क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था: स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस 'अप्रत्याशित घटना' का संकेत दिया

संसद में हंगामा बढ़ता तो सिक्योरिटी प्रोसिजर और प्रोटोकॉल तुरंत एक्टिव हो जाते हैं। सदन की कार्यवाही रोक दी जाती है और सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई जाती है। अगर कोई बाहरी व्यक्ति हंगामा करता है, तो उसे तुरंत हिरासत में लेकर संसद पुलिस स्टेशन को सौंप दिया जाता है।
 
क्या चिंता की बात नहीं है कि हमारे नेताओं को इतना संकट में रहना पड़ता है? 🤔 जब लोकतंत्र की शान पर इतना ध्यान केन्द्रित होता है, तो देश के वास्तविक समस्याओं पर भी ध्यान नहीं दिया जाता। संसद में हंगामा बढ़ने पर पुलिस और सरकार खेलती है, लेकिन आम आदमी की समस्याएं बुरी तरह से छुपी रहती हैं। 🤷‍♂️
 
ज्यादा हंगामा न होना चाहिए, पर सुरक्षा की बात करने वालों की तो भी बहुत सावधानी बरतनी चाहिए 🤔। अगर सचमुच कोई बाहरी व्यक्ति हंगामा करता है, तो पहले उन्हें समझाना चाहिए कि उनके क्या बारे में है और फिर हिरासत लेने की बात करें, न कि सीधे उसे पुलिस स्टेशन पर डाल देना। तो लोगों की जिंदगी तो ठीक है, लेकिन सुरक्षा के खिलाफ उनकी जिंदगी तो खतरनाक हो जाती है। 🚔
 
अरे, यह तो सांसदों की बेहद सुरक्षा की बात कर रही है! 😅 लेकिन मुझे लगता है कि संसद में हंगामा बढ़ गया है, तो फिर भी सब कुछ ठीक से नहीं चल पायेगा। अगर कोई व्यक्ति हंगामा करता है, तो उसे पकड़ने और एक्टिव रिसेप्शन कराने में समय लग जाएगा, इसी दौरान कई चीजें गलत हो सकती हैं। सरकार को सुरक्षा बढ़ाने और सांसदों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत अच्छी योजना बनाई जानी चाहिए। तो फिर संसद में हंगामा बढ़ने पर, पुलिस तुरंत व्यवस्था कर देती है, लेकिन इससे पहले कि सब कुछ ठीक हो जाए, कई गलतफहमियाँ और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
 
😊 सरकार तो हमेशा सुरक्षा की बात कर रही है लेकिन यह सोचकर नहीं कि सच्चे सिक्योरिटी प्रोसिजर कौन हैं? कुछ लोगों के द्वारा बढ़ता हंगामा तो मुझे लगता है कि वास्तव में लोकतंत्र के नियमों और परंपराओं का उल्लंघन है। 🤔

जब सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई जाती है, तो यह संदेह करने लायक है कि सरकार द्वारा क्या सोचा जा रहा है? क्या यह वास्तव में हमारी संविधान की रक्षा करने की कोशिश है? 🤷‍♀️

अगर कोई बाहरी व्यक्ति हंगामा करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपनी स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर विचलित होना चाहिए। 🙅‍♂️ हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी तरक्की और विकास में सुरक्षा शामिल हो। 💪
 
मुझे लगता है कि सरकार की पकड़ में आने पर सभी की आवाज़ दबाई जाती है, लेकिन यहां तक कि संसद में भी। अगर एक व्यक्ति हंगामा करता है, तो पुलिस तुरंत उसे गिरफ़्तार कर लेती है। लेकिन जब कोई सांसद हंगामा करता है तो यह एक अलग कहानी है। मुझे लगता है कि सरकार को अपने देश की निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए, न कि अपनी शक्ति को बढ़ाने के।
 
अगर कोई ऐसा ही हंगामा कर रहा है तो शायद यह बेहोश हो गया होगा। क्योंकि अगर न तो हिरासत में लेकर संसद पुलिस स्टेशन जायेंगे और न ही उनको पास ही अस्पताल भेज दिया जाएगा। फिर यह सब हंगामा क्यों कर रहा है? शायद हमें पता लगाना चाहिए कि कोई ऐसी समस्या से जूझ रहा है या कुछ और।
 
