खूनी जुलूस से रिपब्लिक डे परेड तक: आखिर क्यों होती है फौज और हथियारों की नुमाइश; यूरोप-अमेरिका परेड से अब क्यों कतराते हैं

गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये सभी बातें भारतीय परेड के पीछे की कहानी से मिलती-जुलती हैं। परेड न केवल एक विजय की सार्वजनिक नुमाइश है, बल्कि राज्य द्वारा रचा गया तमाशा भी है, जिसमें हारे हुए दुश्मनों को पहले अपमानित किया जाता और फिर मार दिया जाता था। लेकिन भारत में यह परेड पूरी तरह से विजय की नुमाइश नहीं है, बल्कि एक महानता की प्रतीक भी है।

भारतीय गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास करीब 1000 वर्ष पुराना है, जब मिस्रवासियों ने इसे अपनी समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को दर्शाते हुए शुरू किया था। यह विजय का उत्सव या राजा देवत्व की यात्रा थी, जिसमें रानी हत्शेपसुत ने इसे और अधिक भव्य बना दिया था। आज भी भारत में परेड को एक महानता की प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जहां सैनिकों की अगुआई सेनापति करते हैं और जनता उन्हें अपने अधिकारियों के रूप में पूजती है।
 
ਇੱਥੇ ਜਿਸ ਵਿੰਗ ਹੈ ਉੱਥੇ ਨਾਲ ਦੋਵੇਂ ਫੈਡ ਆਉਂਦੇ ਹਨ। ਕੁਝ ਲੋਕ ਸਿਰ्फ ਜੈਤੀਆ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਪਰ ਵਾਸਤੇ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸੰਘਿਆ ਅਤੇ ਮਹानतਾ ਬਾਰੇ ਗੱਲ ਕਰਨਾ ਵੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ।
 
बस, मेरे दोस्त... 1960 के दशक में जब मैं छोटा था, तो हमारे गाँव में भी गणतंत्र दिवस परेड होता था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, और नई पीढ़ी आई, तो युवाओं की सोच बदल गई। अब यह सभी बातें बहुत ही औपचारिक हो गई हैं। मुझे लगता है कि सरकार भी इस परेड को एक विजय की नुमाइश बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन मैं कहूंगा कि यह पूरी तरह से सही नहीं है। यह महानता की प्रतीक होनी चाहिए, लेकिन ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह एक विजय की नुमाइश ही है। और मुझे यकीन है, अगर मिस्रवासियों ने 1000 साल पहले इसे शुरू किया था, तो आज भारतीय परेड बहुत अलग होता। 🤔💭
 
मुझे यह तो बहुत दिलचस्प लगता है कि हमारी परेड की कहानी इतनी जटिल है 🤯। ये तो एक महानता की प्रतीक है, जहां हम अपने सैनिकों को सबसे ऊंची स्थिति देते हैं और उन्हें अपना राजा मानते हैं। लेकिन यह तो हमारी समृद्ध संस्कृति की सच्चाई बताती है 🙏। जैसा कि मिस्रवासियों ने शुरू किया था, वहीं से यह परेड 1000 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। और रानी हत्शेपसुत की याद तो हमारी इस परेड को और भी भव्य बनाती है 🏰। लेकिन मुझे लगता है कि यह परेड एक महानता की प्रतीक होनी चाहिए, जहां सैनिकों को उनके अधिकारियों के रूप में पूजा जाए, न कि हम उन्हें अपना राजा बनाएं। और इसके लिए हमें सोचते समय सेनापति की भूमिका पर ध्यान देना होगा, ताकि हमारे सैनिकों को सही मायने में प्रोत्साहित किया जा सके।
 
मेरी तो खुशी हुई, भारतीय परेड की सच्चाई को अंतिम समय तक पहुंचाया गया। लेकिन ज्यादातर लोग इसे केवल विजय की नुमाइश देखते हैं, उन्हें पता नहीं है कि यह एक महानता की प्रतीक भी है। मैं समझता हूं, परेड का इतिहास 1000 वर्ष पुराना है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना मानते हैं, उन्हें पता नहीं है कि यह वास्तव में हमारी संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है। 🕉️
 
"जिनमें हिम्मत नहीं है, वे रास्ते से खो जाते हैं, लेकिन दिल पर अहंगी होना एक सच्ची शक्ति है" 😊
 
मुझे यह परेड बहुत दिलचस्प लगता है, लेकिन मुझे लगता है कि हमेशा से लोग इसके पीछे की सच्चाई नहीं जानते। यह परेड न केवल विजय की नुमाइश है, बल्कि एक तमाशा भी है जिसमें हमारे राष्ट्रपति और मुख्यमंत्रियों को बड़ी संख्या में लोग अपने अधिकारियों के रूप में पूजते हैं।

