Interview: नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी बोले- बच्चों में बढ़ रही नकारात्मक सोच, परिवार और स्कूल की भूमिका अहम

मुझे लगता है कि युवाओं को डिजिटल दुनिया के जोखिमों के बारे में सोचने की जरूरत है। उन्हें नहीं पता चल सकता कि 10 साल पहले फेसबुक खेलने का अर्थ था, लेकिन अब यह बहुत और खतरनाक हो गया है 🤖। मुझे लगता है कि हमें बच्चों को डिजिटल दुनिया के नियमों से परिचित कराने की जरूरत है, ताकि वे जानते रहें कि ऑनलाइन क्या सुरक्षित और क्या नहीं।
 
मेरा ध्यान तो हमेशा स्कूल जीवन पर रहता है, लेकिन कल शिक्षकों ने कुछ बात कही जिसने मुझे थोड़ा गंभीर बना दिया। उनका कहना है कि तकनीक और गैजेट्स बच्चों को बहुत आसानी से नकारात्मक सामग्री मिल रही है। मैं समझता हूं कि ये सच है, मेरी भाई-भेन जैसे टाइपर कॉलेज में देख लेते हैं कि बच्चे सब वीडियोज़ और फोटोज़ पर लगातार देखते रहते हैं। यह मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालता है।
 
तो ये देखकर पीछे की बैठना अच्छा लगेगा। जैसे जैसे बच्चों को गैजेट्स और सोशल मीडिया में डूबका मारने की जोर बढ़ रही है, वैसे वैसे उनकी सोचने की क्षमता भी कम होने लगी है। तो हमें बच्चों को ऐसी चीज़ों से दूर रखने की जरूरत है जो उनके मस्तिष्क को नकारात्मकता में डाल देती हैं। हमें उन्हें सही जानकारी और सकारात्मक विचारों से भरपूर सामग्री देनी चाहिए ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए सक्षम हो सकें। 🤔💻
 
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