ईरान पर हमला करने के लिए US को उकसा रहा सऊदी? व्हाइट हाउस में हुई सीक्रेट मीटिंग के खुले राज

सऊदी अरब ने अमेरिका से ईरान पर हमले को लेकर मिडिल ईस्ट की राजनीति में खींचतान जारी होने की ओर उकसा रहा है. इस बैठक में, सऊदी के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने अमेरिकी सरकार को ईरान पर सैन्य हमले करने के लिए कहा।

क्या ईरान के लिए अमीर दुश्मन हैं?

सऊदी अरब का यह बयान सार्वजनिक रूप से सऊदी अरब के अब तक के रुख से पूरी तरह से उलट है. इस बात की भी चिंता की जा रही है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बेटे प्रिंस खालिद को ईरान के नेताओं द्वारा अमीर दुश्मन के रूप में व्याख्या की जा रही है.

यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले करने के लिए कह रहे थे. अगर अमेरिकी सरकार ईरान की धमकियों पर अमल नहीं करती है, तो इससे ईरानी शासन का हौसला और बढ़ेगा.

ईरान ने पहले भी कहा है कि वो ईरान पर सैन्य हमले करने के लिए तैयार है. इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की धमकी दी जा रही थी, लेकिन ईरान ने कहा है कि वो ऐसी किसी भी चीज़ में शामिल नहीं होगा.
 
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऐसी बातचीत तो चली रहती है, लेकिन कभी कभार यह वाकई खिंचतान होता दिखाई देता है... ईरान की जगह हमें थोड़ी मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ता है, और तो ये बातें होनी ज्यादा नहीं चाहिए कि अमीर दुश्मन का नाम लिया जाए, खासकर जब हमारे पास इतनी सारी समस्याओं का समाधान नहीं मिलता।
 
😂 अरे, यार, यह तो बहुत दिलचस्प है! सऊदी अरब का यह बयान तो बिल्कुल बदल गया है, जैसे कि चोंचल में भटक रहे हैं! प्रिंस खालिद ने अमेरिकी सरकार को ईरान पर हमले करने के लिए कहा, लेकिन यह तो वास्तविकता से बिल्कुल मेल नहीं खाता। क्यों? क्योंकि सऊदी अरब और अमीरिका के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि एक दूसरे को अपने बयान बदलने पर मजबूर नहीं कर सकते। लेकिन मुझे लगता है कि ईरान को इस बात से चिंता करनी चाहिए कि अमेरिकी सरकार वास्तव में ईरान की धमकियों पर अमल नहीं करती, तो ये दुनिया का सबसे बड़ा खिल्ली मारने वाला बन गया! 😂
 
सऊदी अरब का यह बयान सार्वजनिक रूप से उलट है, हमेशा से ईरान की दोस्ती पर जोर दिया करते हैं लेकिन अब तो लगता है कि वे अमेरिकी दबाव में आ गए हैं। प्रिंस खालिद बिन सलमान ने अमीर दुश्मन कहा, यह तो ईरानी शासन की चुनौती होगी। हमें नहीं पता कि वे ऐसी भाषा से क्या हासिल करना चाहते हैं, लेकिन एक बात तय है कि अमेरिकी सरकार को ईरान पर हमले के बारे में सोचते समय हमें बहुत सावधान रहना चाहिए।

क्या यह मध्य पूर्व की राजनीति को और अधिक जटिल बनाएगा? तो नहीं होगा कि हम सब एक बड़े खेल में खेल रहे हैं और हमें खुद को सही स्थान पर रखाना होगा।
 
अगर अमेरिका और सऊदी दोनों का एक हाथ हो तो ईरान पर हमला करने का मकसद सिर्फ ईरान नाहीं बल्कि मध्य पूर्व और सऊदी अरब की स्थितियों को भी हल करने की कोशिश होगी. लेकिन अगर अमीर दुश्मन हैं तो हमारा यह सोचकर बैठे रहेंगे.
 
अगर सऊदी अरब का यह बयान सच है, तो यह बिल्कुल भ्रामक है। हमारे पड़ोसी देशों के बीच लड़ाई में हमें ज्यादा फायदा नहीं होता। मुझे लगता है कि अमीर दुश्मन का नाम सऊदी अरब होने चाहिए, नहीं तो ईरान! 😉 वो अपने राज्य के बाहर खुद को अमीर दिखाने की कोशिश करते रहते हैं और हमारे पड़ोसियों को खल्लास कर रहे हैं। मुझे सोच नहीं आता कि ईरान किस तरह का बदला लेगा।
 
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