‘कोर्ट महिला को मां बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकती’…30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी पर SC का महत्वपूर्ण फैसला

हमेशा ऐसी मामलों में लड़की की जिंदगी पर विचार करना चाहिए, न कि लड़के की। लड़की को भी अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। अगर वह महसूस करती है कि उसने अपने बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार नहीं है, तो उसका यह फैसला समझना चाहिए। हमें लड़कियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर ध्यान रखना चाहिए 🙏
 
गर्भपात पर नियम अब थोड़े ही बदल गए, लेकिन अभी भी बहुत से सवाल बने हुए हैं। मुझे लगता है कि हमें और सावधानी से इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए। कुछ लोग कहते हैं कि गर्भपात एक विकल्प है, लेकिन दूसरों का कहना है कि यह एक अत्याचार है। मुझे लगता है कि हमें गर्भपात पर बोलने से पहले अपनी अपनी भावनाएं और सोच को समझना चाहिए।
 
गर्भपात में इतनी जटिलता तो क्यों है? पहले तो हमारे परिवार को सबसे ज्यादा जरूरत होती है अपने बच्चे को, फिर कौन कहता है कि महिला को जब तो वो जन्म देना चाहती है, उसे मजबूर करना? मैं समझती हूँ कि ऐसी परिस्थितियां होती हैं जहां महिला को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन जब तक यह संभव नहीं है, तब तक हमें अपनी मर्ज़ी से निर्णय लेने का अधिकार देना चाहिए। 🤔
 
नरसिंह निर्मल के इस मामले से लोगों की आंखें खुल गईं, यह तो जरूरी था कि न्यायालय स्पष्ट कहे कि किसी भी परिस्थिति में महिला को अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अब यह फैसला आया है कि अगर कोई लड़की गर्भवती है और उसका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य खतरा है, तो उसे विकल्प देने की अनुमति है। इस निर्णय से हमें यह जानने का मौका मिला है कि सरकार और न्यायपालिका हमारी महिलाओं के अधिकारों पर कितनी प्रयास कर रहे हैं। 🙌🏼
 
गर्भपात की बात करते हैं तो भारत में ऐसा बड़ा बदलाव नहीं आया है... खैर, फैसला अच्छा है, लेकिन प्रश्न अभी भी सवाल बना हुआ है। दुष्कर्म और गर्भपात की बात करते हैं तो हमारे समाज में अभी भी बहुत सारी समस्याएं हैं। नाबालिग गर्भवती होने पर उन्हें जीवन भर पैसा देना चाहिए या नहीं, यह सवाल अभी भी जवाब नहीं दिया गया है। और 24 सप्ताह तक गर्भपात करने की अनुमति देना, यह तो मुझे थोड़ा अजीब लगता है। क्या हमारे समाज में महिलाओं की जान सुरक्षित नहीं है? 🤔😬
 
क्या ये समाज में परिवर्तन लाने की सबसे बड़ी चुनौती क्या है? गर्भपात की बात करते समय, हमेशा यह सोचने की जरूरत है कि महिला का शरीर उसके बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम अपनी महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों पर ध्यान दें। पीड़ित, नाबालिग और विशेष श्रेणियों में गर्भपात करने की अनुमति 24 सप्ताह तक होनी चाहिए। हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि महिलाओं को उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा होने पर उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट अनुमति दे सकता है।
 
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