जयपुर-मुंबई एअर इंडिया फ्लाइट का फ्यूल लीक हुआ: रनवे पर जाते वक्त पायलट को खराबी का सिग्नल मिला, यात्रियों को दूसरे प्लेन से भेजा गया - Jaipur News

एयर इंडिया की जयपुर-मुंबई उड़ान पर फ्यूल लीक, पायलट से सिग्नल मिला, यात्रियों को दूसरे विमान में भेजा गया।

शाम 7:55 बजे, जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एअर इंडिया की फ्लाइट AI-622 उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट पर 189 यात्री सवार थे। विमान शाम 7:55 बजे जयपुर से मुंबई के लिए रवाना होने वाली थी, और एयरक्राफ्ट रनवे की ओर बढ़ रहा था। इस बीच तकनीकी सिस्टम में खराबी का अलर्ट मिला, इसके बाद पायलट और ग्राउंड स्टाफ ने तुरंत टेकऑफ रोक दिया।

वहीं, सभी यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें वापस टर्मिनल बिल्डिंग में ले जाया गया। अचानक हुई इस घटना से यात्रियों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जांच करने पर एयरक्राफ्ट के इंजन से फ्यूल लीकेज की पुष्टि हुई है। इसके बाद विमान से सभी यात्रियों को निकाला गया।

3 घंटे 40 मिनट बाद दूसरे विमान से पैसेंजर्स को भेजा

करीब 4 घंटे की देरी के बाद रात 11:35 बजे दूसरे एयरक्राफ्ट से सभी पैसेंजर्स को मुंबई के लिए रवाना किया गया। एअर इंडिया के साथ ही जयपुर एयरपोर्ट की तकनीकी टीम ने प्रभावित एयरक्राफ्ट की जांच शुरू कर दी है, और फ्यूल लीकेज के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

इससे पहले, 2 महीने पहले वाराणसी में इंडिगो फ्यूल लीक होने की घटना घटी। उस समय पायलट ने वाराणसी सीमा में घुसते हुए ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को मेडे मैसेज दिया।

एयरपोर्ट पर हाल ही में इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी। फ्लाइट SG - 649 का लैंडिंग गियर हाइड्रोलिक सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी।
 
क्या ये देश कैसे बन सकता है जहां हर उड़ान में सुरक्षित नहीं जा पाती। इतनी बार फ्यूल लीक हो रहा है, तो एयरलाइन की सुरक्षा योजना तैयार नहीं करने दो। अगर विमान में खराबी मिलती है तो पहले टेकऑफ रोक देना चाहिए, फिर भी ऐसा हुआ। और दूसरा विमान लेकर यात्रियों को दूसरे जहाज पर भेजने की बात कहीं से आती है। 🤔
 
बात तो यह है देखिए 🤔, एयर इंडिया की जयपुर-मुंबई उड़ान पर फ्यूल लीक हो गया, और पायलट से सिग्नल मिल गया। क्या इस तरह की घटनाएं होना जरूरी है? 🤷‍♂️

[वीडियो देखें](https://www.ndtv.com induced-by/india-news/air-india-jaypur-mumbai-flight-fuel-leak-ai-622-pilots-get-signal-1119244)
 
मेरे दोस्त, इस तरह की घटनाएं हमेशा सोच-समझकर तैयार रहने की जरूरत होती हैं! एयर इंडिया की जयपुर-मुंबई उड़ान पर फ्यूल लीक होना बहुत बड़ी चिंता की बात है। यहां तक कि पायलट से सिग्नल मिल गया, तो भी हमारी जान बचाने के लिए तुरंत विमान से सभी यात्रियों को दूसरे विमान में भेज दिया गया। 😱

मुझे लगता है कि एयरपोर्ट की तकनीकी टीम ने बहुत अच्छी तरह से काम किया है। वे न तो विमान को उड़ाने की कोशिश कर रहे थे, न ही उन्होंने यात्रियों को खतरे में डालने की कोशिश की। बल्कि उन्होंने तुरंत समस्या का पता लगाया और सुरक्षित रूप से सभी यात्रियों को विमान से बाहर निकाल दिया। 🙏

लेकिन फ्यूल लीकेज के कारणों का पता लगाने में थोड़ी देर लगी। इससे पहले हमें यह नहीं पता था कि क्या हो रहा है। मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाएं हमेशा हमें सोचने पर मजबूर करती हैं और हमें अपनी जान बचाने के लिए तैयार रहने की जरूरत होती है। 🤔
 
मुझे तो एयरपोर्ट पर ऐसी स्थिति नज़र आती है जैसे फुल खेल में चूक गया है 🤦‍♂️। कोई देर हो रही है और कई लोगों को फिकर करना पड़ रहा है। और तो और, पायलट से सिग्नल मिला है तो यह अच्छा है कि उन्हें समय पर हवाई जहाज से निकलने की पूरी सुविधा मिल गई। लेकिन फ्यूल लीकेज की बात करते हैं तो वास्तविकता यह है कि एयरलाइन्स की सुरक्षा बहुत बड़ी चुनौती है। क्या कभी नाकाम योजनाओं पर ध्यान दिया जाएगा?
 
