जरूरत की खबर- मिड–एज से दिखते डिमेंशिया के संकेत: रिसर्च में खुलासा, 11 आदतों से बढ़ता रिस्क, डॉक्टर से जानें हेल्दी ब्रेन हैबिट्स

ब्रेन को स्वस्थ रखने का एकमात्र तरीका है हेल्दी लाइफस्टाइल। रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी आदतें शामिल करना चाहिए जिससे ब्रेन को नुकसान नहीं पहुंचे।

इस रिसर्च में मिड-लाइफ के छह खास डिप्रेसिव लक्षणों की पहचान की गई है, जो आगे चलकर खतरे की घंटी हो सकते हैं। ये लक्षण दिमाग में शुरू हो रहे न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रोसेस की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।

इस रिसर्च में 55 साल से अधिक उम्र के 5,000 से ज्यादा लोगों की लाइफ को दो दशकों तक ट्रैक किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में कुछ खास तरह के डिप्रेसिव लक्षण एक साथ दिखाई दे रहे थे, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था।

डिमेंशिया की सबसे पहली चेतावनी का नाम है खुद पर भरोसा कम होना। जब आप अपने कार्यक्षमता, याददाश्त, एकाग्रता, सोचने, और सामाजिक व्यवहार की क्षमताओं में कमजोरी महसूस करते हैं, तो आपको डिमेंशिया की चेतावनी के रूप में देखा जाता है।

डिमेंशिया की संभावना बढ़ने के लिए खुद पर भरोसा कम करना सबसे पहला संकेत है। अगर आपको लगातार घबराहट या बेचैनी महसूस होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आप दिनभर बेचैन और कमजोर महसूस करते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।

अगर आपको फोकस करने, फैसले लेने या एक काम पर टिके रहने में दिक्कत होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आपको बार-बार फिर से सीखने की जरूरत होती है या आप अपने पास रखे जाने वाले चीजों को भूलते रहते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।

डिमेंशिया की संभावना बढ़ने के लिए निम्नलिखित आदतें भी हो सकती हैं:

- खुद पर भरोसा कम करना
- लगातार घबराहट या बेचैनी
- भावनात्मक बदलाव
- समस्याओं का सामना करने में कठिनाई
- गर्मजोशी और भावनात्मक जुड़ाव की कमी
- लगातार घबराहट या तनाव महसूस होना
- काम पूरा करने के बाद भी असंतोष महसूस करना
- फोकस करने में कठिनाई
- सोचने में कठिनाई
 
मेरे दोस्त, यह तो बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है! मुझे लगता है कि हमें अपने जीवन को और भी स्वस्थ रखने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। अगर हम अपने दिमाग को स्वस्थ रखते हैं, तो हम अपने जीवन को और भी सुखी और संतोषजनक बना सकते हैं 🙏

मुझे लगता है कि यह रिसर्च बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हमें पता चलता है कि हमारे दिमाग में कुछ लक्षण हो सकते हैं जो आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए, यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम अपने दिमाग को स्वस्थ रखते हुए अपने जीवन को जीने का प्रयास करें। 🌟

मेरी राय में, अगर आप अपने जीवन में इन लक्षणों को देखते हैं, तो आपको तुरंत एक डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर आपको यह पता लगा सकते हैं कि आपके पास कोई समस्या है या नहीं। और अगर हां, तो उन्हें अपनी मदद से हल कर सकते हैं। 💊

मुझे लगता है, कि हमें अपने जीवन में अधिक खुशियाँ और सुख देने वाली चीजों को शामिल करना चाहिए। इससे हमारे दिमाग को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। 🌈
 
😓 दिमाग की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर आप लगातार घबराहट या बेचैनी महसूस कर रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा, लेकिन अगर आप दिनभर ऐसा महसूस करते हैं तो चिंतित होना चाहिए। 🤔

अगर आप अपने फैसलों में दिक्कत महसूस कर रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा, लेकिन अगर आप लगातार फिर से सीखने की जरूरत महसूस करते हैं तो चिंतित होना चाहिए। 📚

हमें अपने दिनचर्या में बदलाव लाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हमारे दिमाग को नुकसान न पहुंचे। फिटनेस, पौष्टिक आहार और तनावमुक्ति तकनीकें को अपनाकर हम अपने दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। 💪
 
मैंने देखा है तुम्हारे समुदाय में इतनी लोग ऐसी हैं जो अपनी बुरी सेहत को समझ नहीं पाती। डिमेंशिया वाले लोगों को हमेशा शांत और सहानुभूतिपूर्ण दिखाई देता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उनकी जिंदगी में बहुत सारी चुनौतियाँ आती रहती हैं।