मुझे लगता है कि यह परेड एक महानता की प्रतीक नहीं है, बल्कि हमारे देश को एक मजबूत और शक्तिशाली देश बनाने की कोशिश में। लेकिन क्या हमें यह कभी भी सोचा है कि हमारे राष्ट्रपति और मुख्यमंत्रियों को इतनी बड़ी संख्या में लोग पूजते हैं? यह एक बहुत बड़ा सवाल है।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की सच्चाई को जानने और इसके पीछे की कहानी को समझने की जरूरत है, न कि बस उसके बारे में विजय या महानता की बातें करना।
 
परेड को विजय की नुमाइश नहीं समझना चाहिए, यह महानता की प्रतीक है 😊। भारतीय इतिहास में परेड का यह रूप 1000 वर्षों से बना रहता है, जब तक कि हम अपनी समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को नहीं समझबुलाते। आज भी इससे हमारे देश की एकता, जिंदगी की महत्ता और नायकत्व का मेल होता है। और फिर भी, यह सैनिकों के लिए विजय का उत्सव नहीं है, बल्कि उनकी बहादुरी और बलिदान को मनाता है 🙏
 
🎉 गणतंत्र दिवस परेड की खूबसूरती भारतीय इतिहास में बैठ गई है... 🙏 लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि यह पारंपरिक परेड आज भी एक समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को दर्शाती है? 🤔 मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने और इसकी महत्ता को पहचानने की जरूरत है ताकि हम इसे आगे बढ़ा सकें। 🚀

और यह सोचते हुए, मैं सोचता हूं कि हमें अपने देश की विविधता और समृद्धि को भी पहचानने की जरूरत है। भारत एक ऐसा देश है जहां विभिन्न संस्कृतियां और परंपराएं मिलकर एक अद्वितीय सामाजिक और सांस्कृतिक खलल बनाते हैं। 🌈

आज की पीढ़ी को अपने देश के इतिहास और समृद्धि को समझने की जरूरत है, ताकि हम एक बेहतर भविष्य बना सकें।🔜
 
परेड निश्चित तो एक दिलचस्प चीज़ है ... जैसे कि हम सब जानते हैं वह सैनिक भाग लेते हैं और फिर विजय से भरे हुए दीवारों से मिलते हैं, लेकिन क्या किसी ने सोचा है कि बिना स्क्रीन पर रिलीज़ होते हुए, यानी जीवन की शुरुआत और समाप्ति का प्रदर्शन करते हुए भी इन्हें मिल सकता है?
 
परेड की बात करें, तो लगता है कि लोगों को याद नहीं कुछ भी। पहले यह परेड सिर्फ एक विजय की नुमाइश थी, लेकिन अब यह एक महानता की प्रतीक भी बन गया है। मुझे लगता है कि इसे अपने ऐतिहासिक महत्व को याद करना चाहिए।

कल्पना करो, अगर हमारे देश में सैनिकों के लिए इतनी पूजा और सम्मान नहीं था, तो शायद हमारा देश आज कैसा होगा। यह परेड भारतीय सेना की महानता और बलिदान का साहस का प्रतीक है।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने इतिहास को जानते और समझते, तो हमारा देश और भी आगे बढ़ सकता।
 
परेड की दुनिया में भी हमें एक शिक्षा मिलती है - हमेशा यह याद रखना चाहिए कि विजय और सम्मान दोनों ही एक साथ आते हैं। परेड न केवल राज्य की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह हमें अपने इतिहास, संस्कृति, और परंपराओं का सम्मान करने का मौका भी देता है। हमें यह समझना चाहिए कि विजय कभी भी एकमात्र उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जीवन में हर रुक-थाम को एक अवसर मिलता है अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने की।
 
मुझे लगता है कि ये परेड तो सिर्फ सैनिकों को दिखाने का मौका नहीं है, बल्कि समाज को भी दिखाता है कि हमारे पास विजय की जीतने की शक्ति है। लेकिन तुमसे पूछना चाहता हूँ, क्या हमें यही सोचकर रहते हैं कि परेड मैं हमारे इतिहास की कहानी बताता है या नहीं? 🤔
 
परेड में तो सब विजय ही, लेकिन यह वास्तव में एक महानता की कहानी भी है जिसमें हमारे देश की समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराएं शामिल हैं। मुझे लगता है कि यह परेड हमें अपने इतिहास से सीखने का एक अच्छा अवसर देता है।

मैं याद करता हूँ जब मेरे पिताजी ने मुझे बचपन में बताया था कि रानी हत्शेपसुत ने इस परेड को और अधिक भव्य बनाने के लिए अपनी सार्थकता को दिखाया था। यह एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है जिसे हमें आज भी याद रखना चाहिए।

परेड में जब सैनिकों की अगुआई सेनापति करते हैं और जनता उन्हें अपने अधिकारियों के रूप में पूजती है, तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। यह हमें एक मजबूत और समृद्ध देश की ओर ले जाने वाली एक कहानी है जहां सैनिकों का बलिदान हमारी आजादी और अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 🎉
 
