मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को डंडों से पीटने की एक गंभीर समस्या है। इस परंपरा को अक्सर 'सबक' के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन इसकी पूरी वास्तविकता और हिंसक तरीके को स्वीकार करना चाहिए।
इस समस्या के बारे में कई महिलाएं और समूहों ने शिकायत दर्ज कराई हैं, जिसमें मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को सबसे अधिक प्रभावित देश में स्थिती मिलती है। इसमें माता-पिता, भाई-बहन और अन्य परिवार के सदस्य शामिल होते हैं जो मोहब्बत में पड़े प्रेग्नेंट महिलाओं को डंडों से पीटते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू), प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को पीटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करने वाले समूह 'महिला सुरक्षा मंच' और कई अन्य।
इसके अलावा, सरकारें भी इस समस्या पर ध्यान देने लगी हैं। कई राज्यों में यह अधिकृत किया गया है कि यदि कोई महिला प्रेग्नेंसी के दौरान डंडों से पीटी जाती है, तो उस पर कड़ी सजा दी जाएगी।
इस समस्या के बारे में कई महिलाएं और समूहों ने शिकायत दर्ज कराई हैं, जिसमें मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को सबसे अधिक प्रभावित देश में स्थिती मिलती है। इसमें माता-पिता, भाई-बहन और अन्य परिवार के सदस्य शामिल होते हैं जो मोहब्बत में पड़े प्रेग्नेंट महिलाओं को डंडों से पीटते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू), प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को पीटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करने वाले समूह 'महिला सुरक्षा मंच' और कई अन्य।
इसके अलावा, सरकारें भी इस समस्या पर ध्यान देने लगी हैं। कई राज्यों में यह अधिकृत किया गया है कि यदि कोई महिला प्रेग्नेंसी के दौरान डंडों से पीटी जाती है, तो उस पर कड़ी सजा दी जाएगी।