नहीं तो भारतीय विमानन सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा? सरकार ने 5 महीने पहले इस नियम को लागू किया, फिर इतनी जल्दी बदलाव करने क्यों किया? पायलट यूनियन ने बिल्कुल सही कहा है कि पायलट के ज्यादा काम के घंटे और थकान से फ्लाइट सेफ्टी पर असर पड़ता है। लेकिन अब DGCA ने फिर से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी FDTL में बदलाव किया, तो यह सरकार की दूरदर्शिता का सवाल उठाता है या बस एक नया मुद्दा बना रहेगा?