'जो उचित समझा, वही किया': प्रधानमंत्री मोदी पर राहुल गांधी का तंज, बोले- सवालों से इतनी घबराहट?

मुझे लगता है कि दोनों पक्ष अपनी बात कह रहे हैं लेकिन बहुत मुश्किल से समझाई जा सकती है। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर दिया तो फिर यह तंज कैसे दिया? लेकिन मोदी जी का जवाब भी सही नहीं लग रहा तो क्यों? दोनों ही पक्ष अपने-अपने तरीके से बोल रहे हैं लेकिन मुझे लगता है कि सच्चाई कहाँ है? 🤔
 
मोदीजी को बस सवालों से इतनी घबराहट हुई, तो बिल्कुल! 🤣 वो लोग तो सिर्फ झूठ की शरण लेते रहते हैं! और राहुल जी ने सही कहा है कि मोदीजी सच्चाई से डरते हैं! 🙌
 
😐 मोदी जी सोचने में इतने घबराए कि झूठ बोलने लगे? 🤔 2020 चीन संघर्ष के दौरान उन्होंने खुद को अलग कर लिया था, यह तो सच है, लेकिन उनकी जिम्मेदारी को छोड़कर क्या करना? 🙄
 
मोदी जी की सरकार को देखकर मेरा मन सिर्फ सवालों से भर जाता है 🤔📊 आपने पूर्व थल सेनाध्यक्ष एम.एम. नरवणे की कथित अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला दिया तो शायद इसकी वजह से ही मोदी जी इतनी घबराहट में आ गए? 🤷‍♂️

नहीं, बस सवालों से इतनी घबराहट हुई? 🙄 यह तो नहीं सही दिख रहा है। क्या वास्तव में सरकार के पास अपने काम पर चर्चा करने की जगह सवालों से खुद को बचाने का एक तरीका नहीं है? 🤔

कहते हैं कि चुनाव में जीतने के लिए आपको अपने दुश्मन के घेरे में घुसना पड़ता है, लेकिन यहां तो ऐसा लगता है कि सरकार ने अपने दुश्मन के घेरे में बैठकर खुद को बनाए रखा है। 😒

मोदी जी ने कहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन यह तो एक बहुत बड़ा सवाल है - क्या वास्तव में सरकार ने इसे सुनने का तरीका नहीं ढूंढा? 🤷‍♂️

मेरी राय में ऐसा लगता है कि सरकार को अपने नेताओं को जिम्मेदार ठहराने की बजाय उन्हें बचाने की जगह प्रयास करना चाहिए। लेकिन यहां तो ऐसा लगता है कि वे दोनों एक ही रास्ते पर चल रहे हैं। 🤔

क्या मेरी बात सही नहीं? 😐
 
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