ब्रेन को स्वस्थ रखने का एकमात्र तरीका है हेल्दी लाइफस्टाइल। रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी आदतें शामिल करना चाहिए जिससे ब्रेन को नुकसान नहीं पहुंचे।
इस रिसर्च में मिड-लाइफ के छह खास डिप्रेसिव लक्षणों की पहचान की गई है, जो आगे चलकर खतरे की घंटी हो सकते हैं। ये लक्षण दिमाग में शुरू हो रहे न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रोसेस की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।
इस रिसर्च में 55 साल से अधिक उम्र के 5,000 से ज्यादा लोगों की लाइफ को दो दशकों तक ट्रैक किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में कुछ खास तरह के डिप्रेसिव लक्षण एक साथ दिखाई दे रहे थे, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था।
डिमेंशिया की सबसे पहली चेतावनी का नाम है खुद पर भरोसा कम होना। जब आप अपने कार्यक्षमता, याददाश्त, एकाग्रता, सोचने, और सामाजिक व्यवहार की क्षमताओं में कमजोरी महसूस करते हैं, तो आपको डिमेंशिया की चेतावनी के रूप में देखा जाता है।
डिमेंशिया की संभावना बढ़ने के लिए खुद पर भरोसा कम करना सबसे पहला संकेत है। अगर आपको लगातार घबराहट या बेचैनी महसूस होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आप दिनभर बेचैन और कमजोर महसूस करते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।
अगर आपको फोकस करने, फैसले लेने या एक काम पर टिके रहने में दिक्कत होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आपको बार-बार फिर से सीखने की जरूरत होती है या आप अपने पास रखे जाने वाले चीजों को भूलते रहते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।
डिमेंशिया की संभावना बढ़ने के लिए निम्नलिखित आदतें भी हो सकती हैं:
- खुद पर भरोसा कम करना
- लगातार घबराहट या बेचैनी
- भावनात्मक बदलाव
- समस्याओं का सामना करने में कठिनाई
- गर्मजोशी और भावनात्मक जुड़ाव की कमी
- लगातार घबराहट या तनाव महसूस होना
- काम पूरा करने के बाद भी असंतोष महसूस करना
- फोकस करने में कठिनाई
- सोचने में कठिनाई
इस रिसर्च में मिड-लाइफ के छह खास डिप्रेसिव लक्षणों की पहचान की गई है, जो आगे चलकर खतरे की घंटी हो सकते हैं। ये लक्षण दिमाग में शुरू हो रहे न्यूरोडीजेनेरेटिव प्रोसेस की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।
इस रिसर्च में 55 साल से अधिक उम्र के 5,000 से ज्यादा लोगों की लाइफ को दो दशकों तक ट्रैक किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में कुछ खास तरह के डिप्रेसिव लक्षण एक साथ दिखाई दे रहे थे, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था।
डिमेंशिया की सबसे पहली चेतावनी का नाम है खुद पर भरोसा कम होना। जब आप अपने कार्यक्षमता, याददाश्त, एकाग्रता, सोचने, और सामाजिक व्यवहार की क्षमताओं में कमजोरी महसूस करते हैं, तो आपको डिमेंशिया की चेतावनी के रूप में देखा जाता है।
डिमेंशिया की संभावना बढ़ने के लिए खुद पर भरोसा कम करना सबसे पहला संकेत है। अगर आपको लगातार घबराहट या बेचैनी महसूस होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आप दिनभर बेचैन और कमजोर महसूस करते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।
अगर आपको फोकस करने, फैसले लेने या एक काम पर टिके रहने में दिक्कत होती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको डिमेंशिया होगा। लेकिन अगर आपको बार-बार फिर से सीखने की जरूरत होती है या आप अपने पास रखे जाने वाले चीजों को भूलते रहते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपकी ब्रेन में समस्याएं आ रही हैं।
डिमेंशिया की संभावना बढ़ने के लिए निम्नलिखित आदतें भी हो सकती हैं:
- खुद पर भरोसा कम करना
- लगातार घबराहट या बेचैनी
- भावनात्मक बदलाव
- समस्याओं का सामना करने में कठिनाई
- गर्मजोशी और भावनात्मक जुड़ाव की कमी
- लगातार घबराहट या तनाव महसूस होना
- काम पूरा करने के बाद भी असंतोष महसूस करना
- फोकस करने में कठिनाई
- सोचने में कठिनाई