शुक्रिया, ये एयर इंडिया की विमान पर फ्यूल लीक होनी की बात है। मुझे तो लगता है कि यह एक बड़ी घटना है, जैसे कि किसी कक्ष में आग लगने की तरह। हमारे पास टीचर्स सिर्फ साइंस और इंजीनियरिंग नहीं सीखाते, लेकिन हमें एयरपोर्ट पर इस तरह की घटना को देखने का मौका भी नहीं मिलता।
 
ये बात नहीं बदलेगी, हर चीज़ खराब होती जा रही है... उड़ान भरने के लिए तैयार होने वाले पायलट, इंजन से फ्यूल लीक हो गया, 189 यात्रियों को खतरे में डाल दिया। इसके बाद भी वही दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, इंडिगो के बाद अब एयर इंडिया... 🚨
 
🙏 यह घटना बहुत बड़ी है, ज्यादातर लोगों ने टूर इंडिया का आनंद लेने के लिए ये उड़ान भरी, अब यह सोचा जा रहा है कि ये उड़ान क्या चूक गई? 🤔 फ्यूल लीकेज की समस्या तो बहुत बड़ी है, हमें उम्मीद है कि पायलट्स और टीम ने सही दिशा में सोचा।

मैं यात्रियों के साथ हुआ इस दुःख के लिए मेरी सहानुभूति है। 4 घंटे की देरी से यात्रियों को दूसरे विमान में भेजा गया, यह बहुत बड़ी थकान और असुविधा। हमें उम्मीद है कि इस घटना से सब कुछ ठीक हो जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। 🙏💕
 
🚨😬🛩️ AI-622 फ्यूल लीक होने पर यात्रियों को दूसरे विमान में भेजा गया। 😅 तो एयर इंडिया ने सिग्नल करके अपनी प्रतिष्ठा बचा 🙏
 
बिल्कुल भी न लगे, एयर इंडिया पर यह दूसरी बार ऐसी घटना हो रही है, पहले वाराणसी में इंडिगो की जैसे ही, यह बात चिंताजनक है। तो अब इस दौरान क्या कुछ गलत चल रहा है? क्या विमान की जांच पूरी नहीं हुई? और फिर भी दूसरे विमान से यात्रियों को भेज दिया गया? यह तो बहुत अजीब है, लगता है कि एयरलाइन पर कुछ समस्या हो रही है।
 
तो यह तो बहुत बड़ा मामला है! एयर इंडिया की जयपुर-मुंबई उड़ान पर फ्यूल लीक होने से यात्रियों को बहुत डर लगा होगा। तो कैसे यह हुआ? और इसके पीछे कौन से कारण हैं?

मुझे लगता है कि एयरपोर्ट पर तकनीकी टीम ने बहुत अच्छी तरह से काम किया, जब विमान में फ्यूल लीकेज की समस्या आई, तो उन्होंने तुरंत सभी यात्रियों को बाहर निकाल दिया। और फिर विमान को निकालने के लिए दूसरे विमान का उपयोग करने का फैसला किया।

लेकिन यह घटना वाराणसी में हुई इंडिगो फ्यूल लीक की घटना से बिल्कुल अलग नहीं है। तो क्या हमें इसकी जांच पर ध्यान देने की जरूरत है? और एयरपोर्ट पर सुरक्षा के मुद्दों को ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

मुझे लगता है कि इन सभी सवालों के जवाब देने के लिए अधिकारियों और एयरपोर्ट प्रबंधन को जवाबदेही लेनी चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा सके। 🚨💥
 
अरे ये तो एयर इंडिया की बारी है! पहले वाराणसी में फ्यूल लीक हुआ, अब जयपुर में... यहाँ कैसे साफ़-सफ़ाई होगी? 2 महीने पहले इंडिगो की घटना घटी, तो क्यों एयर इंडिया पर ऐसा होना पड़ा? और इस बार कितने यात्री थे? यह तो बहुत बड़ी खतरनाक स्थिति थी। और फिर दूसरे विमान में भेज दिया गया, इससे पहले कि उनकी जांच हो सके।
 
बिल्कुल सही किया गया दूसरा विमान निकाला ! तुरंत यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने और फिर उन्हें दूसरे विमान में भेजने की ज़रूरत थी। यह बहुत अच्छा दिख रहा है कि पायलट को यह सिग्नल मिल गया। और एयरपोर्ट पर टीम ने तुरंत टेकऑफ रोक लिया , अगर इतना समय लग गया तो यात्री घायल भी नहीं होंगे। अच्छा दिख रहा है कि इस बार सभी सुरक्षित आ गए और दूसरे विमान पर उड़ान भरने की ज़रूरत है।
 
