क्या इंडिगो ने सरकार को 'ब्लैकमेल' किया: 5 महीने पहले नियम बने, फिर हजारों फ्लाइट्स क्यों रद्द करनी पड़ी; 7 जरूरी सवालों के जवाब

क्या इंडिगो ने सरकार को 'ब्लैकमेल' किया: 5 महीने पहले नियम बने, फिर हजारों फ्लाइट्स क्यों रद्द करनी पड़ी; 7 जरूरी सवालों के जवाब

सवाल-1: पिछले दिनों ऐसा क्या हुआ कि देशभर में हजारों फ्लाइट्स थम गईं?

जवाबः पायलट यूनियन ने जनवरी 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें पायलट के ज्यादा काम के घंटे और थकान से फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा उठाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL नियमों में बदलाव किए।
 
દુર્બલ પાયલટોની કૂદવણી! 🤣 જેઓ 9 ઘણા ગિહાના લગભગ 12 માસ સુધી અંદર પડવાને કારણે ફ્લाइटો ટર્ન-बैक કરવી પડી! 🚫✈️
 
मैंने देखा कि इंडिगो ने सरकार को 'ब्लैकमेल' नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपने पायलटों की परेशानी को सामने लाया। जानते हैं क्या? अगर पायलट्स बेहतर काम करने के लिए मजबूर होने से बचते हैं, तो फ्लाइट सेफ्टी खतरे में पड़ जाती। डीजीसीए ने FDTL नियमों में बदलाव कर दिया, जिससे पायलट्स को थकान से लड़ने का मौका मिला। यह अच्छा है कि हमारी सरकार ने ऐसे मामलों में मदद करने का फैसला किया।
 
भाई, यह तो पायलट्स का भारी दाम्पति है! 5 महीने पहले नियम बने, फिर इतनी तेजी से रद्द कर दिया जाना? क्या यह मेरा समय ले गया? 😂 कोई जरूरी सवाल नहीं है, बस पायलट्स को थकान से लड़ना पड़ता है... और सरकार तो बैठकर रोकती है! 🙄

क्या हमें यह सोचना चाहिए कि कितने पायलट्स हैं जो अपने शिक्षकों से कोई मूल्य नहीं लेते? ना तो सरकार तय करेगी, ना तो हम तैयार होंगे। इस तरह तो देशभर में क्रैश होने वाली फ्लाइट्स की बात ना करें, ये कानून लगने के ही 7-8 दिन बाद ही कमजोर पड़ गया। 😬
 
मुझे लग रहा है कि इंडिगो और पायलट यूनियन के बीच कुछ गलत खेला गया है। 5 महीने पहले यह नियम बन गया था, लेकिन फिर इतनी तेजी से बदल दिया गया कि अब फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियम में बहुत बड़ा बदलाव आया है। पिछले दिनों हजारों फ्लाइट्स थम गईं, यह तो बिल्कुल सही नहीं लग रहा है... 🤔

क्या हमारे विमान चालक इस तरह के नियमों के अधीन आ गए? और सरकार को इतनी जल्दी बदलने में मुश्किल नहीं आई? मुझे लगता है कि कुछ गलत है, लेकिन इसका साबित करना मुश्किल लग रहा है। 🚀
 
मैंने देखा है कि इंडिगो ने सरकार से ऐसा 'ब्लैकमेल' किया है, लेकिन क्या यह पूरी सच्चाई है? 5 महीने पहले FDTL नियम बन गया, फिर भी इतनी सारी फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी। मुझे लगता है कि पायलट यूनियन को अपना अधिकार दिलाने के लिए यह एक अच्छा तरीका था, लेकिन इसे धीमे कदमों से सुनना चाहिए था। अगर सरकार ने पहले ही इस मुद्दे पर ध्यान दिया होता, तो इतनी सारी फ्लाइट्स रद्द करने की जरूरत नहीं पड़ पाती। 😐
 
नहीं तो यह जानकर दिल हुआ! पिछले 5 महीनों से इंडिगो का NCLT में भारी मुद्दा चल रहा था, और अब पता चलता है कि DGCA ने फिर से बदलाव किए। तो अगर सरकार को 'ब्लैकमेल' करना है, तो इससे पहले नहीं किया जाता। क्या यह एक बड़ा मुद्दा है? और पायलट यूनियन की बात में सच्चाई है?
 
