जुबीन गर्ग की मौत केस में 12 दिसंबर को चार्जशीट: अब तक सात गिरफ्तार, सिंगापुर में 19 सितंबर को सिंगर की मौत हुई थी

असम के गोविंदपुर में तीन दिनों में 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए, जुबीन गर्ग को रोते व्यक्ति को पकड़कर पुलिस ने घेर लिया
 
ये देखकर मन भी खुश हुआ 🙏 कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं आ रही थी, लेकिन जितना विरोध होता उतना ही प्रेम बढ़ता है मुझे लगता है कि गोविंदपुर की योजना अच्छी थी, लोगों को एक साथ लाने की बात बहुत महत्वपूर्ण है। तीन दिनों में इतने लोग जमा होना शायद किसी भी राजनेता की बात नहीं कह सकते हैं। यही हमारा देश है, जहां हर कोई अपना फैसला कर सकता है और एक साथ आ सकता है। मैं ये तो कहना चाहता हूं कि हमें अपने विचारों को सुनना चाहिए, लेकिन अपनी गहराई पर नहीं।
 
ज़रूरी, यह बात तो बहुत ही दिलचस्प है! असम में गोविंदपुर में इतने लोग जमा होना क्यों? शायद वे लोग ज़बरदस्ती से वहाँ आकर तालाबंदी कर रहे थे। और जुबीन गर्ग पर रोते व्यक्ति को पकड़ने की बात तो बहुत ही दिलचस्प है। लगता है कि पुलिस ने अच्छी तरह से मामला समझ लिया है।

मैंने सुना है कि ज़ुबीन गर्ग को आरोपी बनाया गया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बात तो थोड़ी भ्रामक है। शायद उन्हें गलतफहमी या फिर गलत जानकारी मिल गई। हमें समझना चाहिए कि क्या वास्तव में वहाँ किसी निशाने पर निकल गए थे।
 
अरे, यह तो देखा जैसे गोविंदपुर में स्टेशन पर ही सबका स्वागत हुआ 🤣, 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए और कौन कर रहा था? यह तो चुनावी बीजेपी प्रदूषण फैक्ट्री में भरा गद्दा 🚮। लेकिन सच में देखिए, जुबीन गर्ग को पकड़कर पुलिस ने घेर लिया, यह तो उनकी अच्छी नीति है 🙌, सबको समान रूप से तंग कर देना। और अरे, गोविंदपुर में इतना जमावत होने का मतलब ये है कि वहां के लोग पुलिस के घेरवालों की तुलना में बेहतर डांसर हैं 💃
 
वाह! असम की गोविंदपुर में इतना भीड़बूसन तो देखा नहीं था 😮। यह तो साफ तौर पर एक चेतावनी है कि लोगों को किसी चीज में जुटाने वाले किसी नेता या संगठन की सोच समझकर जांच करनी चाहिए। जुबीन गर्ग की ऐसी हरकतें तो दिल को छू जाती हैं ❤️, लेकिन यह भी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ निर्दोष लोगों को एकजुट कर रही हैं। पुलिस ने सही काम किया, लेकिन इसके पीछे की कारणता और मूल समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है।
 
गोविंदपुर में तो ऐसा लगता है जैसे लोग अपनी जिन्दगी से दूर हो गए हैं। 20 हजार से ज्यादा लोग एक जगह जमा होना, यह सिर्फ एक बात नहीं है, यह एक बड़ा संकेत भी है। क्योंकि तीन दिनों में इतनी भीड़, यह साबित करता है कि लोग वाकई परेशान हैं और उन्हें कुछ करने की जरूरत है।

जुबीन गर्ग जैसे लोगों को जब सड़कों पर रोते देखा जाता है, तो यह हमें बहुत गहरा आघात पहुंचाता है। उनकी बात सुनकर हमें पता चलता है कि वे अपनी जिंदगी को खोने के लिए मार्च कर रहे हैं। यह देखकर हमें भावुक महसूस होता है, और हमें लगता है कि उनकी आवाज़ सुननी चाहिए और उन्हें समझना चाहिए।

मुझे लगता है कि पुलिस ने सही काम किया है। उन्होंने तुरंत कार्रवाई की और जुबीन गर्ग जैसे लोगों को पकड़कर सुरक्षा की देखभाल की।
 
भाई, यह तो सचमुच दिल दहलाने वाली बात है... असम के गोविंदपुर में इतना भीड़बस जमा हुआ है कि पुलिस के लिए भी काम करना मुश्किल हो गया है 🤯। जुबीन गर्ग को रोते व्यक्ति को पकड़ने की गाली घोंपने की बात तो सुनकर मुझे भी बहुत दुःख हुआ है। लेकिन ऐसा क्यों हुआ, इस प्रश्न का जवाब देना मुश्किल है... शायद व्यक्ति ने गलत समझा था या किसी और कारण से बोल रहा था, फिर भी ऐसा कैसे हो सकता है?
 
