Karnataka: बंगलूरू मेट्रो किराया बढ़ोतरी पर रोक; शिवकुमार बोले- फैसला राज्य सरकार का, केंद्र की भूमिका नहीं

कर्नाटक में बंगलूरू मेट्रो के किराए को लेकर सियासी और प्रशासनिक टकराव तेज होता जा रहा है। कर्नाटक विधान सौधा में प्रेस वार्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि बंगलूरू मेट्रो के किराए में प्रस्तावित बढ़ोतरी को रोकने का फैसला राज्य सरकार ने खुद लिया है, इसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा है कि केंद्र का इस मामले में न तो कोई अधिकार है और न ही दखल देने का कानूनी आधार।
 
बिल्कुल सही 🙌, बंगलूरू मेट्रो किराए बढ़ाने की बात बहुत ही गंभीर है। मैं सोचता हूँ कि प्रशासनिक और सियासी दबाव इतना ज्यादा है कि सामान्य लोगों पर इसका असर पड़ रहा है, आमतौर पर ये ऐसी समस्याएं हल्की-फुल्की होती रहती हैं और सरकारें इस तरह की मुद्दों को आसानी से निपटा सकती हैं, लेकिन कुछ बार ऐसा लगता है कि वे प्रशासनिक खिलाफत या राजनीतिक दबावों पर ज्यादा ध्यान देती हैं।
 
बंगालूरू मेट्रो किराए बढ़ाने से लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, मैं समझ नहीं पाऊं कि सरकार ने इतनी बुरी दिमाग से काम किया? अगर भारतीय लोगों को अपना भविष्य सुरक्षित तो कहें तो किराए बढ़ाने से पहले जरूर सोच-विचार कर लेना चाहिए, यह तो सरकार की जिम्मेदारी है।
 
बात बात कर लीजिए, ये सिर्फ एक सामान्य ब्लॉकेज है, जैसे बंगलूरू मेट्रो के किराए बढ़ने पर राज्य सरकार ने फैसला लिया है और केंद्र की भूमिका तो बस चपलसी है। लोगों को पैसे देने के बाद भी अब कोई मेट्रो सेवाएं नहीं देगी, यह अच्छा लगना तो नहीं?
 
मेट्रो किराए में बढ़ोतरी की बात तो हो हो हो लगती है, लेकिन कर्नाटक सरकार द्वारा रुकवाने की बात सुनकर अच्छी लगी। बंगलूरू मेट्रो जैसे पर्यटन स्थलों में किराए बढ़ाने से नौकरियां खत्म होने का डर था, तो अब यह रुक गया। लेकिन सरकार द्वारा इस मामले में केंद्र की भूमिका पर प्रतिबंध लगाने से अच्छी बात होगी, क्योंकि इससे ऐसी स्थितियां नहीं बनती।
 
मेट्रो किराए में बढ़ोतरी को रोकने का फैसला राज्य सरकार ने खुद लिया, अर्थात् अब बंगलूरू मेट्रो में रहने वालों को सोच-समझकर अपने जीवन की योजना बनानी होगी, क्या यह नई दुनिया तैयार है? 🤣
 
बंगलूरू मेट्रो के किराए को लेकर सियासत करना पुरानी चीज़ है, खैर तो डीके शिवकुमार जी ने अच्छी बात कही, अब यह मामला राज्य सरकार के हाथों में आ गया, फिर केंद्र सरकार को कोई संभावना नहीं है। लेकिन दोस्तों, हमें लगता है कि यह एक अच्छा मौका है, अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग बढ़ सकती है, फिर से बंगलूरू मेट्रो पर ध्यान दिया जा सकता है और वहाँ की यातायात समस्याओं को हल किया जा सकता है।
 
बंगलूरू मेट्रो किराए बढ़ाने का मुद्दा, हमेशा से ज्यादा चर्चा होता रहता है। लेकिन जब तक सरकार और प्रशासन दोनों एक-दूसरे की बात नहीं सुनते, तो इस मुद्दे पर कोई हल नहीं निकल पाया। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का यह फैसला, अच्छा है लेकिन इसके पीछे की गहराई देखना जरूरी है। क्या यह राज्य सरकार का आखिरी विकल्प था या कुछ और भी चुपचाप चल रहा था?
 