संसद में हंगामा बढ़ता है तो यही तो सरकार के प्रोसिजर वाली पोल पर गिरने की भावना ही होगी। सुरक्षा का खेल तो सब जानते हैं, जब संसद में कुछ गलत होता है, तो उन्हीं से सुरक्षा चिंता करनी पड़ती है। लेकिन यह बात जरूरी नहीं कि हमारी संसद में हर हंगामे को गंभीरता से लेना पड़े। शांतिपूर्ण तरीकों से व्यक्त करने का अधिकार भी हमारा है। लेकिन अगर कोई बाहरी व्यक्ति हंगामा करता है, तो फिर यह तो सुरक्षा प्रोसिजर्स के लिए एक अच्छा मौका होगा। लेकिन हमें अपने नेताओं और देश की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करने से पहले शांतिपूर्ण तरीकों से व्यक्त करने का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। 🤔
 
📰 संसद में हंगामा बढ़ते नजदीकी और दूरी की सुरक्षा, बंदूकों का उपयोग कर सकते हैं 🗡️। अगर सांसद अपने घरों में रहते हैं, तो घरों की बाहरी सतह पर सीसीटीवी लगाना चाहिए, और बाहरी द्वारों पर पुलिस अधिकारियों की निगरानी करनी चाहिए। 📺
 
नरसिंह राव के फांसी की सजा की बात आती है तो मेरे मन में एक सवाल उठता है, अगर हमारे पास ऐसे सुरक्षित और सुचारू तरीके हैं जिससे यह सजा दिलाई जा सके, तो फांसी की जरूरत क्यों नहीं? 🤔 कुछ लोग कहेंगे कि यह राजनीतिक रूप से मायने रखती है, लेकिन अगर हम सच्चाई की बात करें, तो यह सजा हमारे समाज के लिए बहुत हानिकारक हो सकती है। इसके अलावा, पुलिस और सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षा उपाय तो जरूरी हैं, लेकिन फांसी की सजा के लिए तैयार होने की जरूरत नहीं है, हमें ऐसे समाधान ढूंढने की जरूरत है जिससे देश में शांति और स्थिरता बनी रहे।
 
क्या हुआ? संसद में हंगामा बढ़ गया है! यह तो बहुत बड़ा चिंताजनक है। मुझे लगता है कि सुरक्षा प्रोसिजर और प्रोटोकॉल को तुरंत एक्टिव करना चाहिए। सदन की कार्यवाही रोक देना और सांसदों की सुरक्षा बढ़ाना जरूरी है। अगर कोई बाहरी व्यक्ति हंगामा करता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लेना चाहिए। लेकिन फिर भी इस तरह के हंगामों को रोकने के लिए हमें सोच-समझकर काम करना चाहिए। क्या हमें ऐसी स्थिति में निडर रहना चाहिए?
 
🚨 इस हंगामे की वजह से खेद है लेकिन तो सदन में क्या काम होना चाहिए? अगर कोई व्यक्ति ऐसी बातें कर रहा है जिससे शांति बनाए रखने में परेशानी होती है, तो वह जरूर रोका जाना चाहिए। लेकिन अगर वह सिर्फ अपनी धुन दिखाने की कोशिश कर रहा है, तो ऐसा करने वाले को समझना चाहिए कि हमारी सदन में कौन-कौन से नियम हैं और हमें उनका पालन करना चाहिए। 🤔
 
🤔 यह तो बहुत ही अच्छा नियम है लेकिन अगर सचमुच कुछ गलत होता है, तो सबकुछ तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। सुरक्षा प्रोसिजर को तो हमेशा खतरे की आंच में रखा जाता है। और अगर कोई सांसद वाकई भयावह स्थिति में डूबता है, तो उसकी सुरक्षा बढ़ाने के लिए बहुत पैसा खर्च किया जाएगा। और अगर बाहरी व्यक्ति हंगामा करता है, तो वह तुरंत गिरफ्तार कर दिया जाएगा, लेकिन पता नहीं है क्या उसे फिर से बाहर निकाला जाएगा या कहीं और छुपा दिया जाएगा। यह सब बहुत ही राजनीतिक हो सकता है। 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि यह सब बहुत ही असुविधाजनक है 🤯। संसद में ऐसा हंगामा होना एक बार फिर से घटित हुआ है, और इसके लिए सुरक्षा प्रोसीजर और प्रोटोकॉल तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि इससे पर्याप्त नहीं होगा, अगर संसद की कार्यवाही रोक दी जाती है, तो यह कार्यक्रम की पूर्णता को कम कर देती है। और अगर बाहरी व्यक्ति हंगामा करते हैं, तो उन्हें पकड़कर संसद पुलिस स्टेशन में रखा जाना चाहिए, लेकिन इससे पहले कि ऐसा हो उनकी परेशानियों को समझने की जरूरत है। 🤔
 
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