परेड वाले निबंध को पढ़कर मुझे लगा कि क्या याद नहीं है कि हमारी जीत को कब से मनाने की बात करना शुरू कर दिया गया था। परेड न केवल सैनिकों की विजय है, बल्कि राजाओं की भी मृत्यु की तरह, जो भी होती है सबकुछ मनाते हैं और दोहराते हैं। लेकिन अभी भी यह परेड में सैनिकों का बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता है, न कि उनकी मांगों और समस्याओं। 🤔
 
परेड भारतीय जीवन की धुन की तरह है - हर चोटी पर एक नई शुरुआत। लोग अक्सर इसे विजय की नुमाइश सोचते हैं, लेकिन मेरा मन मंडलता है यह परेड हमारे देश की महानता को दर्शाता है। जैसे हमें कभी-कभी गिरने की जरूरत भी होती है, परेड की तरह हमें अपने उत्थान के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

मुझे लगता है कि अगर हम इसे केवल विजय की नुमाइश मानते हैं तो हम अपने देश की सच्चाई को समझ नहीं पाएंगे। परेड में हमारी सैनिकों की भूमिका, हमारी सरकार और हमारी समाज के बीच का संतुलन दिखाई देता है।
 
परेड को विजय की नुमाइश बनाने दो, फिर सोच लो कि ये परेड 1000 साल पहले शुरू हुई थी, तो यह कैसा महानता की प्रतीक होगा? 🤔

परेड में जितने भी बजनबटोरा और तमाशे होते हैं, वो देखकर मुझे लगता है कि ये एक ऐसा तमाशा है, जिसमें लोगों का पैसा लगातार खर्च होता रहता है। 🤑

राजा देवत्व की यात्रा और रानी हत्शेपसुत ने इसे और अधिक भव्य बनाया, तो फिर इन्होंने भारत के दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास को सुधारने में मदद की? 🤷‍♂️

आज भी सैनिकों की अगुआई सेनापति करते हैं, लेकिन क्या ये विजय की नुमाइश है? या फिर यह एक ऐसा प्रदर्शन है, जिसमें लोग अपने अधिकारियों को पूजने में खुश होते हैं? 😐

इस गणतंत्र दिवस परेड में जितनी भी राजकीय बातें होती हैं, वो मुझे लगता है कि ये एक ऐसा माहौल बनाने की कोशिश है, जहां लोग अपने राजनीतिक नेताओं को पूजने लगें। 👑
 
परेड की बात करें, तो यह तो एक दिलचस्प विषय है 🤔। मुझे लगता है कि हमें यह भूलने की जरूरत नहीं है कि परेड का इतिहास बहुत पुराना है। वह समय कैसा था, हमें पता नहीं है, लेकिन यह तो साफ है कि परेड न केवल एक विजय की नुमाइश है, बल्कि एक समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को दर्शाते हुए भी है।

और फिर, यह तो हमारा राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस है, जिसमें हम अपनी आजादी और स्वतंत्रता की बहुति की बात करते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि हमें यह भी याद रखना चाहिए कि परेड न केवल एक विजय की नुमाइश है, बल्कि हमारे देश की समृद्धि और संस्कृति को दर्शाते हुए भी है।

और तो और, मुझे लगता है कि हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि परेड का इतिहास बहुत पुराना है, और हमें इसकी सम्मानिता से आगे बढ़ना चाहिए। 🙏
 
परेड की बात करें, तो यह सिर्फ एक तमाशा नहीं है, बल्कि हमारी इतिहास की गहराई से भरपूर विरासत है। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि यह पूरी तरह से विजय की नुमाइश है, तो मुझे लगता है यह बहुत सही नहीं है। हमारी परेड की शुरुआत वास्तव में एक राजा देवत्व की यात्रा थी, जहां सेनापति और रानी हत्शेपसुत ने इसे और अधिक भव्य बनाया था। आज भी यह महानता की प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि यह पूरी तरह से विजय की नुमाइश है। मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझना चाहिए और इसे एक महानता की प्रतीक के रूप में देखना चाहिए, नहीं तो यह सिर्फ एक तमाशा होगा। 🤔
 
मुझे लगता है ki yeh parades ko ek vijay ki numaiish nahi maanta, balki mahानत ki pratik bhi hona chahiye... Bharat mein iski pehli parides 1200 varsh purane hai, jab misra veesiyon ne yeh shuru kiya tha. Ab ise ek prasiddh mahaanata ki pratik maana jaata hai.

main sochta hoon ki iss dainik jeevan mein hamne kuchh nahin badalna chahiye, humein yah dekhna chahiye ki kaise yeh parades ek vijay ka utsaav, mahanata ka pratik aur samman ki sthapana ho raha hai.
 
Back
Top