मुझे ऐसे अमीर लोगों का दुःख है जिन्हें अपने परिवार को खुश करने के लिए पैसा कमाने की जरूरत है। लेकिन फिर भी, वे इतने अंजाम से पैसे कमाने की कोशिश करते हैं कि उनकी पत्नी ने अपने बच्चों को दिया हुआ पैसा खोने का मौका दिया है! यह तो और भी बड़ा अंजाम है। 27 हजार करोड़ रुपए जितना पैसा दिया गया, वो जरूर धरती को फ्लैट बनाने के लिए नहीं था... :|
मैं सोचता हूँ कि अगर वह पैसा खर्च में आया होता, तो शायद हमारे देश की भूमि पर ज्यादा बिल्डिंग न होती। और फिर, हमारे बच्चों को अपने भविष्य के बारे में खुशियाँ मिलनी चाहिए, न कि उनके पिता के पैसे कमाने के लिए!
मुझे लगता है कि जिंदगी का अर्थ खुशियों से भरना है, नहीं? तो यह अमीर दुकानेदार की ऐसी बातें करने के लिए मैं फंस गया हूँ... :||