IndiGo Crisis: पांचवें दिन भी उड़ानें बुरी तरह प्रभावित, DGCA ने दीं बड़ी छूटें; अब हालात सुधारने की कोशिश तेज

इंडिगो का संकट, उड़ानों में देरी और रद्दीकरण बढ़ रहे हैं

अखबार

पांचवें दिन भी इस एयरलाइन ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी दिखाई, जिसमें सिर्फ शुक्रवार को ही 1,000 से ज्यादा उड़ानों को रद्द करना पड़ा

अखबार

विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इंडिगो को कई तरह की अस्थायी छूट दी है ताकि ऑपरेशन्स जल्दी सामान्य हो सकें और पायलटों की कमी से पैदा हुई दिक्कत को दूर किया जा सके।

अखबार

डीजीसीए ने पायलटों की ड्यूटी संबंधी नियमों (एफडीटीएल) में इंडिगो को 10 फरवरी 2026 तक एक बार की विशेष छूट दी है, जिससे एयरलाइन की उड़ान सेवाएं जल्दी से सामान्य हो सकें।

अखबार

इस छूट के तहत पायलटों को अधिक नाइट लैंडिंग की अनुमति मिलेगी, जिससे विमानन नियामक की दृष्टि से बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित हो सकेंगी।

अखबार

इस बीच, डीजीसीए ने प्रशिक्षित और विभिन्न ड्यूटी पर तैनात पायलटों को भी अस्थायी रूप से उड़ान भरने की अनुमति दे दी है, ताकि इंडिगो के संचालन सामान्य हो सके।

अखबार

विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने नाइट लैंडिंग से जुड़े नियमों में इंडिगो को अस्थायी राहत दी है। इस बदलाव के तहत पायलटों को अधिक नाइट लैंडिंग की अनुमति मिलेगी।

अखबार

यह बदलाव सामान्य तौर पर किसी भी पायलट के लिए एक नाइट लैंडिंग कर सकता है, लेकिन इंडिगो के लिए यह सीमा हटा दी गई है।

अखबार

इस बदलाव से अधिक पायलट उड़ानें संचालित कर सकेंगे और बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द होने की स्थिति से राहत मिलने की उम्मीद है।

अखबार

उधर, डीजीसीए ने प्रशिक्षित पायलटों को भी उड़ान भरने की अनुमति दे दी है, ताकि इंडिगो के संचालन सामान्य हो।

अखबार

डीजीसीए ने 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें शुरुआती जांच में साफ संकेत मिलते हैं कि इंडिगो की आंतरिक निगरानी, संचालन तैयारी और नियमों के पालन में गंभीर कमी रही।

अखबार

डीजीसीए ने कड़ी निगरानी भी कर दी है, जिसमें उड़ानों में देरी और रद्दीकरण की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके अलावा, डीजीसीए के क्षेत्रीय कार्यालयों की टीमें भी देशभर के हवाई अड्डों पर हालात की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं।

अखबार

डीजीसीए ने चार सदस्यीय पैनल गठित किया है, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि इसकी शुरुआती जांच में साफ संकेत मिलते हों कि इंडिगो की आंतरिक निगरानी और संचालन तैयारी में गंभीर कमी रही।

अखबार

इस अव्यवस्था के कारण नवंबर 2025 के अंत से ही उड़ानों में देरी और रद्दीकरण शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़कर एक गंभीर परिचालन संकट का रूप ले चुका है।
 
मुझे लगता है कि इंडिगो की इस समस्या से उड़ानों में देरी और रद्दीकरण बढ़ रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि पायलट विभिन्न ड्यूटी पर नहीं आते हैं। मुझे लगता है कि इंडिगो ने अपने संचालन को बहुत ही अच्छी तरह से बनाया है, लेकिन इसमें कुछ छोटी-छोटी कमियाँ होनी चाहिए जिनका समाधान होगा। मुझे लगता है कि पायलटों की कमी एक बड़ी समस्या नहीं हो सकती है।
 
मैंने भी तो इंडिगो की उड़ानों में देरी और रद्दीकरण की समस्या को पहले ही महसूस किया है... मुझे लगता है कि अगर वे पायलटों की कमी से निपटने के लिए अस्थायी छूट देते हैं तो फिर भी उनकी उड़ान सेवाएं अच्छी नहीं चलेंगी।

मुझे लगता है कि डीजीसीए ने सही कदम उठाए हैं, लेकिन अब यह देखना होगा कि वे पायलटों की कमी को कैसे स्थायी रूप से हल करेंगे।

