क्या इंडिगो ने सरकार को 'ब्लैकमेल' किया: 5 महीने पहले नियम बने, फिर हजारों फ्लाइट्स क्यों रद्द करनी पड़ी; 7 जरूरी सवालों के जवाब

भारतीय एयरलाइंस इंडिगो ने अपने फ्लाइट्स रद्द करने का मामला सामने लाया है, जिसके पीछे सरकार को ब्लैकमेल किया गया है। इस मामले में कई सवाल उठने लगे हैं, जिनके जवाब नीचे दिए गए हैं।

सवाल-1: पिछले दिनों ऐसा क्या हुआ कि देशभर में हजारों फ्लाइट्स थम गईं?

जवाबः -पायलट यूनियन ने जनवरी 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें पायलट के ज्यादा काम के घंटे और थकान से फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा उठाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL नियमों में बदलाव किए।

सवाल-2: इंडिगो सॉल्यूशन की बजाय लगातार बहाने क्यों बनाता रहा?

जवाबः -इंडिगो ने कई बार आधिकारिक बयान जारी करके फ्लाइट्स में देरी और रद्द होने की अलग-अलग वजहें बताईं, लेकिन साफ तौर पर यह नहीं कहा कि नए नियमों के तहत पायलट्स और क्रू को ज्यादा आराम देने के लिए उसके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं हैं।

सवाल-3: नए FDTL नियम क्या हैं?

जवाबः -FDTL नियमों के तहत:

पायलट दिन में 10 घंटे और दो पायलट क्रू-सेटअप होने पर 13 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकते।

रात में पायलट 8 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकता।

जरूरत पड़ने पर पायलट की ड्यूटी डेढ़ से 2 घंटे बढ़ाई जा सकती है लेकिन इसके बदले उन्हें जरूरी आराम देना होगा। एक घंटे तक के एक्सटेंशन में दोगुना और उससे ज्यादा में चार गुना आराम जरूरी होगा।

पायलट हफ्ते में 35 घंटे और महीने में 100-125 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकते। सालाना उड़ाना 1,000 घंटे से ज्यादा और ड्यूटी 1,800 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकती।

हफ्ते में पायलट को 36 घंटे के बजाय 48 घंटे का आराम जरूरी है। आराम का समय पिछली फ्लाइट से कम-से-कम दोगुना होना चाहिए। तीन पायलट क्रू-सेटअप होने पर भी पायलट 12 घंटे से ज्यादा की उड़ान नहीं भर सकते।

एक हफ्ते में पायलट 2 से ज्यादा नाइट लैंडिंग नहीं कर सकते।

सवाल-4: सरकार ने ये नियम क्यों बनाए और इन्हें लागू करना क्यों जरूरी था?

जवाबः -DGCA ने पायलटों की थकान से जुड़ी रिपोर्ट्स की समीक्षा करने के बाद ये नियम लागू किए हैं। पिछले 3-4 सालों में समय-समय पर कई पायलट्स एसोसिएशन ने DGCA को पत्र लिखकर इन नियमों को लागू करने की मांग की थी, ताकि पायलट्स को जरूरी आराम मिल सके।

दिल्ली हाई कोर्ट में 2019 से चली आ रही इन याचिकाओं के बाद DGCA ने ये नियम बनाए हैं। DGCA का कहना है कि पायलट्स की थकान बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। दुनियाभर की एयरलाइंस भी इसे एक बड़ा जोखिम मानती हैं। थकान की वजह से खराब परिस्थितियों में फैसला लेने और रात के वक्त प्लेन लैंड कराने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

सवाल-5: अमेरिका और यूके में पायलट्स को कितना रेस्ट मिलता है?

जवाबः -अमेरिका में पायलट हफ्ते में 32 घंटे और महीने में 100 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकते। उन्हें हफ्ते में एक बार लगातार 24 घंटे का आराम दिया जाता है। तीन पायलट क्रू-सेटअप होने पर भी पायलट 12 घंटे से ज्यादा की उड़ान नहीं भर सकते।

यूरोप में पायलट एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकते। कुछ खास परिस्थितियों में इसे 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है। दो फ्लाइंग ड्यूटी के बीच पायलट को 10-11 घंटों का आराम देना जरूरी है। पायलट को हफ्ते में एक बार 36 घंटे का आराम मिलता है।

सवाल-6: नए नियमों से सबसे ज्यादा इंडिगो ही क्यों प्रभावित हुआ?

जवाबः -नए नियमों से इंडिगो सबसे ज्यादा प्रभावित इसलिए है क्योंकि भारत के एयरलाइंस मार्केट में उसकी सबसे ज्यादा 60% हिस्सेदारी है। एयरलाइन दिन भर में लगभग 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट करती है।

सवाल-7: इस पूरे मामले में आगे क्या हो सकता है?

