IndiGo Crisis: 'हवाई' संकट के पांच दिन, उड़ानें ठप... उम्मीदें जाम, लोग बोले-आईजीआई बना रेलवे प्लेटफार्म

इंडिगो क्राइजिस: हवाई संकट के पांच दिन, उड़ानें ठप... लोगों ने आईजीआई को रेलवे प्लेटफॉर्म बना दिया

अल्पकालिक मौसमी बदलाव के साथ-साथ कई अन्य कारकों के कारण इंडिगो पर हाल ही में एक गंभीर संकट आ गया है। संकट के चलते इंडिगो ने कई उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिससे यात्रियों को असहज अनुभव करना पड़ रहा है।

इस संकट में, सरकार ने मध्यस्थता करते हुए नई पाबंदियां और रिफंड निर्देश जारी किए हैं। लेकिन लाखों यात्रियों अभी भी असहज अनुभव बता रहे हैं। इसके अलावा, स्पाइसजेट और एयर इंडिया ने अपने टिकट के दामों में इजाफा कर दिया है।

सरकार ने लगाया फेयर कैप

सरकार ने इंडिगो की ऑपरेशनल विफलता की वजह से हवाई किराएं बढ़ाने पर रोक लगा दी है। सभी प्रभावित रूट्स पर फेयर कैप लागू कर दिया गया है, जिससे मौके का फायदा उठाकर बढ़ाई गई 'ओपर्च्युनिस्टिक प्राइसिंग' पर तुरंत रोक लग सके।

रूट-वाइज स्थिति में उतार-चढ़ाव

दिल्ली-पटना पर, 5 दिसंबर को कोई सीधी फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, किराए रिकॉर्ड स्तर पर थीं। 6 दिसंबर को, एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइसजेट के टिकट 24,999 से 40,483 रुपये में थे। 7 दिसंबर को, एयर इंडिया की फ्लाइट्स का किराया घटकर 17,273 रुपये तक आया।

पटना-दिल्ली पर, 6 दिसंबर को इंडिगो की 5 फ्लाइट 19,000 से 25,000 रुपये में थीं। 6 और 7 दिसंबर के लिए किराया 11,032 से 21,316 रुपये तक आया, जो संकट वाले दिनों से काफी कम है।

मुंबई-पटना पर, 6 दिसंबर को स्पाइसजेट की सीधी उड़ान 36,333 रुपये में थी, जबकि 7 दिसंबर को सीधी सेवा 21,109 रुपये तक आयी। एक स्टॉप वाली फ्लाइट्स 42,347 से 86,733 रुपये के बीच आई।

बेंगलुरु-पटना पर, 5 दिसंबर को किराया 72,000 रुपये पार कर गया था, जबकि 6 दिसंबर को इंडिगो की सीधी सेवा 11,280 और 23,040 रुपये में आया। 7 दिसंबर को, एयर इंडिया एक्सप्रेस की सीधी फ्लाइट 24,999 रुपये में आई।

दिल्ली-मुंबई-दरभंगा पर, 6 और 7 दिसंबर को किराया 18,785 से 24,105 रुपये तक आया, जबकि एक स्टॉप वाली फ्लाइट्स 51,000 से 71,000 रुपये तक आई।
 
क्या यार, इंडिगो क्राइजिस का माहौल तो बहुत दुखद है 🤕, हवाई संकट के पांच दिन बीत गए और लोगों को अभी भी असहज अनुभव जीना पड़ रहा है। इसका मतलब यह है कि सरकार की फेयर कैप ने कितनी हद तक मदद की है, ये देखकर मुझे लगना सिर्फ थोड़ा बेहतर हुआ है। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि हवाई यात्रा में समय और अनुभव बहुत महत्वपूर्ण होते हैं तो कैसे मिलेगी रियायत 🕰️
 
🤦‍♂️ मुस्कुराते हुए, यह सब भारतीय यात्रा के लिए एक मजेदार खेल बन गया है। सरकार ने फेयर कैप लगाने से अच्छी चीजें हो रही हैं, लेकिन बाकी कुछ कर दिया तो? मुझे लगता है कि यात्रियों को अपने पैसों को अच्छी तरह से व्यापार करने का मौका देना चाहिए। इसके अलावा, स्पाइसजेट और एयर इंडिया ने टिकट किराए बढ़ाने पर भी फिकर नहीं किया। मुझे लगता है कि ये दोनों अपने पैसों को अच्छी तरह से लगाते हैं, लेकिन यात्रियों के पैसों पर! 🤑
 
