इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी से की फोन पर बात, कई मुद्दों पर चर्चा

मेरी राय में तो ये दोनों नेताओं की बातचीत बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने अपने चाचा जी के पाले लगाए थे, वह भारत-इज़रायल संबंधों के बारे में हमेशा कहते थे कि ये दोनों देश एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। अब यह बातचीत आधिकारिक स्तर पर हुई है, तो और भी अच्छा होगा। प्रौद्योगिकी-आधारित सहयोग में शामिल होना बहुत फायदेमंद होगा, खासकर जल प्रबंधन के क्षेत्र में। मैं सोचता हूं कि इस बातचीत से निकलने वाली समझौतों में भारत और इज़रायल दोनों को बहुत फायदा होगा।
 
मैंने देखा है कि फोन पर बातचीत करने से कुछ नहीं बदला, लेकिन अगर वास्तव में सहयोग बढ़ाएं तो अच्छा है 🤔। प्रौद्योगिकी-आधारित सहयोग की बात करें, हमारे देश में कई छोटे से शॉप्स और स्टार्टअप्स हैं जो इज़रायल की तरह तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर हमारे देश के साथ सहयोग बढ़ाएं तो अच्छा होगा।
 
मोदी-नेतन्याहू की बातचीत को देखकर लगता है कि भारत और इज़रायल के बीच बहुत बड़ा बदलाव आ गया है। पहले तो हमेशा सोचते थे कि ये दोनों देश एक-दूसरे के पास नहीं मिलते। लेकिन अब लगता है कि वे एक-दूसरे की बातें सुनने लगे हैं और समझने लगे हैं। यह अच्छा है, खासकर जब हमारे देश के नेताओं को अपने देशों के लिए कुछ करने का मौका मिलता है। now lets see how it will affect our country's trade with Israel 🤔
 
अरे बात कर रही है भारत और इज़रायल के बीच कुछ अच्छी खबर 🤝। पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेन्जामिन नेतन्याहू जी के बीच आधिकारिक स्तर पर फोन पर बातचीत हुई है, और यह बहुत अच्छा संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की ओर एक नई दिशा तैयार हो गई है। प्रौद्योगिकी-आधारित सहयोग, रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत और इज़रायल की सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन हो सकता है। यह बातचीत न केवल भारत-इज़रायल संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने की मजबूत नींव रख देगी, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भी सुधार लाएगी।
 
क्या ये दोनों नेताओं को थोड़ा सा सोच-समझकर बात करनी चाहिए? पहले तो इज़रायल एक साल पहले पाकिस्तान की मुठभेड़ में कुछ भी नहीं हुआ, और अब दोनों देशों ने फोन पर बातचीत करने जा रहे हैं? 🤔

मुझे लगता है कि यह बातचीत वास्तव में किसी भी महत्वपूर्ण समझौते को लेकर नहीं है, बल्कि दोस्ती बनाने के लिए एक सौहार्दपूर्ण बातचीत के रूप में है। और इसका मतलब यह है कि हमें भारत-इज़रायल संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के बजाय, इन दोनों देशों की दोस्ती को बढ़ावा देने के बारे में सोचना चाहिए।

लेकिन फिर भी, यह बातचीत न केवल भारत-इज़रायल संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने की मजबूत नींव रख देगी, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भी सुधार लाएगी। तो फिर यह तो एक अच्छी बात है! 💡
 
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