तुम्हारे इस रिसर्च से पहले, मैंने अपने नानाजी को डिमेंशिया के लक्षण देखे थे। उन्होंने खुद पर भरोसा कम करने और लगातार घबराहट महसूस करने की बात कही। जब उनकी याददाश्त खराब होने लगी, तो वे अपनी जिंदगी में सुधार करने की जरूरत समझ गए। लेकिन अब हमारा देश इतना पीछे है, कि इस समस्या को हल करने की कोशिश नहीं करता।

मुझे लगता है कि डिमेंशिया वाले लोगों को सामाजिक समर्थन चाहिए, न कि देखभाल। हमें अपने पूर्वजों की इस समस्या को हल करने की जरूरत है, ताकि अगली पीढ़ी बिना डिमेंशिया वाले जिंदगी जा सके।
 
मिडल-एज़ में डिप्रेसिव लक्षणों देखकर परेशान होता है। अगर आपको लगता है कि आपकी ब्रेन खट्टी हो रही है, तो किसी से बात करो! 🤝
 
मुझे लगता है कि हमारे दैनिक जीवन में इतने बदलाव आ रहे हैं कि हम अपनी ब्रेन को खोने की संभावना नहीं समझते। आजकल के शिक्षा प्रणाली, घर पर समय बिताने वाले लोगों की बढ़ती संख्या, और तकनीकी उत्कृष्टताओं के कारण हमारे मन को बहुत अधिक तनाव में रखा जा रहा है।

कभी-कभी हमारी याददाश्त भी कमजोर हो जाती है, और हम ऐसी चीजों को भूल जाते हैं जिन्हें हमने पहले बहुत अच्छी तरह से सीखा था।

इसलिए, मुझे लगता है कि हमारी ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने दैनिक जीवन में अधिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
 
ये रिसर्च तो बहुत जरूरी है… 55 साल से अधिक उम्र के लोगों की जिंदगी में भी इन लक्षणों का मुकाबला करना चाहिए। खुद पर भरोसा कम करने से पहले हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पास इतनी ताकत है… जैसे बिच्छू हाथ हैं और वे निरंतर मिलकर संघर्ष करते हैं।
 
🤗 अगर तुम्हारे दिमाग में ऐसे लक्षण दिखने लगे जैसे ब्रेन में समस्या है, तो बस अपना मन छोड़ कर एक बालिका भी पूछ ले की मदद कितनी जरूरी है 🤗
 
ज्यादातर लोग जो दिमाग की समस्याओं से गुजरते हैं वो हमेशा अपने परिवार और दोस्तों से बात नहीं करते हैं। वो हमेशा अकेले रहते हैं ताकि किसी ने भी उनकी परवाह न करे। लेकिन अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके लिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि तब स्वास्थ्य की समस्याएं और भी बढ़ जाती हैं।

अगर आपको लगातार घबराहट या बेचैनी महसूस होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आप दिनभर बेचैन और कमजोर महसूस करते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे दादाजी जैसे पुराने लोगों को डिमेंशिया होती है, लेकिन जब मैं उनके साथ बैठता हूँ तो मुझे लगता है कि वो भूल गए हैं। लेकिन फिर मैंने सोचा कि शायद वो बस याद नहीं कर पाए हैं, न कि कोई समस्या।

कुछ लोग कहते हैं कि डिमेंशिया का इलाज किया जा सकता है, लेकि मुझे लगता है कि अगर आप अपने जीवन को बदलने की कोशिश करते हैं, तो आपकी ब्रेन में समस्याएं कम होने लगेंगी।

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ब्रेन को स्वस्थ रखने का तरीका तो बस यह है कि हमारी दैनिक जिंदगी में कुछ आदतें लाना चाहिए। मेरा मानना है कि अगर हम अपने जीवन में थोड़ी सी नियमितता और संतुलन लाएं, तो हम अपने ब्रेन को कम नुकसान पहुंचा पाएंगे।

डिमेंशिया की समस्या वास्तव में एक गंभीर चुनौती है, और इसके लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है। लेकिन मेरा सवाल यह है कि अगर हमारे पास डिमेंशिया की संभावना है, तो फिर हम इसके लिए क्या कर सकते हैं? मुझे लगता है कि हमें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और अपने ब्रेन को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
 
मुझे यह खेद है कि आज के युग में लोग इतना तनावग्रस्त और कमजोर होते जा रहे हैं। मैंने अपने बचपन की यादें देखकर मन हui gaya, जब हमारे माता-पिता पूरे दिन घर पर ही रहना पसंद करते थे। उन्होंने हमेशा कहा, "कम से कम 4-5 घंटे तक बैठे रहने का कोई भी काम नहीं है।"