अरे, यह तो हवाई यात्रा के दौरान जो भी होता है, हम सबको पहले से ही पता था। लेकिन जब इंडिगो पर ऐसी बड़ी समस्या आ गई, तो सबको बाकी सभी की तुलना में सिर्फ पटरी पर खड़े रहने वाली रेलवे सेवाओं की ओर देखना पड़ा।
 
अरे, ये इंडिगो क्राइजिस बहुत गंभीर है... मुझे लगा कि लोगों को असहज अनुभव हो रहा है, और सरकार ने सही कदम उठाए हैं। फेयर कैप लागू करना एक अच्छा विचार है। लेकिन, यात्रियों को अभी भी बहुत असहज अनुभव बताना पड़ रहा है... मुझे लगता है कि कुछ तेजी से काम करेंगे।

और दिल्ली-पटना पर, यह उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा है। लोगों को फिक्स्ड प्राइस चाहिए... तो सरकार को और भी तेजी से काम करना पड़ेगा।

मुंबई-पटना पर, यह बढ़ी हुई किराएं किसी को भी पसंद नहीं आएंगी। लेकिन, मुझे लगता है कि सरकार ने सही समय पर कदम उठाए हैं।
 
उड़ानों पर घटिया माहौल तो तो सुनसान बात है, लेकिन यहाँ क्या करें? इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियां पब्लिक क्रैश करते समय भी कोई रोक लगाने का फैसला नहीं करतीं। सरकार ने फेयर कैप लगाने से अच्छा, लेकिन यह बिल्कुल सही है? क्योंकि इससे बड़े कंपनियां अपने मालिकों को धोखा देने के लिए इस्तेमाल करेंगी, तो कोई निश्चित नहीं।
 
ऐसा लगता है कि हवाई यात्रा में भी पेट्रोल और डीजल जैसी बाजारों में उछाल आने के बाद हमें फिर से एयरपोर्ट पर खड़ा देखना पड़ रहा है... 🚀
 
दिनों-रात उड़ानें कैसे बन जाती हैं 🕰️? यह तो देखकर ही मुश्किल लग रहा है कि कितने लोग भूखे-थके साथ यात्रा कर रहे हैं। हवाई किराए बढ़ने से पहले भी लोगों को असहज महसूस होता था। तो फिर क्यों इतनी बारीकी से फेयर कैप लगाया गया? 🤔

मुंबई-पटना में 72,000 रुपये तक किराएं बढ़ गईं, जबकि दिल्ली-मुंबई पर सीधी उड़ानों में भी इतनी ज्यादा वृद्धि हुई। यह कैसे संभव? और सरकार ने ऐसी पाबंदियां लगाने का क्या फायदा देखा? 🤷‍♂️

आजकल यात्रियों को इतनी ज्यादा परेशानी होती है। पहले उड़ानें टिक्की में रुक गईं, फिर किराए बढ़ गए। इसके बाद सरकार ने पाबंदियां लगाई और फिर से किराए कम कर दिए। लेकिन यह सब कैसे सुरक्षित है? 🤔
 
🚨 भाई, ये इंडिगो क्राइजिस पूरा होने का समय नहीं आया... हवाई यातायात में कुछ समझदारी की जरूरत है। स्पाइसजेट और एयर इंडिया जैसे कंपनियों ने अपने टिकट के दाम बढ़ा दिए, तो क्या सरकार ने उनके लिए खुद का पाबंदी बना रखी है? फेयर कैप लगाने से अच्छा, लेकिन इससे भी समय लगेगा। और यात्रियों को कोई सहारा नहीं मिल रहा है, वे अपनी उड़ानों के बारे में पूरी तरह अनिश्चित हैं। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि जल्द ही हवाई यातायात में स्थिरता आ जाएगी। 🛬
 
मेरा मानना है कि यह सब इंडिगो की ग्राहक सेवा पर ही नहीं बल्कि उनकी ऑपरेशनल प्रबंधन में बड़ा कमजोरी है। अगर वे अपने टिकट प्लेटफ़ॉर्म पर मुफ्त सुविधाएं प्रदान करते तो लोगों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती। और सरकार के फेयर कैप की बात करके सभी एयरलाइन्स पर नियंत्रण करना भी एक बड़ा गलतफहमी है। अगर सरकार वास्तव में लोगों की राहत देना चाहती है तो उन्हें प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उड़ानें चलाने और ग्राहक सेवा में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करें।
 
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