क्या इंडिगो ने जानबूझकर फ्लाइट संकट खड़ा किया: 5 महीने में नहीं किया पायलट्स का इंतजाम, सरकार बेबस क्यों हुई; 10 सवालों में पूरी कहानी

सवाल-1: मौजूदा फ्लाइट संकट की शुरुआत कैसे हुई?

जवाब: 2024 में पायलट यूनियन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें पायलटों को अधिक काम करने और थकान से फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा उठाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL नियमों में बदलाव किए।

सवाल-2: पिछले 3-4 दिनों में हालात बेकाबू कैसे हुए?

जवाब: पिछले 3-4 दिनों में, इंडिगो और अन्य एयरलाइन्स ने कई फ्लाइट्स रद्द कर दीं, जिससे यात्रियों की समस्या बढ़ गई। DGCA ने इस स्थिति को गंभीर बताया है और नए नियमों को लागू करने का फैसला किया है।

सवाल-3: अमेरिका और यूके में पायलट्स को कितना रेस्ट मिलता है?

जवाब: अमेरिका में, पायलट्स को हफ्ते में 32 घंटे और महीने में 100 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भरनी चाहिए। यूके में, एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में बदलाव किए हैं, लेकिन कुछ एयरलाइन्स ने पहले से ही पायलटों को अधिक काम करने के लिए मजबूर किया था।

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मुझे लगता है कि हमें फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा भी बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं और पायलटों की समस्याओं को हल्के में नहीं लेते हैं।

फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में बदलाव करने से पहले, हमें यह समझना चाहिए कि पायलटों को कितना आराम और थकान से राहत दिलाई जाए।

पायलट्स की समस्याओं को हल्के में नहीं लेते हुए, हमें यात्रियों की सुरक्षा को सबसे पहले महत्व देना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि हमारे पास विमान उड़ाने वालों के साथ सम्मान और समझ की कमी है। उन्हें इतनी मेहनत करनी पड़ती है तो उनके लिए जरूरी सुरक्षा उपाय भी नहीं किए जाते। देश के पास ऐसे लोग हैं जो 100 घंटे से अधिक उड़ान भर सकते हैं जबकि हमारे पास ऐसे लोग नहीं हैं जिन्हें सिर्फ 10 घंटे में थक जाना पड़ता है।
 
अरे, मैं तो पायलट्स के लिए बहुत ही खुश हूँ, उन्हें बेहद कम काम करने का मौका मिल गया है... 😂 कidding के दूर! फ्लाइट संकट बहुत गंभीर है और इस पर कोई भी तालमेल नहीं रख रहा, पायलट्स को बस थकान नहीं महसूस करनी चाहिए, उनका ख्याल रखना जरूरी है। DGCA के नए नियम बिल्कुल सही हैं, फ्लाइट सेफ्टी का ध्यान रखना जरूरी है... मैं उन्हें बहुत स्वीकार करता हूँ! 🙌
 
मेरे दोस्त, तुम्हें पता है कि जब भी पायलटों को अधिक काम करने की जरूरत होती है, तो सिस्टम में थोड़ा-थोड़ा टूटना लगता है। 2024 में पायलट यूनियन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिससे हमें उम्मीद थी कि सरकार तुरंत ध्यान देगी। लेकिन, जैसे ही समय गुजरा, हमने देखा कि पायलट्स को अधिक काम करने की जरूरत है, और DGCA ने फिर से FDTL नियमों में बदलाव किए। इस बार, मुझे लगता है कि सरकार को अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया में थोड़ा धैर्य रखना चाहिए।
 
ये तो बहुत बड़ी समस्या है लोगों को तयार होने की, हर दिन बढ़ती थकान, यात्रियों की परेशानी बढ़ रही है। मुझे लगता है कि सरकार और DGCA ने फ्लाइट सेफ्टी का ध्यान रखने के लिए अच्छे नियम बनाए हैं, लेकिन उनको और भी मजबूत बनाने की जरूरत है। अमेरिका और यूके में ऐसे नियमों को अपनाने से हमें भी सबक मिल रहा है कि कैसे पायलट्स को आराम देना चाहिए।
 
