गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये सभी बातें भारतीय परेड के पीछे की कहानी से मिलती-जुलती हैं। परेड न केवल एक विजय की सार्वजनिक नुमाइश है, बल्कि राज्य द्वारा रचा गया तमाशा भी है, जिसमें हारे हुए दुश्मनों को पहले अपमानित किया जाता और फिर मार दिया जाता था। लेकिन भारत में यह परेड पूरी तरह से विजय की नुमाइश नहीं है, बल्कि एक महानता की प्रतीक भी है।
भारतीय गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास करीब 1000 वर्ष पुराना है, जब मिस्रवासियों ने इसे अपनी समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को दर्शाते हुए शुरू किया था। यह विजय का उत्सव या राजा देवत्व की यात्रा थी, जिसमें रानी हत्शेपसुत ने इसे और अधिक भव्य बना दिया था। आज भी भारत में परेड को एक महानता की प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जहां सैनिकों की अगुआई सेनापति करते हैं और जनता उन्हें अपने अधिकारियों के रूप में पूजती है।
भारतीय गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास करीब 1000 वर्ष पुराना है, जब मिस्रवासियों ने इसे अपनी समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को दर्शाते हुए शुरू किया था। यह विजय का उत्सव या राजा देवत्व की यात्रा थी, जिसमें रानी हत्शेपसुत ने इसे और अधिक भव्य बना दिया था। आज भी भारत में परेड को एक महानता की प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जहां सैनिकों की अगुआई सेनापति करते हैं और जनता उन्हें अपने अधिकारियों के रूप में पूजती है।