बंगलूरू मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी की बात सुनकर मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा है। लोगों को पैसा देने के लिए मजबूर करने वाली जोरदार दरें बनाना ताकि सरकार अपनी राजस्व कमाई कर सके, इससे आम आदमी पर बोझ पड़ रहा है 🤑। मुझे लगता है कि यह बढ़ोतरी रोकने के लिए पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होनी चाहिए, नहीं तो इससे केंद्र सरकार भी अपनी सुनसान कहीं ले जा सकती है 🤔
 
बंगालूरू मेट्रो के किराए बढ़ाने के बारे में पुरा सियासी खेल खेलते हुए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार खुद ही इस पर फैसला लेगी। तो चलिए देखें, क्यों ना? पूरा मामला बड़ा है। मेट्रो किराए बढ़ाने से पहले भी कई जांचें होनी चाहिए। कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि यह बढ़ोतरी सार्वजनिक को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
 
मेट्रो किराए में बढ़ोतरी तो सोचो, बंगलूरू में लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होनी चाहिए, सरकार की तो पार्टी के हित में ऐसा ही कर रही है
 
बस बात कर रहे हैं किराए में बढ़ोतरी, जैसे कहीं चलने का फैसला ले लो 🚂, खुद से नहीं। यह तो प्रशासनिक दफ्तरों में ज्यादा शोर-शराबू होती है, पर अंत में कुछ अच्छा निकलता है या नहीं? 😐 अगर बढ़ोतरी हुई तो फिर भी लोगों को सार्थक मूल्य मिलेगा, और अगर नहीं तो खुद ही दूसरे विकल्प ढूंढ लेंगे।
 
मेट्रो किराए बढ़ाने की बात में बहुत सारी चिंता है। लोगों को यह जानना चाहिए कि अगर उन्हें किराए में बढ़ोतरी की जाने वाली है तो इससे उनके जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ेगा। बंगलूरू मेट्रो के साथ-साथ अन्य शहरों में भी ऐसा होने का खयाल है।
 
बंगलूरू मेट्रो की बात करें, पहले तो यह कैसे पड़ा कि सरकार द्वारा बढ़ोतरी करने का फैसला हुआ? शायद लोगों ने कहा होगा कि किराए कम करें, और फिर स्कैम बनाया, सरकार को अपने चेहरे पर झूठना पड़ा।

डीके शिवकुमार की बात भी समझ में आती है, लेकिन इसमें तीन दिनों के बाद क्या बदलेगा? सरकार से बदला नहीं मिलेगा, बस एक झूठी घोषणा कर देंगे। और यह भी सवाल है कि किराए बढ़ाने से लोगों को फायदा क्या होगा?
 
बता रहा, ये एक दिलचस्प मुद्दा है। मुझे लगता है कि राज्य सरकार को अपनी सीमाओं को ठीक से समझने की जरूरत है, फिर ब्रिटेन ने भी उनकी परवाह नहीं की, बस सोचकर चला गया था। लेकिन वास्तविकता ये है कि केंद्र सरकार तो बहुत बड़ा खेल खेल रही है। अगर राज्य सरकार अपने अधिकारों को मान देती है, तो फिर हमें इसका मतलब क्या समझना होगा? और ये सवाल और भी जटिल होता जाता है जब आप इस पर गहराई से देखने लगते हैं।
 
बंगलूरू मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी होने पर लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, तो क्यों सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जिससे लोगों की परेशानियाँ कम हो? 🤔

मेरी राय में सरकार की ओर से इस मामले में एक समन्वय समिति बनाना चाहिए जहां सभी पक्षों की बातें सुनकर फैसला लिया जा सके। इससे यह समझ में आ सकता है कि किस प्रकार के बदलाव करीब 12-18 महीने की अवधि में अंतरिम रूप से किए गए जाएं।
 
बिल्कुल सही नहीं कह सकते कि राज्य सरकार खुद लिया हुआ फैसला ऐसे में केंद्र सरकार को भी कोई नुकसान नहीं हुआ होगा। सरकार द्वारा बढ़ाए गए किराए से शहीद होने वालों का दाम तो कहाँ? 🤑

क्या हम यह नहीं जानते कि राज्य सरकार की अपनी बजट में कितने पैसे आ गए थे, अब वह इतने भी खर्च नहीं कर सकते। राजनीतिक दलों को खुद की गलतियों का सामना करने की चतुराई दिखानी चाहिए ना, फिर हमारी सरकार को दूसरों की गलतियों का सामना करना पड़े। 🙄

केंद्र और राज्य सरकार के बीच ये ऐसा टकराव तेज होता जा रहा है जैसे कोई भारतीय सुपरफास्ट पिक्चर हो गया है, लेकिन इस मामले में किसी न किसी को दाम नहीं मिलेगा। 🤦‍♂️
 
Back
Top