फ्लाइट संकट को देखते हुए, मुझे लगता है कि DGCA ने सही समय पर कार्रवाई की है। लेकिन अगर पायलट्स की समस्या को समझना चाहते हैं तो यह जानना जरूरी है कि पिछले 5 सालों में ये देश का सबसे बड़ा एयरलाइन बन गया है, और अब इसके लिए नौकरी करने वाले लोगों को 2, 3 साल तक उड़ना पड़ता है। यह जरूरी नहीं है कि पायलट्स को अधिक परेशानी हो।

अब जब DGCA ने नए नियम बनाए हैं तो फिर भी यह देखना चाहिए कि ये नियम वास्तव में कैसे लागू होंगे। क्या ये नियम पायलट्स के लिए मददगार होंगे या फिर यह एक तरह का राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा। मुझे लगता है कि DGCA को अपनी नई नीतियों पर और स्पष्टता दिखानी चाहिए ताकि पायलट्स और यात्रियों को यह समझ में आ सके।

फ्लाइट संकट ने हमें एक बात सोचने का मौका दिया है कि हमारी एयरलाइनिंग उद्योग कैसे आगे बढ़ सकती है। अगर हम इस उद्योग में निवेश करना चाहते हैं तो फिर हमें पायलट्स की समस्याओं को समझना होगा और उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढना होगा।

मुझे यकीन है कि अगर हम सही दिशा में काम करेंगे, तो हमारी एयरलाइनिंग उद्योग मजबूत और सुरक्षित बन सकती है।
 
यह तो क्रैश होने वाली एयरलाइन्स की बात है 🚨🛫️ पायलटों को आराम देने पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन इससे भी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर होनी चाहिए। सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और नए नियम बनाने की जरूरत है जिसमें पायलट्स के लिए आराम के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता मिले।
 
मैं समझता हूँ कि पायलट्स को बहुत अधिक काम करने की आवश्यकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे अपने आप को और अन्य यात्रियों को भी सुरक्षित रखें। फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा तो बहुत गंभीर है, इसलिए सरकार और एयरलाइन्स दोनों को इस पर ध्यान रखने की जरूरत है। 🚨
 
🤔 यह फ्लाइट संकट कितना बड़ा हुआ, आजकल लोग तो पायलटों की समस्या पर बात करते हैं जैसे कि उनकी जान जोखिम में है। 🚨 2024 में पायलट यूनियन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, और हाईकोर्ट के आदेश के बाद DGCA ने FDTL नियमों में बदलाव किए। 📊 2019 में भारत में पायलट्स को मास्क पहनने की अनिवार्यता लागू की गई थी। 🚫

📈 इंडिगो और अन्य एयरलाइन्स ने पिछले 3-4 दिनों में कई फ्लाइट्स रद्द कर दीं, जिससे यात्रियों की समस्या बढ़ गई। 🚨 DGCA ने इस स्थिति को गंभीर बताया है और नए नियमों को लागू करने का फैसला किया है। 📊

🗿️ अमेरिका में, पायलट्स को हफ्ते में 32 घंटे और महीने में 100 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भरनी चाहिए। यूके में, एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं करनी चाहिए। 📊

📝 इस मामले को देखकर लगता है कि भारत की एयरलाइन्स को अपने पायलट्स की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
 
यह फ्लाइट संकट सचमुच बहुत बड़ी समस्या है ... मुझे लगता है कि DGCA ने इसे गंभीरता से लिया चुका है। लेकिन, मेरी राय में इन पायलट्स को थोड़ा अधिक आराम देना चाहिए ताकि वे थकान से खुद को बचा सकें। अमेरिका और यूके जैसे देशों में उनका समय आराम करने का बहुत ही महत्वपूर्ण है ... हमारा भारत भी इसे ध्यान में रखना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि सरकार ने इस पायलट्स की समस्या पर ध्यान देने के बजाय, DGCA ने फ्लाइट सेफ्टी को बढ़ाने के लिए नए नियम बनाए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि ये नए नियम पायलट्स को अधिक परेशान करेंगे। क्योंकि अगर वे अपने समय सीमा को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें फिर से एक हफ्ते में बहुत कम उड़ान भरनी पड़ेंगी। इससे उनके जीवन पर भार पड़ सकता है।
 
