रता को छीन रहे हैं। मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस ने गलती कर दी है।
 
ईडी की छापेमारी पर यह प्रदर्शन बहुत दिलचस्प है, लेकिन लगता है कि सबकुछ थोड़ा ही समझ नहीं मालूम है। मुझे लगता है कि ईडी को गंभीरता से लेना चाहिए, परंतु प्रदर्शन करने वालों की बात भी सुननी चाहिए। यह तो एक बड़ा सवाल है कि क्या ईडी वास्तव में सभी दलों के लिए है, या फिर यह केवल विपक्ष के लिए है? और भाजपा का 'वसूली निदेशालय' वाकई तो उनकी पार्टी को लूटपाट कर रहा है? 🤔
 
दिल्ली में ईडी की छापेमारी के खिलाफ टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन बहुत ही दिलचस्प है 🤔। मैंने देखा है कि सांसदों ने अपने विरोध में कहा है, ईडी केवल विपक्ष के लिए है, नहीं तो यह हमारी पार्टी के नेताओं पर भी पड़ेगी। यहाँ कुछ तथ्य हैं 📊:

ईडी की छापेमारी से पहले, दिल्ली में विपक्षी दलों का प्रदर्शन करने वाले लोगों की संख्या लगभग 10,000 थी। 🚶‍♀️

इस विरोध में शामिल होने वाले सांसदों में से अधिकांश महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से हैं। 🗺️

टीएमसी सांसदों ने अपने प्रदर्शन के दौरान कई महत्वपूर्ण विरोध याचिकाएं तैयार की हैं, जिनमें से सबसे बड़ी यह है कि उन्हें आरोप लगाया गया है, भाजपा ने उनकी पार्टी को लूटपाट कर रही है। 🚫

इस विरोध में शामिल 15 सांसदों की तुलना में बीजेपी से जुड़े 100 से अधिक सांसद इस घटना से दूर रहे हैं। 🤯
 
बhai ye toh bahut galat hai! Eidi ki chapaamari ke khilaf TMCS sandodon ne kaisa pardoarniaya? Unhein shanti se jara rakhna chaahiye, nahi to yeh logon ko gairkanooni karne par majboor kar rahe hain. Bhajpa ki vasooli nidheshalay se unke pardaarshan ko kaise sahi rakh rahe hai? Yeh sirf ek baat hai ki Eidi ke khilaf jharosamat badhte ja rahe hain, nahi to yeh logon ka samman nahin karengi.
 
🤔 ईडी की छापेमारी के बाद दिल्ली में टीएमसी सांसदों ने विरोध किया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह विरोध शांतिपूर्ण तरीके से नहीं किया गया। अगर हमारे पास अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए शांतिपूर्ण तरीके होते, तो क्या परिणाम दिल्ली में होते।

मुझे लगता है कि भाजपा ने अपने 'वसूली निदेशालय' से टीएमसी पार्टी को धमकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन हमें अपने अधिकारों की लड़ाई में कोई डर नहीं करना चाहिए। अगर हम एक दूसरे पर भरोसा करते हैं और एक साथ खड़े होते, तो भाजपा की ऐसी रणनीति सफल नहीं होगी।

इस विरोध के बाद, मुझे यह सीखने को मिला है कि हमें अपने अधिकारों की लड़ाई में शांतिपूर्ण तरीके से खड़े होना चाहिए। अगर हम एक दूसरे पर भरोसा करते हैं और एक साथ खड़े होते, तो हम कभी भी हार नहीं मानते। 🙏
 
मुझे लगने लगा कि भारतीय राजनीति में तो हमेशा से एक खेल खेला जाता है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी विरोधी बनाकर लड़ते रहते हैं 🤔। लेकिन यहां पर, मुझे लगता है कि टीएमसी सांसदों ने ईडी के खिलाफ विरोध करने का सही तरीका नहीं पकड़ा। अगर उन्हें ईडी के विरोध में खड़े होने का मौका मिलता, तो शायद वे अपने विपक्षी भाजपा के खिलाफ पूरी तरह से आक्रोशित होंगे 🤯। लेकिन अब, जब उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया है, तो यह एक और समस्या बन गया है। मुझे लगता है कि अगर सभी पक्ष अपनी-अपनी पार्टियों के नेताओं को धमकाने से बचने की कोशिश करते हैं, तो देश को वास्तविक बदलाव नहीं मिलेगा।
 
अगर तो ईडी के बारे में न तो इतनी जानकारी होती, तो शायद भाजपा के लिए यह एक अच्छा उपक्रम होगा। लेकिन जब सीनियर इंजिनियर्स और प्रशासनिक अधिकारी इन्होंने अपना दम बिखेराया है, तो अब भाजपा को पता चल गया है कि ईडी किस तरह के खिलाफ जंग जीत सकता है।

मुझे लगता है कि अगर मीडिया इस तरह के मामलों में अधिक सक्रिय होता, तो भाजपा के आरोप साबित होने में कम समय लग सकता। लेकिन जब तक हमारी जांच एजेंसियां अपने पास के खिलाफी नहीं करती, तो शायद हमें बुद्धिमत्ता सीखनी होगी।
 
ईडी की छापेमारी के बाद दिल्ली में टीएमसी सांसदों का यह प्रदर्शन बहुत दिलचस्प है। मैंने सुना है कि भाजपा ने ईडी को अपने 'वसूली निदेशालय' के रूप में इस्तेमाल करने का जोर दिया है, लेकिन ये सब और तेज़ हो गया। क्या वास्तव में भाजपा के पास उनके खिलाफ इतनी मजबूत सबूत हैं? 🤔

मुझे लगता है कि ईडी के प्रति टीएमसी सांसदों का यह विरोध एक बहुत बड़ा मुद्दा है। अगर सरकार वास्तव में ईडी को लोकतंत्र के लिए इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करती है, तो इसका मतलब यह होगा कि हमारे देश में कोई भी नेता अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ आरोप लगाने में सुरक्षित महसूस करेगा। 🚫

लेकिन, इसके बाद तो यह सवाल उठता है कि वास्तव में ईडी क्या करने का उद्देश्य है? अगर उनका उद्देश्य राजनीतिक जासूसी और चुनावी डेटा चोरी करना नहीं है, तो फिर इसके पीछे क्या सच्चाई है? 🤷‍♂️
 
ईडी की छापेमारी में तीन दिनों के बाद भी सरकार यह नहीं समझ पा रही है कि इससे लोग कैसे राहत मिलेगी। यह एक बड़ा सवाल है कि ईडी वास्तव में किस सामाजिक मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अब वही चीज़ जारी है।
 
Back
Top