मैं उम्मीद करता हूं कि डीजीसीए की रिपोर्ट में इंडिगो की आंतरिक निगरानी और संचालन तैयारी में गंभीर कमी का पता चलेगा... अगर नहीं तो तो यह समस्या बंद होने में भी देर हो सकती है।

मैं उम्मीद करता हूं कि इंडिगो को जल्द ही अपनी उड़ान सेवाएं सुधारनी होंगी। 💔
 
मैंने 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है 📝। यह बदलाव हमेश से चल रहा है कि इंडिगो को नियमितता में कमी आने पर क्या किया जाए, पिछले 10 दिनों में भी कई बार उड़ान रद्द हुई थी 🤦‍♂️

अब अगर पायलटों को अधिक नाइट लैंडिंग अनुमति मिलेगी तो ये अच्छा होगा, इससे फ्लाइट्स संचालित होने में और भी मदद मिलेगी 🚀

लेकिन यह देखना उतना आसान नहीं है कि पायलटों की ड्यूटी संबंधी नियमों में बदलाव कैसे इंडिगो को सही परिवहन प्रदान करेगा।

मुझे लगता है कि डीजीसीए ने इस मामले में बहुत सख्ती बरतनी चाहिए, इससे उड़ानों में देरी और रद्दीकरण कम होगा।
 
मुझे लगता है कि इंडिगो की इस स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि विमानन नियामक प्रणाली में गड़बड़ी आ गई है। जब तक यह समाधान नहीं मिलता, तो हवाई यात्रा के लिए यात्रियों के लिए बहुत अधिक असुविधाएं होंगी।
 
इंडिगो की इस स्थिति से निपटने के लिए डीजीसीए ने कई कदम उठाए हैं, जैसे कि पायलटों की ड्यूटी संबंधी नियमों में अस्थायी छूट देना और नाइट लैंडिंग को अधिक अनुमति देना। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या ये कदम पर्याप्त होंगे? 🤔

उसके अलावा, इंडिगो की आंतरिक निगरानी और संचालन तैयारी में गंभीर कमी थी, जिसके लिए कड़ी सजा देनी चाहिए। लेकिन अगर डीजीसीए ने पहले ही पायलटों को अस्थायी छूट दी है, तो अब इसके परिणामस्वरूप देरी और रद्दीकरण बढ़ रहे हैं। यह एक बड़ी समस्या है जिसका समाधान जल्दी से नहीं होगा। 😟

इसके अलावा, इंडिगो की प्रतिष्ठा और ग्राहकों की भरोसा पर भी सवाल उठते हैं। अगर डीजीसीए ने पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी है तो अभी इसके परिणामस्वरूप देरी और रद्दीकरण बढ़ रहे हैं, तो यह एक बड़ी समस्या है। 🚨

इसलिए, डीजीसीए को इंडिगो की आंतरिक निगरानी और संचालन तैयारी में गंभीर कमी को देखना चाहिए और जल्दी से कार्रवाई करनी चाहिए।
 
आज के समय में इंडिगो का संकट बहुत बड़ा हुआ है! 🤕 पायलटों की कमी और उड़ानों में देरी बढ़ रही है, जिससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि डीजीसीए ने इंडिगो को अस्थायी छूट दी है ताकि ऑपरेशन्स जल्दी सामान्य हो सकें।

पायलटों को अधिक नाइट लैंडिंग करने की अनुमति देना एक अच्छा कदम है, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इंडिगो की आंतरिक निगरानी और संचालन तैयारी में गंभीर कमी नहीं रही।

इस समय दिल्ली में उड़ानों में देरी बढ़ गई है, लेकिन यह सब राज्य सरकार के हाथों नहीं है। हमें यह समझना चाहिए कि इंडिगो एक निजी संस्था है और उसके ऑपरेशन्स में सुधार करने के लिए डीजीसीए की भूमिका महत्वपूर्ण है।

आइए हम इस समय विमानन प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने पर ध्यान दें, ताकि भविष्य में ऐसे मुश्किलों से बचने की कोशिश की जा सके।
 
मैं इंडिगो की इस समस्या से बहुत दुखी हूँ, उड़ानों में देरी और रद्दीकरण बढ़ रहे हैं... यह बहुत ही गंभीर समस्या है जिसका सामना हम सभी को सुधारने का प्रयास करना चाहिए.
 