जवाबः -इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स ने कहा है कि इंडिगो की फ्लाइट्स रद्द होने और देरी से चलने के लिए हम सभी से माफी मांगते हैं। पूरा सिस्टम रिबूट हो रहा है। हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा। 10 से 15 दिसंबर तक हालात सामान्य हो सकेंगे।

DGCA ने भी एयलाइंस को नए नियमों से 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत दी है। पायलट्स को वीकली रेस्ट के बदले कोई भी छुट्टी नहीं देने के फैसले को भी वापस ले लिया है।
 
मुझे लगता है कि इंडिगो ने बहुत ही कठिन समय स्वीकार कर लिया है… 🤕😬 ज्यादातर पायलट्स की भावनाओं और आराम की जरूरतों को समझते हुए, सरकार ने नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियम बनाए हैं। इस मामले में भारतीय एयरलाइंस के प्रति सरकार की स्टैंड बहुत स्पष्ट है... 🚀
 
😐 इस मामले में लोगों की बात सुनने की जरूरत है और समझने की जरूरत है कि पायलट्स की थकान एक गंभीर समस्या है। DGCA ने नए नियम बनाए हैं जो पायलट्स के लिए आराम देने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेकिन कुछ लोग इस मामले में इंडिगो की ओर से भारी दोष देते हैं और उसकी बात नहीं सुनते। 😒
 
🤔 ये बहुत ही बड़ा मुद्दा है! पायलट्स की थकान से जुड़ी बातें हमेशा आ रही हैं, लेकिन अब सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं और नए नियमों को लागू करने की घोषणा की है। यह अच्छी तरह से नहीं लग रहा है क्योंकि कई एयरलाइंस जैसे इंडिगो अपनी फ्लाइट्स रद्द कर देंगी। इसके पीछे सरकार को ब्लैकमेल करने की वजह होनी चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए नियम सुरक्षित रहें और पायलट्स को पर्याप्त आराम मिले। इसके अलावा, हमें यह भी देखना होगा कि अमेरिका और यूके जैसे देशों में पायलट्स को रेस्ट मिलता है कि हमारे साथ उनका तुलना।
 
मुझे लगता है कि सरकार ने ये नियम बनाए ताकि पायलट्स को सुरक्षित और आरामदायक परिस्थितियाँ मिल सकें। लेकिन इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन्स को इन नए नियमों से सबसे ज्यादा प्रभावित महसूस होना चाहिए। यह नई रणनीति उन्हें आर्थिक भार से गुजरना पड़ेगा, लेकिन अगर वे इन नियमों का सम्मान करते हैं तो फिर उनकी उड़ान सुरक्षित और सफल हो सकती है।
 
भारतीय एयरलाइंस इंडिगो ने अपने फ्लाइट्स रद्द करने का मामला सामने लाया है, और यह तो जरूरी है कि सरकार के पीछे क्या खेल चल रहा है। यह तो बिल्कुल स्पष्ट है कि पायलट्स यूनियन ने फिर से अपनी आवाज उठाई है। लेकिन इंडिगो की ओर से क्या कहा जाए? कोई जवाब नहीं मिल रहा है...

अब तो पायलट्स को 10 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं करनी है, और थोड़ी आराम भी मिलेगी। लेकिन इंडिगो को यह राहत कब दी गई? और नए नियमों से कैसे बचने का प्रयास किया गया? यह तो एक बड़ा सवाल है...

और सबसे ज्यादा बात यह है कि DGCA ने इंडिगो को 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत दी है, लेकिन इसमें भी कुछ खास नहीं है। यह तो बस एक छोटी सी राहत है जो भी इंडिगो की पकड़ में है।

🤔
 
मुझे लगता है कि सरकार ने नए FDTL नियम बनाए ताकि पायलट्स को आराम मिल सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह एक अच्छा फैसला है, खासकर जब भारतीय एयरलाइन इंडिगो की बात आती है। लेकिन, इसमें कुछ समझौते करने पड़ गए हैं, जैसे कि पायलट्स को कम आराम मिल रहा है और उन्हें अपने फ्लाइट्स रद्द करने के लिए मजबूर किया गया है।

मुझे लगता है कि DGCA ने सही कदम उठाए हैं। पायलट्स की थकान एक गंभीर समस्या है और यह हमारे एयरलाइंस सिस्टम को खतरे में डाल सकती है। नए नियमों से हमें उम्मीद है कि पायलट्स को आराम मिलेगा और वे अपने फ्लाइट्स में सुरक्षित रूप से उड़ सकेंगे।
 
भारत में एयर ट्राफिक की सुरक्षा के बारे में नये नियम बनाना जरूरी था, ताकि पायलट्स को पर्याप्त आराम मिल सके। लेकिन ये बदलाव इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं।
 
मानिए अगर सरकार ने इससे पहले ये सभी सावालों का जवाब दिया होता, तो इंडिगो की समस्या कभी नहीं आई होती। अब भारतीय विमानन क्षेत्र में आगे कितना फायदा होगा?
 