आज के समय में लोग इतने जल्दी तनावग्रस्त हो जाते हैं कि उनकी मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पाते। उन्हें अपने घर पर बैठकर काम करना पसंद है, ताकि वे कम समय तक बाहर निकलें। लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होता, बस तनाव और कमजोरी बढ़ती जाती।

मैंने देखा है कि आज के युवाओं को सामाजिक जीवन में भाग लेने में इतना डर रहता है कि वे अपने घर पर बैठकर ही रहना पसंद करते हैं। इससे उनकी मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पाता।
 
अगर आप 55 साल से अधिक उम्र का हैं तो आपको अपने दिमाग की सेहत पर ध्यान देना चाहिए 🤔। खुद पर भरोसा कम करना, लगातार घबराहट या बेचैनी, और भावनात्मक बदलाव जैसी चीजें आपके लक्षणों को बढ़ा सकती हैं 💪
 
मुझे लगता है कि ये रिसर्च बहुत जरूरी है, लेकिन मैं थोड़ा चिंतित हूँ। मेरे दादा-दादी को कभी डिमेंशिया नहीं हुआ, लेकिन उनकी बेटियाँ और छोटी बहनों ने इस से जूझी। मुझे लगता है कि हमें अपने जीवन को स्वस्थ रखने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। मैंने अपने बच्चों को भी ऐसा ही कहा, लेकिन लगता है कि वे अभी भी खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें अपने जीवन को संतुलित रखने के लिए कुछ बदलाव करने चाहिए, जैसे कि अधिक शारीरिक गतिविधि करना, स्वस्थ भोजन खाना, और पर्याप्त नींद लेना। 🤝
 
बिल्कुल सही, ये सब खातिर डिमेंशिया की सबसे पहली चेतावनी है। लेकिन क्या हमेशा डिमेंशिया वाले लोगों को सोच कर भी नहीं बनते। मैंने अपने दादाजी को भी ऐसी ही समस्या थी। उन्हें खुद पर भरोसा कम करने की समस्या थी, और फिर उनकी याददाश्त बिल्कुल खराब हो गई।

अब सोचते समय मैं एक सवाल करता हूं कि क्या हमारे पास कोई ऐसी तकनीक है जिससे हम अपने डिमेंशिया की चेतावनी को पता कर सकें।
 
यह तो बहुत बड़ा खतरा है दिमेंशिया का। मैंने कई बार कहा है कि हमें अपनी ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए ध्यान देना चाहिए। खुद पर भरोसा कम करना, घबराहट और तनाव महसूस करना, भावनात्मक बदलाव, समस्याओं का सामना करने में कठिनाई... ये सब लक्षण हो सकते हैं जो दिमेंशिया की शुरुआती चेतावनी हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम तैयार न हों। हमें अपनी ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना, स्वस्थ भोजन खाना, पर्याप्त नींद लेना चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें अपनी मानसिक सेहत पर ध्यान देना चाहिए। 🤔
 
मेरे दोस्त, अगर हम अपने दिमाग को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो सबसे पहले हमारी जिंदगी में एक संतुलित जीवनशैली लानी चाहिए। जब हमारे दिमाग में याददाश्त, एकाग्रता, और सोचने की क्षमता कम होने लगती है तो हमें डिमेंशिया की खतरे की स्थिति में आ जाने का खतरा बढ़ जाता है। मेरे अनुसार, अगर हम अपने दिन को सुबह 6 बजे से शुरू करें और धूम्रपान बंद कर लें, तो हमारे दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
 
🤔 अगर तुम्हारी दिमागी ताकत कम होती जा रही है तो डिमेंशिया का खतरा ज्यादा हो सकता है। यह तो सही है, लेकिन इससे पहले कि तुम इस बात पर ध्यान देना शुरू कर, तुम्हारी रोजमर्रा की जिंदगी में स्वस्थ आदतें बनाए रखनी चाहिए। 🏋️‍♀️

मैंने अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों को यह बात जरूर बताई है और अब उनका फॉलोअप भी कर रहा हूँ। मेरा मतलब तो यह नहीं है कि अगर तुम्हें इन लक्षणों की शुरुआत दिखाई दे, तो तुम्हारे पास डिमेंशिया होने का 100% खतरा नहीं है। लेकिन अगर इन लक्षणों में से कोई भी सामने आता है, तो तुम्हें जरूर ध्यान देना चाहिए। 💡
 
इस रिसर्च में देखा गया है कि मध्य आयु के लोगों में डिप्रेसिव लक्षण बढ़ना खतरनाक हो सकता है, जिससे डिमेंशिया की संभावना भी बढ़ जाती है। तो यह हमेशा से मुश्किल था, लेकिन अब इसकी गंभीरता और खतरे को समझकर अपने जीवन को स्वस्थ बनाने की कोशिश करना चाहिए।
 
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