बोलते हैं कि इंडिगो ने सरकार को 'ब्लैकमेल' करने की बात मुझे खास तौर पर पसंद नहीं लगी। यानी, पिछले दिनों देशभर में हजारों फ्लाइट्स थम गईं, लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि इंडिगो ने सरकार को ब्लैकमेल किया। तो सवाल यह है कि सरकार और डीजीसीए ने क्या गलती कर दी? यानी, पायलट यूनियन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और सरकार ने इसके बाद फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों में बदलाव किए। तो यह समझना ज़रूरी है कि इस मुद्दे पर क्या समझौता किया गया।
 
कोई दिन भी नहीं लगता कि हमारे पास इतनी सारी फ्लाइट्स हैं? और अब देखो, सभी जमीन पर ही खड़े हो गए! मुझे लगने लगा कि इंडिगो ने सरकार को बिल्कुल भी समझा नहीं... 5 महीने पहले यह नियम बन गया, फिर इतनी जल्दी पायलटों को शिक्षित करने की जरूरत? और फ्लाइट्स क्यों रद्द करनी पड़ी, यह तो पूरी तरह से समझ में नहीं आता...

लेकिन लगता है सरकार को सब कुछ पता है, इसलिए सब कुछ ठीक ही चल रहा है... और हमारे पास इतनी सारी फ्लाइट्स हैं, यह तो सबके लिए अच्छा ही होगा...
 
मुझे लगता है कि इंडिगो ने सरकार को थोड़ा सी धमकी देने की कोशिश की... 5 महीने पहले नियम बन गए, लेकिन फिर इतना बड़ा विवाद क्यों हुआ? 🤔 और फ्लाइट्स रद्द करने से लोगों को कहाँ तक लाभ हुआ? 😏 पायलट यूनियन ने हाईकोर्ट में एक अच्छी बात कही, लेकिन क्या सरकार ने उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की? 😕
 
मेरा विचार है कि इंडिगो जैसी एयरलाइन्स ने सरकार पर दबाव डाल दिया है। 5 महीने पहले इन नियम बन गए थे, लेकिन फिर भी इतनी सारी फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी। यह तो दर्शाता है कि पायलट यूनियन की मांगें सरकार पर बहुत बुलंद हैं। सरकार को अपने नियमों को बदलने और पायलटों की चिंताओं को ध्यान में रखने की जरूरत है। अगर नहीं तो यह नियम केवल लिखित ही रहेंगे।
 
वाह! सरकार से इंडिगो का दोस्त बनने की कोशिश कर रही है। पहले तो उन्होंने पायलट्स को फायदा करने के लिए नियम बनाया, फिर 5 महीने बाद फ्लाइट्स थमाने का मौका दिया। 🤔 मुझे लगता है कि DGCA की बात समझ नहीं पाई। पायलट्स को ज्यादा काम करने की अनुमति देने की नीयत तो ठीक है, लेकिन फ्लाइट सेफ्टी पर ध्यान देना भी जरूरी है। सरकार को यह पता चलना चाहिए कि अगर पायलट्स थक जाते हैं तो फ्लाइट्स खतरे में पड़ सकती हैं। 😕
 
मुझे लगता है कि इंडिगो की जीत तो बढ़हाल है, लेकिन सरकार की गतिविधियों पर रुकना जरूरी नहीं है। अगर पायलट यूनियन ने जरूरत से पहले याचिका दायर की, तो फिर सरकार को यह समझने में लगाना चाहिए कि उनके नियमों के बदलाव से कितनी बड़ी समस्या उत्पन्न होती है। 🤔

मैं समझता हूँ कि पायलट के ज्यादा काम के घंटे और थकान एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन अगर इससे पहले सरकार ने इस पर सोचा, तो आज की स्थिति नहीं आ गई। सो अब फिर से पायलट यूनियन को अपने अधिकारों के बारे में सोचना होगा। और इंडिगो भी अपने नियमों को फिर से बदलना होगा, जिससे सभी पक्षों को समझ में आ सके। 🚨
 
मैंने देखा है कि इंडिगो जैसे एयरलाइन्स के साथ सरकार का रिश्ता कुछ ऐसा है जिस पर भलीभांति ध्यान नहीं दिया गया। 5 महीने पहले नियम बन गया था, लेकिन फिर इतनी जल्दी हजारों फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा। यह तो साफ है कि नियमों में बदलाव करने के बाद, पायलट यूनियन ने ज्यादा काम किए घंटे और थकान से फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा उठाया। 🤔