मुझे ये तो बहुत अजीब लग रहा है कि इंडिगो की एयरलाइन में इतनी बड़ी समस्या आ गई है और अब पायलटों की कमी से हवाई अड्डे पर उड़ान भरने में भी देरी हो रही है।

मुझे लगता है कि इस समस्या का समाधान निकालने के लिए डीजीसीए की जांच और रिपोर्ट से पहले तो उम्मीद थी, लेकिन अब यह देखकर अच्छा लग रहा है कि ये बदलाव जल्द ही विमानन उद्योग में एक नई दिशा बनाएगी।

कई दिनों की विरहविलास से बाद, पायलटों को नाइट लैंडिंग करने की अनुमति मिल रही है।

लेकिन इस समस्या को समझने के लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियाँ न बनें।
 
😬 इंडिगो की एयरलाइन में इतनी देरी और रद्दीकरण बढ़ रही है! 🤦‍♂️ यह तो बहुत ही गंभीर समस्या है, खासकर अगर उड़ानों पर लोगों के जीवन भर होने वाले निर्णयों पर उनकी देरी या रद्दीकरण का प्रभाव पड़ता है तो यह बहुत बड़ी मुश्किल हो सकती है! 🚨

मुझे लगता है कि इंडिगो को अपने ऑपरेशन्स में सुधार करने की जरूरत है, खासकर पायलटों की कमी और उड़ानों में देरी की समस्या। 🚀
 
🚨 इंडिगो का संकट तो बिल्कुल भी नहीं समेटा जा सकता। 10 फरवरी तक की छूट एक बात है, लेकिन इसके बाद क्या होगा? पायलटों की कमी और उड़ानों में देरी से निपटने में असफलताओं की संख्या बढ़ रही है। यहां तक कि डीजीसीए की रिपोर्ट भी 15 दिनों में नहीं आ सकती, जो इंडिगो के लिए बड़ी चुनौती होगी।
 
मुझे ये सुनकर बिल्कुल गलत महसूस हुआ, इंडिगो की एयरलाइन में इतनी गड़बड़ी देखकर! पांचवें दिन भी 1,000 से ज्यादा उड़ानों को रद्द करना पड़ता है? यह तो बहुत बड़ी समस्या है।

क्या डीजीसीए ने इंडिगो को सही तरीके से सिखाया था कि वे अपने पायलटों की ड्यूटी संबंधी नियमों का पालन करें? और क्या उन्होंने अपने ऑपरेशन्स में सुधार किए हैं? यह देखना दिलचस्प होगा।

पहले तो मुझे लगा था कि डीजीसीए ने इंडिगो की उड़ान सेवाएं अच्छी तरह से नियंत्रित कर ली हैं। लेकिन अब यह देखना है कि विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) कैसे इंडिगो को सही रास्ते पर ला सकता है।

मुझे उम्मीद है कि डीजीसीए जल्द से जल्द समस्याओं का समाधान कर देगा।
 
भारतीय विमानन उद्योग में इंडिगो की इस अव्यवस्था से देश के उड़ान यातायात पर भारी दबाव पड़ रहा है, और इसके कारण यात्रियों के लिए बहुत असुविधा हो रही है।

अगर इंडिगो की इस समस्या का समाधान जल्दी न हो, तो यह विमानन उद्योग के प्रति भारतीय संसद के प्रति भारी दबाव डाल सकता है, जिसके परिणामस्वरूप नई नियमों और सुधारों पर मजबूर किया जाना पड़ सकता है।

इन सभी समस्याओं को देखते हुए, मुझे लगता है कि इंडिगो को अपनी उड़ान सेवाएं संचालित करने के लिए एक विशेषज्ञ टीम बनानी चाहिए और उन्हें अपनी सेवाओं को सुधारने के लिए प्रशिक्षण देना चाहिए।
 
भाई, ये इंडिगो की स्थिति तो बहुत बड़ी है 🤕। पायलटों की कमी, उड़ानों में देरी और रद्दीकरण... यह सब एक बड़ा संकट बन गया है। लेकिन फिर भी, सरकार ने उन्हें छूट दी है ताकि वे अपने ऑपरेशन्स को सामान्य कर सकें। इसका मतलब है कि अब अधिक पायलट उड़ानें भर सकते हैं और फ्लाइट्स रद्द होने की स्थिति से राहत मिलेगी। लेकिन भाई, यह एक बड़ी चुनौती है... 🤔
 
Back
Top