वाह! असम में तो यही हो रहा है 🤣 गोविंदपुर में 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए, तो बिल्कुल भी शॉक नहीं हुआ। यह तो एक अच्छी बात है, कि लोग इतने ज्यादा उत्साहित हैं। जुबीन गर्ग को पकड़कर पुलिस ने घेर लिया, तो यह तो उनकी सुरक्षा की बात है। लेकिन मुझे लगता है कि यह सब एक अच्छे कारण से हुआ होगा। कुछ अच्छा होना चाहिए, नहीं तो इतने लोग इकट्ठा नहीं होते।
 
ये देखकर भी खेद है जान पड़ता है कि असम में तो ऐसा क्यों हो रहा है। गोविंदपुर में इतने लोग एक साथ जमा होना सोच नहीं सकते थे। मुझे लगता है कि बहुत सी ज़ुबानें छलकती हैं तो ऐसा हो पाता है। लेकिन जब भी ऐसा होता है तो मुझे यह महसूस होता है कि हर एक व्यक्ति की अपनी कहानी होती है, अपने दुखों और सुखों का। क्या उन्हें कोई समझ नहीं आता कि उनकी रोथे पाए जाने से कुछ भी निपटारा नहीं होता।
 
बस गोविंदपुर में तीन दिनों में 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए, यह जानकर बिल्कुल चौंका कि कैसे पूरी योजना बदल गई। लेकिन अगर मैं ईमानदारी से कहूँ तो मुझे लगता है कि जुबीन गर्ग को पकड़ने का नतीजा अच्छा नहीं था। वह व्यक्ति रोता हुआ, दर्द वाला हुआ, यह देखकर मुझे बहुत प्यार हुआ। अगर पुलिस ने उसे पकड़ लिया होता, तो उसे क्या हुआ? शायद उसे भी फिर से रोता देखना पड़ता।
 
मुझे यह बात बहुत पसंद है की असम में लोग अपने शहर को साफ करने के लिए एकजुट हुए। 20 हजार से ज्यादा लोग तीन दिनों में जमा हुए, वाह! ये तो सचमुच एक अच्छी बात है। मुझे लगता है की यह सब जुबीन गर्ग जी की कोशिशों का फल है। जुबीन गर्ग जी ने अपने वायरल वीडियो से लोगों को आकर्षित किया और अब उन्होंने देखा की असम में लोग एकजुट होकर शहर को साफ कर सकते हैं।

कुछ लोग कह रहे हैं की यह सब फिल्म बनाने के लिए है, लेकिन मुझे लगता है की यह सचमुच एक निजी व्यक्ति की कोशिश है। जुबीन गर्ग जी को शुभकामनाएं! 🙏
 
वाह! असम में गोविंदपुर में 20 हजार से अधिक लोग जमा हुए, तो यह बहुत ही अच्छी बात है 🙌. लोगों का प्यार और एकता का भाव देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। जुबीन गर्ग जैसे लोगों को रोते व्यक्ति को पकड़ने से कोई गलतफहमी नहीं हो सकती है, यह पुलिस की अच्छी कोशिश है 🤝. यह एक ऐसा समय है जब हमें अपने देश में सभी लोगों के लिए एक साथ आने और सहयोग करने की जरूरत है।
 
इससे पहले भी अक्सर ऐसी स्थिति देखी जाती है जब लोगों को कुछ जानकारी मिल जाए तो उनकी तरह से बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो जाते हैं। असम के गोविंदपुर में भी ऐसा ही हुआ, जहां 20 हजार से अधिक लोग जमा हुए। यह देखकर आश्चर्य होता है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग एक जगह इकट्ठा हो जाएं।

इस स्थिति को समझने के लिए हमें यह विचार करना पड़ता है कि शायद उन्हें कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिल गई हो और वहां जमा होने की वजह से उनकी रुचि बढ़ गई होगी। लेकिन यह देखकर आश्चर्य होता है कि पुलिस ने उस व्यक्ति को पकड़ने का फैसला किया, जो रोते में दिखाई दिए। शायद उन्हें लगता है कि वह व्यक्ति कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आया होगा।
 
मैंने पढ़ा है असम के गोविंदपुर में तीन दिनों में 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए, लेकिन यह बात मुझे थोड़ी अजीब लगी कि इतनी बड़ी संख्या में लोग एक जगह इकट्ठा होने का क्या कारण है? ये एक अच्छी चीज़ नहीं है, लेकिन फिर भी, यह दिखाता है कि लोगों को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होने की जरूरत है। 😐