अब सवाल है कि क्या सरकार ने इससे पहले इंडिगो के पायलटों से बात की थी या नहीं। और क्या DGCA ने सही तरीके से नियमों में बदलाव किए? 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि इंडिगो की इस गड़बड़ में देशभर में पायलट की परिस्थितियाँ कितनी खराब थीं, यह तो हमें पता चल गया। लेकिन फिर भी, सरकार ने इतना समय लेने का क्या कारण था? जैसे ही नियम बने, डीजीसीए ने तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि बहुत से ऐसे लोग तो अब फ्लाइट्स को रद्द करने वाली परिस्थितियाँ भी नहीं देख रहे। पायलट यूनियन ने बिल्कुल सही कहा था, फ्लाइट सेफ्टी बहुत जरूरी है, लेकिन सरकार की गति तो कितनी धीमी थी। मुझे लगता है कि अगर हम अपने पायलटों की मदद करना चाहते हैं, तो उन्हें सही स्थितियाँ देनी चाहिए, न कि फिर भी डराना-धमकाना।
 
नहीं, यह तो सरकार को 'ब्लैकमेल' करने का बहुत ही गंभीर आरोप लगा रहा है... 5 महीने पहले ये नियम बने, फिर जब पायलट संघ ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, तो DGCA ने तुरंत इसे लागू कर दिया। और इसका मतलब क्या? जिससे अब पायलटों के पास फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL में बहुत कम समय बचता है, तो फिर सारी परिस्थितियाँ बदल गई। अगर हम तुरंत 5 महीने पहले से इस नियम को लागू कर दें, तो यह कैसा निकला? सभी पायलटों के लिए ज्यादा काम करने के घंटे और थकान से फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा नहीं उठता।
 
पहली बार सोचता हूँ कि सरकार ने इंडिगो को ब्लैकमेल करने की जगह सिर्फ 5 महीने पहले ही रेगुलेशन बनाना चाहिए था, लेकिन शायद मालिकों को पता नहीं था कि कितनी परेशानियाँ यह नियम लेकर लाएंगे।

अब पायलट संघ ने अपनी ओर से याचिका दायर की है ताकि वे फ्लाइट पर मौसम बदलने और अन्य बातों के बारे में पता कर सकें, इससे पहले कि वह खतरनाक हवाई यात्रा करें। और सबसे ज्यादा सवाल यह है कि सरकार ने इंडिगो पर रोक लगाने से पहले क्या किया था, अब अगर उन्हें रेगुलेशन में बदलाव करने की जरूरत तो कैसे करेंगे? 🤔
 
मुझे लगा कि सरकार ने इंडिगो पर बहुत तेजी से दबाव डाला, पायलट्स के काम को खत्म करके ब्लैकमेल कर रहा है! 🚫😠 फ्लाइट सेफ्टी का मुद्दा उठाने वाले पायलट्स की बात मान लें तो FDTL नियमों में बदलाव करना एक अच्छा कदम था, लेकिन इसे इतनी जल्दी और तेजी से शुरू किया जाना चाहिए था। 🤔 मुझे लगता है कि सरकार पर पायलट्स के मुद्दों को ध्यान में रखने की जिम्मेदारी है, फिर भी ये देखकर आश्चर्यक नहीं हैं कि इतनी बड़ी कंपनी पर दबाव पड़ गया। 😊
 
अरे, देखो, 5 महीने पहले नियम बन गया था और फिर भी इंडिगो जैसे बड़े ऑपरेटर ने इतनी बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द कर दीं? यह तो बिल्कुल 'ब्लैकमेल' की तरह लग रहा है! DGCA के आदेश के बाद भी, इंडिगो ने इतनी धीमी गति से अपने नियमों में बदलाव लाने में देरी कर रही है। और अब पायलट यूनियन ने इस पर फिर से अदालत में जाना पड़ा? यह तो पूरी तरह से अव्यवस्थित दिख रहा है! 🤦‍♂️
 
मुझे लगता है कि सरकार वाले तो थोड़ा चिंतित लग रहे हैं... 5 महीने पहले ये नियम बन गया और फिर सuddenly देशभर में हजारों फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं। क्या पायलटों की समस्या भूल गए? 🤔

कोई तो ऐसा नहीं है कि पायलटों के ज्यादा काम करने से फ्लाइट सेफ्टी खतरे में पड़ जाए। सरकार वाले तो हमेशा लोगों को सुरक्षित रखने की बात करेंगे, लेकिन कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि वे लोगों की जरूरतों को समझने में असफल रहते हैं।

मुझे लगता है कि सरकार को पायलटों की समस्या को हल करने के लिए थोड़ा और समय चाहिए। 🕰️

क्या हमें पायलटों की बात सुननी चाहिए? 🤝
 
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