भाई 🤔, यह पायलट्स के लिए बहुत बड़ी समस्या हो रही है! पहले तो हमारे देश में भी ऐसा नियम होना चाहिए कि पायलटों को पर्याप्त आराम मिले। लेकिन देखो यहां, हमारे एयरलाइन्स ने यात्रियों को जकड़कर सबकुछ करते हैं और फिर जब भी कोई समस्या arises, तो पायलट्स को आराम नहीं मिलता। 🤦‍♂️ DGCA से बोलकर कहें तो उन्हें अपने नियमों में बदलाव लाने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा लंबे समय से उठाया गया था, लेकिन अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। यह बहुत अजीब है कि DGCA ने पहले भी FDTL नियमों में बदलाव किया था, लेकिन अब फिर से इस पर ध्यान देने की जरूरत है। 🤔
 
पायलट्स को ना तो भागदौलत मिली और ना ही उनके खिलाफ बेहिसाब. देश में एक-दूसरे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं... 🤔

क्या 32 घंटे हफ्ते में सुनिश्चित करना आसान था, लेकिन हमने अपनी जिंदगी को फ्लाइट टीम्स के चारों ओर घेर लिया। अब पायलट्स की बात सुनते समय हमें खुद पर विचार करना होगा... 🛫
 
😒 यह तो पता है कि पायलट्स को अधिक आराम मिलने की जरूरत है, लेकिन फिर भी हमारे देश में उनके साथ ज्यादा संवेदना नहीं होती। डीजीसीए ने अपने आदेश के बाद भी बदलाव नहीं देखा, तो क्या पायलट्स अब 50 घंटे तक उड़ान भर सकते हैं? 🤦‍♂️
 
ਕੀ ਪायलटਾਂ ਦੇ ਰੈਸਟ ਹਿੱਸੇ ਦਾ ਆਲੋਚਨਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਹੀ ਰਹਿ ਜਾਏ? ਪਤਾ ਹੈ, ਯੂਕੇ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕਾ ਦੀਆਂ ਨੀਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਈਲਟਾਂ ਦੇ ਰੈਸਟ ਹਿੱਸੇ ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਮੌਕੇ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੇ ਹਨ, ਪਰ ਅੱਜ-ਕਲ੍ਹ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਫਲਾਈਟ ਡੱਟ ਇੰਨੀ ਗੁਜ਼ਰ ਜਾ ਰਹੀ ਹਨ, ਮੈਂ ਨਿਸਚਿੰਤ ਕਹੋਂਗਾ?
 
मुझे लगता है किDGCA ने पहले ही पायलट्स को पर्याप्त रेस्ट देना चाहिए था। वह इंडिगो और अन्य एयरलाइन्स की बुराई नहीं समझ रहे तो क्यों? मैंने बीते 3-4 दिनों में यात्रियों को जो परेशानी हुई, वो बहुत बड़ी थी।
 
😂 फ्लाइट संकट की शुरुआत हुई क्या! पायलट्स ने अधिक काम करने की मांग की, तो अब DGCA ने उन्हें आराम कराने के लिए नये नियम बनाए। 🤦‍♂️

लेकिन याद रखें, यात्रियों को भी थोड़ा आराम चाहिए, नहीं तो वे फ्लाइट संकट में बदल जाएंगे। 😅 जैसे एक पायलट ने कहा, "मैं उड़ सकता हूँ, लेकिन मेरी आंखें नहीं।" 👀

अमेरिका और यूके में पायलट्स को आराम देने की बात तो अलग है, भारत में उन्हें 12 घंटे से ज्यादा फ्लाइट ड्यूटी टाइम करना पड़ता है। यह तो एक बड़ा न्याय नहीं है, लेकिन जैसे पायलट्स कहते, "हमारी आंखें खराब हैं, लेकिन हमारी चाश्न काम कर रही है!" 😂
 
मेरा विचार है कि हमें पायलटों के लिए बेहतर नियम बनाने पर ध्यान देना चाहिए। ये नए नियम तो अच्छे हैं कि पायलट्स को कम थकान से उड़ने में सक्षम होने दिया जाए, लेकिन अभी भी कई सवाल बाकी हैं। क्या यह वास्तव में फ्लाइट सेफ्टी बढ़ाएगा या नहीं? इसके परिणाम और कैसे होंगे? हमें इन सवालों का जवाब देने की जरूरत है।
 
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