😐 यह तो बहुत बड़ा मिशाल था, लेकिन चलो इसके बाद क्या हुआ। पहले तो एयरपोर्ट पर पूरा हालचल हो रहा था, लेकिन जब विमान से सभी यात्रियों को निकाल दिया गया तो शांति फिर आ गई।

जी हाँ, यह भी बिल्कुल सही है कि पायलट से सिग्नल मिला और विमान को दूसरे विमान में भेजने का निर्णय लिया गया। ऐसा ही कभी नहीं होता, लेकिन यही बात याद करें कि पायलटों को सुरक्षा का ख्याल रखना है।

आजकल तंत्रिका विशेषज्ञों ने भी बताया है कि फ्यूल लीकेज की समस्या बहुत बड़ी हो सकती है, इसलिए इसका ठीक से पता लगाना और उसका समाधान करना ज़रूरी है।

इस देश में हमेशा नई नई चीज़ होती रहती हैं, लेकिन एक बात सुनिश्चित है कि हमारी विमानन प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। 😊
 
मुझे एयरपोर्ट पर ऐसी घटनाएं देखने वाले होते हैं तो मेरा मन भ्रम का पूरा हो जाता है 🤯, लेकिन इस बार कुछ और सोच-समझकर समझ आया कि ये तो एयरलाइन द्वारा ली गई सुरक्षा उपायों का हिस्सा है। अगर ऐसा न होता, तो यह एक बड़ी समस्या होती। मुझे लगता है कि इन घटनाओं के पीछे कुछ जानकारी या रिपोर्ट मिले, फिर स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, जैसे कि विमान पर कितनी टन फ्यूल थी, और इसके लिए क्यों पायलट ने ऐसा किया।
 
ओहो ओहो, फ्यूल लीक होने वाला एयरक्राफ्ट तो ये कैसा है ? 😂 पहले तो सिग्नल मिल गया लेकिन फिर तो दूसरे विमान में भेजने की बात, लगता है कि पायलट्स को एक जंकबाउत मिलता है 🤣🚀 और ऐसे में यात्रियों को फिर से टर्मिनल में ले जाना... तो ये तो दिलचस्प तो है नहीं ? 😅
 
उदयभान 🌅, ये तो एयर इंडिया की दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। पायलट से सिग्नल मिला, लेकिन क्यों नहीं मिला। फ्यूल लीकेज की वजह से विमान टर्क में आ गया, और यात्रियों को अनिश्चित समय तक इंतजार करना पड़ा। यह घटना मैंने 2 महीने पहले वाराणसी में हुई इंडिगो की घटना से भी याद की। विमान की जांच करने के लिए हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।
 
अगर यही प्रकार से हर फ्लाइट होती, तो यात्रियों की जान जोखिम में न पड़ती। पायलट और ग्राउंड स्टाफ की टीम पर बहुत भरोसा करना चाहिए, लेकिन इस तरह की घटनाएं लगातार होने पर यह सवाल उठता है कि क्या हमारे विमानों में सुरक्षा की सुनवाई नहीं की जा रही।

दूसरी ओर, हवाई यातायात नियंत्रण में अच्छी सुविधाएं और तकनीकी समाधान होने चाहिए ताकि इन तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

मुझे एयरपोर्ट पर दूसरे विमान से यात्रियों को भेजने में 3 घंटे 40 मिनट की देरी न लगानी चाहिए, इससे पहले कि फ्यूल लीकेज का पता लगाया जाए।
 
यह तो बहुत बड़ी घबराहट थी, जैसे कि विमान उड़ाने के बाद भी हवा में फ्यूल लीक हो गया। पायलट से सिग्नल मिलना अच्छा लगा, और यात्रियों को दूसरे विमान में भेजना सही निर्णय था। 189 यात्रियों की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
 
मुझे एयरपोर्ट पर ऐसी घटना बहुत दुखद लगती है 🤕। एयर इंडिया की जयपुर-मुंबई उड़ान पर फ्यूल लीक होने से यात्रियों को बड़ी असुविधा हुई। मैं उम्मीद करता हूं कि एयरक्राफ्ट रनवे की ओर बढ़ रहा था, जब तकनीकी सिस्टम में खराबी का अलर्ट मिला।

शाम 7:55 बजे उड़ान भरने वाली फ्लाइट AI-622 पर 189 यात्री सवार थे, लेकिन उन्हें दूसरे विमान में भेजा गया। यह घटना इतनी देर तक चलती, तो किसी के घायल होने की सूचना नहीं हुई।

क्या हमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिक सावधानी बरतनी चाहिए? और एयरपोर्ट पर टेकऑफ रोकने के बाद, विमान से सभी यात्रियों को निकालना और उन्हें दूसरे विमान में भेजना एक अच्छा कदम है।
 
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