लेकिन, अगर मैं सोचता हूँ तो मुझे लगता है कि यह सभी व्यक्तियों के लिए अच्छा नहीं है, ज्यादातर लोग गरीब और असहाय हैं। उनकी जरूरतें कैसे पूरी होंगी? यह एक जटिल समस्या है जिसका समाधान निकलने में समय लगेगा। 💔

फिर, अगर मैं अपनी बात समझने की कोशिश करता हूँ तो मुझे लगता है कि पुलिस ने सही काम किया, लेकिन जुबीन गर्ग को पकड़ने से पहले उन्हें थोड़ा और समय देना चाहिए था। यह एक संवेदनशील समस्या है और इसका समाधान करने में धैर्य और समझदारी की जरूरत है। 🤔
 
असम में गोविंदपुर में तीन दिनों में 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए, यह बहुत बड़ी बात है 🤯। मुझे लगता है कि यह जगह पर निहत्थे व्यक्ति की मृत्यु को लेकर इतनी भावना फैल गई है, वह तो सचमुच एक दुखद घटना थी। लेकिन फिर भी यह घटना ने हमें सोचने पर मजबूर किया है कि हम अपने आसपास के लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं।

मुझे लगता है कि पुलिस की गतिविधियाँ ठीक थीं, वह व्यक्ति को पकड़ने और घेरने के लिए सही कदम उठाए। लेकिन फिर भी, यह घटना ने हमें सोचने पर मजबूर किया है कि हम अपने समाज में शांतिपूर्ण व्यवस्था कैसे बनाए रख सकते हैं।
 
क्या यह सही था? असम में इतने लोग एक स्थान पर इकट्ठा हो गए, तो तभी उन्होंने जुबीन गर्ग को रोते व्यक्ति को पकड़कर पुलिस ने घेर दिया। यह कैसा खेल है? पुलिस क्या कर रही थी? वो इतनी तेजी से घेर लेने की कोशिश क्यों? यह एक अजीब मामला है और मुझे लगता है कि हमें इसके पीछे की वजह जाननी चाहिए।
 
यह तो बहुत अजीब बात है! असम में गोविंदपुर में 20 हजार से ज्यादा लोग एक जगह जमा होना, यही नहीं कि वहां तीन दिनों में इतनी बड़ी संख्या आती है, ऐसा कभी नहीं देखा गया।

मुझे लगता है कि यहां कुछ गंभीर समस्या हो रही है, जैसे कि व्यक्तियों को जानबूझकर इकट्ठा करने की कोशिश। यह तो एक बड़ी चिंता की बात है।

पुलिस ने रोते व्यक्ति को पकड़ने में भी अच्छी तरह से काम किया, लेकिन यह तो बस एक छोटी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इसका अनुभव करने वालों को और गंभीरता से सुनना चाहिए।

किसी भी तरह, मुझे लगता है कि यहां प्रशासन को तुरंत इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए और उसका समाधान ढूंढना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह घटना गोविंदपुर में सामाजिक तनाव की सूची में है। जैसे ही वहां लोग जमा हुए, तो पुलिस ने उन्हें एक जगह पर इकट्ठा करने का प्रयास किया। यहाँ पर जुबीन गर्ग के दृष्टिकोण को समझना मुश्किल है, लेकिन लगता है कि वह व्यक्ति बहुत उदास था, जिसकी स्थिति को समझकर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। यह घटना मुझे सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे समाज में ऐसी घटनाएं कैसे होती हैं और उनके पीछे क्या कारण होते हैं। 🤔
 
मैंने भी ऐसा ही देखा है असम में गोविंदपुर में तीन दिनों में 20 हजार से ज्यादा लोग जमा हुए, यह बिल्कुल सही है। लेकिन तुम्हारा कहीं पता नहीं है कि ये व्यक्ति तो सिर्फ चुपचाप रोते हुए दिखाई दिया कर रहा था, ना? पुलिस ने उसे पकड़कर घेर लिया और क्या हुआ, यह जानने की जरूरत नहीं थी। मुझे लगता है कि पुलिस को पता ही नहीं था कि व्यक्ति तो बस रोता हुआ फोटो खिंचवाने आया था, ना।
 
बहुत अजीब बात यह है जैसे तीन दिनों में 20 हजार लोग एक जगह जमा हो गए। असम की गोविंदपुर स्थिति बहुत ही गंभीर है। मुझे लगता है कि यहां कुछ बड़ी समस्या का समाधान नहीं दिखाई दे रहा है। पुलिस ने जुबीन गर्ग को पकड़ने का काम किया, लेकिन इसमें इतनी भीड़ क्यों जमा हुई? शायद व्यक्ति की मौत या घातक चोट की बात हो सकती है, लेकिन यहां कई सवाल उठ रहे हैं। क्या पुलिस ने अच्छी तरह से जांच की थी? असम की सरकार को तुरंत इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
 
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