अगर ये नियम स्वीकार करें तो पायलट्स की जिंदगी में कुछ अच्छा बदलेगा, पर फिर भी इंडिगो जैसे एयरलाइन ने अपनी दुर्दशा को दिखाने के लिए ही इन नियमों को लागू नहीं कर पाये। यह तय करना मुश्किल है कि नए नियम से पहले क्या बेहतर था।
 
अरे, मैंने पढ़ा कि बीते दिन इंडिगो ने 1000 से ज्यादा उड़ानों में थम गईं। इसमें बहुत सारे सवाल उठ रहे हैं। पहले, पायलट यूनियन ने सरकार को पत्र लिखकर अपने अधिकारों और आराम की मांग की। इसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पायलट्स को ज्यादा काम करने की अनुमति नहीं है।

अब इंडिगो सरकार को ब्लैकमेल कर रहा है और अपनी उड़ानों को रद्द कर रहा है। लेकिन सरकार ने कहा है कि यह सब पायलट्स की आराम सुनिश्चित करने के लिए है।

तो अब सवाल उठता है कि नए नियम क्यों बनाए गए और कैसे लगू हुए? DGCA ने कहा है कि पायलट्स की थकान बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। 🤦

यार, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है, लेकिन सरकार का कहना है कि नए नियम पायलट्स की सुरक्षा और आराम के लिए बनाए गए हैं। 🙏

लेकिन इंडिगो को भी अपने व्यवसाय को चलाने के लिए जरूरी है और सरकार को भी इसके लिए तैयार रहना होगा। यह एक जटिल मामला है, लेकिन मुझे लगता है कि सामान्य लोगों को यह नहीं समझना चाहिए, बस इतना पता लगाना चाहिए कि सरकार ने नए नियम बनाए हैं ताकि पायलट्स की सुरक्षा और आराम किया जा सके।
 
नए एयरलाइंस नियमों से बुरी तरह प्रभावित इंडिगो में रोजमर्रा की चीजों को कैसे बदल रहे हैं -

मेरी राय में यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है कि हमारे देश की सबसे व्यस्त एयरलाइंस इंडिगो ने अब दिनभर सामान्य फ्लाइट्स चलाने के लिए पायलटों को अधिक आराम देने के नियम बनाए हैं।

कई सवाल उठ रहे हैं कि इन नए नियमों से कैसे हमारी एयरलाइंस दुनिया भर में अपने गंतव्य तक पहुंच पाई। पहले भारतीय उड़ान यातायात पर बाधाएं लग जाएगी, तो फिर विशेष परिस्थिति के अनुसार और सुरक्षित रूप से यात्रा हो सकती है या नहीं?

उदाहरण के लिए अगर इंडिगो ने अपनी 500 उड़ानों में से एक बंद कर दी, तो इस पर्याप्त जगह कहाँ से मिलेगी। भारतीय हवाई अड्डों पर भी प्राथमिकता होगी कि एयरलाइन्स वाली यात्रियों को पहले बैठने का अवसर दिया जाए, ताकि हमारा देश के लिए यात्रा करने वाली और वापस आने वाली व्यक्तियों को सुविधा मिले।

क्या सरकार ने ये सब सोचकर नए नियम बनाने का फैसला किया है? या यह पूरी तरह से इंडिगो पर बैठाया गया दमनकारी मामला है?
 
भारतीय एयरलाइंस इंडिगो ने अपने फ्लाइट्स रद्द करने का मामला सामने लाया है, जिसके पीछे सरकार को ब्लैकमेल किया गया है। लेकिन अगर आप सच्चाई की नजर से देखें तो यह सभी कुछ किसी भी एयरलाइन के लिए ही मुश्किल था। इंडिगो जैसी एयरलाइन्स के लिए नए नियमों में सबसे ज्यादा परेशानी होने वाली बात है कि पायलट्स को आराम मिलता है।

कुछ लोग कहते हैं कि नए नियमों से इंडिगो पर्याप्त रेस्ट नहीं देती, लेकिन अगर आप इसे दूसरे पक्ष से देखें तो यह कह सकते हैं कि इंडिगो पायलट्स को बहुत कम आराम देता है।
कुछ लोग ये कहते हैं कि नए नियमों से आम एयरलाइन्स प्रभावित नहीं होती, लेकिन अगर आप यहाँ तौर-तरीके की बात करें तो यह कह सकते हैं कि इंडिगो और उसकी तरह की बड़ी एयरलाइंस नए नियमों से सबसे ज्यादा प्रभावित होती।
 
🌞 बिल्कुल! मुझे लगता है कि नए नियमों से इंडिगो सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, क्योंकि यह देशभर में सबसे बड़ी एयरलाइन है। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि यह अच्छी बात है, क्योंकि इससे पायलट्स को ज्यादा आराम मिलेगा और उनकी सुरक्षा भी बढ़ेगी। 🚀
 
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