कुरान का हवाला देकर केरल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा भरण-पोषण

मुझे लगता है कि यह फैसला सिर्फ एक तरफ झुक जाएगा, चाहे वह तय कर दिया जाए कि तलाकशुदा महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी या नहीं। मैं सोचता हूँ कि यह फैसला पूरी तरह से बदल देगा। लेकिन फिर मुझे लगता है कि ये फैसला हमारी समाज को एक बेहतर बनाने की दिशा में निकलने वाला है।
 
मुझे तो यह फैसला बहुत अच्छा लगा, मैंने खुद भी अपनी पत्नी से अलग होकर अभी 2 साल पूरे किए हैं, और वहाँ तक मेरी पत्नी ने मुस्लिम महिलाओं (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अपने भरण-पोषण को नहीं मांग पाया, तो बस मजदूरी करकर जीवन बिताती रही। यह फैसला बहुत अच्छा है कि तलाकशुदा महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी, मैं तो अब अपनी पत्नी से अलग होकर भी उसके लिए पैसे जमा कर दूंगा, खैर यह एक अच्छा फैसला है और मुझे लगता है कि यह जस्टिस कौसर एदाप्पगाथ ने बहुत सही काम किया है।
 
सब से पहले, यह फैसला बहुत ही महत्वपूर्ण है, और इसे मुझे खुशी है कि केरल हाईकोर्ट ने एक दिन ऐसा घोषित कर दिया है। मैंने भी अपने पत्नी को तलाक कराने से पहले सोचा था कि हमारे बच्चों की शिक्षा और भविष्य की कैसे सुनिश्चित होगी, लेकिन अब ये जानकर मुझे खुशी हुई कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता मिलेगी। यह फैसला हमें यह बताता है कि न्याय और समानता का संदेश भारतीय समाज में पहुंच रहा है।
 
मुझे ये फैसला खुशी देगा 🙏, क्योंकि यह सोचते हुए बहुत महत्वपूर्ण है कि तलाकशुदा महिलाओं को भरण-पोषण की मांग करने की स्वतंत्रता निहित है। मुझे लगता है कि यह फैसला उन लadies के अधिकार को मानता है, जिन्हें अपने पति के बिना जीना पड़ता है। इससे उनकी आजीविका और भविष्य सुरक्षित होगा।
 
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