INC: शशि थरूर की गैरहाजिरी ने बढ़ाई कांग्रेस की बेचैनी, क्या बदल रहा है अंदरूनी समीकरण? अटकलों का बाजार गर्म

कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और सांसद शशि थरूर ने लगातार दूसरी बार पार्टी की अहम बैठक से अनुपस्थित रहने के लिए बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। रविवार को सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई कांग्रेस की रणनीतिक समिति की बैठक में थरूर मौजूद नहीं थे।

मगर इस बैठक में शामिल नहीं होने के अलावा, इससे पहले भी थरूर सीरियाई विद्रोहियों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक में भी नहीं पहुंचे। तब उन्होंने बीमारी का दावा किया था।

लेकिन सवाल तब उठे जब उससे एक दिन पहले वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में मौजूद रहे, जिससे उनकी भूमिका और रुख को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ गई।

थरूर के दफ्तर ने बताया कि उन्हें बीमार थी इसलिए फ्लाइट से लौट रहे थे, इसीलिए वह बैठक में शामिल नहीं हो सके। उधर, स्थानीय चुनाव प्रचार के चलते कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी बैठक में नहीं पहुंच पाए।

कांग्रेस नेताओं ने शशि थरूर की गैरहाजिरी से नाराजगी जताई। एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'सब्से को लगता है कि वे देश को उतना नहीं समझते। अगर आपको लगता है कि पीएम मोदी या भाजपा की नीतियां बेहतर हैं, तो फिर क्यों हैं?'

इस बीच, कांग्रेस सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, 'पीएम मोदी के भाषण में मुझे कोई प्रशंसा योग्य बात नहीं लगी। वे लगातार कांग्रेस पर ही निशाना साधते रहे। मुझे समझ नहीं आता कि थरूर को उसमें क्या अच्छा लगा।'

शशि थरूर और पीएम मोदी के बीच इतनी खटास नई नहीं है, खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब कई मौकों पर थरूर ने पीएम मोदी के प्रति सकारात्मक टिप्पणियां कीं। अब लगातार दो अहम बैठकों से गैरहाजिरी ने पार्टी के भीतर उनकी प्रतिबद्धता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
 
अरे, यह तो बहुत चिंताजनक है कि शशि थरूर सिर्फ इतनी बैठकों में नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक बार फ्लाइट पर भी चले जाते हैं और फिर बीमारी का दावा करते हैं। 🤔

कोई भी ऐसी बात कह सकता है कि शशि थरूर बहुत सख्त खाली में डालते हैं, लेकिन लगता है कि वे अपनी खाली समझौतों पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि अगर उनका दावा सच था, तो फिर वह इतनी बार मौजूद नहीं होते। और अगर वह मौजूद हुए, तो फिर उन्होंने अपनी असफलताओं से निपटने के लिए ऐसा क्या करना चाहिए?

कोई जवाब यह नहीं है, बस सवाल उठता है और दर्शक देखना बाकी है।
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर जी को कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों पर फोकस करना चाहिए, न कि उनकी बैठकों में। यह न तो उनके लिए फायदेमंद होगा, न ही पार्टी के लिए।
 
🤔 मुझे लगता है कि शशि थरूर की बैठकों से अनुपस्थित रहने का मतलब यह नहीं है कि वे पार्टी की नीतियों से सहमत नहीं हैं। अगर वह सचमुच गंभीर रूप से बीमार थे, तो उनके दफ्तर को अपनी समस्याओं को स्पष्ट करना चाहिए। लेकिन यह एक सवाल है कि क्या वास्तव में उन्होंने बीमारी का दावा नहीं किया। 🤷‍♂️

और तो और, अगर शशि थरूर पीएम मोदी के साथ इतनी खटास में नहीं हैं, तो फिर क्यों उन्हें लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहना पड़ रहा है? क्या वे पार्टी के नेताओं से सहमत नहीं हैं? 🤔
 
शशि थरूर को चुनाव के समय बहुत प्यार मिला, लेकिन अब लगातार दूसरी बैठक से अनुपस्थित रहने के बाद लगता है कि कुछ गलत हो रहा है। वहाँ सिर्फ एक तारीफ नहीं कर सकते कि उनके पास भारत और पाकिस्तान के मुद्दों पर जितनी समझ है, वोहिंदा तैयारी का काम भी करने के लिए होती।
 
भाई, यह तो एक बड़ा मामला है और हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी नेताओं की भूमिका और रुख हमारे पार्टी के लिए या देश के लिए फायदेमंद है? यह तो एक जिम्मेदारी है जिसे हमें स्वीकार करना चाहिए। शशि थरूर की गैरहाजिरी से हमें यह सवाल उठना चाहिए कि क्या उनका रुख पार्टी और देश के लिए सही है? 🤔

और भाई, मैं तो ऐसा महसूस करता हूँ कि हमारे नेताओं को अपने रुख से पहले सोचने की जरूरत है। अगर वे जानते थे कि उनका रुख पार्टी और देश के लिए फायदेमंद नहीं है, तो उन्होंने इससे पहले ही कुछ बदल लेना चाहिए। लेकिन यह सवाल उठने से पहले हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और पार्टी और देश के लिए काम करने का फैसला करना चाहिए।

क्योंकि भाई, एक व्यक्ति की गैरहाजिरी से हमें बहुत सारे सवाल उठने चाहिए, और हमें यह सोचने पर मजबूर होना चाहिए कि हम अपने नेताओं के रुख से प्रभावित हैं या नहीं। 🙏
 
बेटे, यह तो एक बड़ा मुद्दा है! शशि थरूर जी को लगता है कि वे इस बैठक में शामिल नहीं होना चाहिए। लेकिन जब तक वहां नहीं गए, तब तक उनके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कोई बात नहीं है। यह तो एक नाजुक मुद्दा है, जिस पर हमें बहुत सावधानी से विचार करना चाहिए।
 
क्या शशि थरूर की इस मुश्किल से हमें लगता है कि वे पार्टी के रुख से समझौता करने की दिशा में जा रहे हैं? 🤔 लेकिन फिर भी, अगर उन्होंने बीमारी का दावा किया था, तो क्या यह सब एक बड़ा झूठ है? 🙅‍♂️

मुझे लगता है कि शशि थरूर ने पार्टी से बहुत अधिक समय लिया है, और अब उन्हें अपने रुख को स्थिर करने की जरूरत है। लेकिन अगर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक बार फिर से खड़े होने की दिशा में जाते हैं, तो क्या यह पार्टी के लिए फायदेमंद होगा? 🤷‍♂️

कांग्रेस की रणनीतिक समिति की बैठक में शामिल नहीं होने से हमें लगता है कि वे इस समय पार्टी को किस तरह की दिशा में ले जाना चाहते हैं। 🤔 लेकिन अगर वे अपने नेताओं के रुख को बदलने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है। 😬
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर जी की बैठकों से अनुपस्थित रहने के कारण मेरे विचार में पार्टी को कुछ नया करने की जरूरत है। उनके दफ्तर ने कहा कि वह बीमार थी, लेकिन अगर यह सच है तो फिर शायद उन्हें अपनी प्रतिबद्धता को स्थानीय चुनावों में दिखाने की जरूरत हो। मैंने देखा है कि जब हम अपने विचारों को लेकर बोलते हैं, तो शायद वास्तविकता पैदा नहीं कर सकते।
 
ਦੁਖियਾ ਹੈ ਕੇ.ਸी. ਵेणुगोपाल ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨੀ ਚੁੱਟੀ ਲੈਣੀ ਪਈ ਹੈ। ਉਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤਿਭਾਸ਼ਾਲੀ ਵਾਅਦਾ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨ ਉਤੇ ਛੱਡਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਹੀ ਪੂਰਾ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ।
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर को इस बारे में बोलना चाहिए कि वे क्या सोचते हैं और फिर भी उन्होंने बैठक में नहीं जाना। अब सवाल यह उठ गया है कि कांग्रेस के नेताओं को अपने पार्टी की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। शशि थरूर की गैरहाजिरी से पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ गई है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे उन्हें अपनी राजनीतिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। 🤔
 
कांग्रेस की गहरी जटिलताओं को समझने में मुझे खास ताकत नहीं है, लेकिन यह सच है कि अगर पार्टी नेता अपने विचारों को साझा नहीं कर रहे तो क्या हम उनकी राय को समझ सकते? शशि थरूर देश की बात करने के बजाए अपने मुद्दों पर ही ध्यान देते हैं और लोगों को भ्रमित करते हैं। पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ रही है और मुझे लगता है कि यह उनके खिलाफ नहीं बल्कि अपने आप के विरुद्ध है। 🤔
 
मुझे लगता है 🤔 कांग्रेस पर मोदी जी का दबाव बहुत ज्यादा है, और शशि थरूर भी उनके खिलाफ बोलने से नहीं बच पाया। यह तो एक और सबक है कि राजनीति में सच्चाई और नैतिकता कितनी दूर है।
 
बोलते बोलते लगता है कि शशि थरूर को अब अपने पद पर ध्यान नहीं देना चाहिए। पहले सिर्फ बीमारी का कहना करते हैं फिर पीएम मोदी के कार्यक्रम में जाते हैं। इसका मतलब क्या? 🤔

कांग्रेस नेताओं को भी अपने दिनों को ध्यान से लेना चाहिए। शशि थरूर की गैरहाजिरी से उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठ गए हैं। अगर आप बैठकर तालाश कर रहे हैं तो फायदा नहीं होगा, चलकर काम करना ही सबसे अच्छा है। 🚶‍♂️

श्रीनेत जी की बात में बिल्कुल सहमत हूं, पीएम मोदी के भाषण में मुझे भी कुछ अच्छा नहीं लगा। लेकिन शशि थरूर को यह तो समझना चाहिए। अगर आप अपने देश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं तो फिर ज्यादा बोलने से पहले सोच लो। 💭
 
बिल्कुल, यह शशि थरूर के बारे में एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है। देश की राजनीति में अगर कोई नेता अपनी प्रतिबद्धता और विश्वास पर सवाल उठाने लगे, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा चुनौतीपूर्ण समय होगा। शशि थरूर की गैरहाजिरी से नाराजगी जताई जा रही है, लेकिन अगर हम उनकी बीमारी को मान लें, तो यह सवाल उठता है कि वे अपने पद पर इतना समर्पित नहीं हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी खटास और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, यह सवाल उठता है कि वे अपने रुख पर इतना स्थिर नहीं हैं। 🤔
 
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