कर्नाटक CM विवाद, सिद्धारमैया बोले- शिवकुमार को नाश्ते पर बुलाया: हाईकमान ने मीटिंग करने को कहा है; डिप्टी सीएम ने कहा- मुझे कुछ नहीं चाहिए

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बताया है कि उन्हें और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को 12 नवंबर को दिल्ली में बुलाया था।
 
📰 यह तो वास्तविकता है कि सिद्धारमैया जी ने उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को दिल्ली में बुलाने की बात कही है। लेकिन लगता है कि इस बारे में कुछ और भी हो सकता है। क्या वे दोनों ही एक साथ नई नीतियाँ बनाने के लिए मिलेंगे? या फिर कुछ और पीछे छुपे हुए है? 🤔

मुझे लगता है कि यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है। कर्नाटक में सिद्धारमैया जी ने बहुत अच्छा काम किया है, और अगर वे दिल्ली में भी एक साथ काम करते हैं तो शायद हमें कुछ नया और उत्कृष्ट देखने को मिलेगा। 💡

लेकिन फिर भी, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीति में कभी भी कोई सुनिश्चितता नहीं होती। क्या वास्तव में वे दोनों ही एक साथ मिलेंगे? या फिर कुछ और हो सकता है? यह तो समय ही बताएगा। ⏰
 
क्या ऐसा लगता है कि हमारे राजनेता को भी समय-निकालने की कोई समस्या नहीं? 🤔 क्यों डाले गए बिना 12 नवंबर को दिल्ली में बुलाना? यह तो बस प्रेस कॉन्फरेंस का हिस्सा था, लेकिन फिर भी निकालने में तेरहवीं घंटी लग गई। 🕰️ क्या होता अगर पहले से बताया जाता था कि जब तक प्रेस कॉन्फरेंस बाकी नहीं होती, तब तक दिल्ली का रेल मार्ग बंद रहता? 😂
 
ਅरे, ਕੁਝ ਮुश्किल ਨੂੰ ਸਾੜਨ ਵਿੱਚ ਹੈ। ਇਸ ਦੋਸਤੀ 'ਤੇ ਪ੍ਰੈਸ ਕਾਰਜਸ਼ੀਲ ਵੱਲੋਂ ਮੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਬੁਲਾਉਣ 'ਤੇ ਗਈ ਹੈ। ਅਜਿਹਾ ਕਰਦਿਆਂ ਮੈਂ ਸੋਚਦਾ ਹਾਂ, ਇਹ ਬਹੁਤ ਖ਼ਰਾਬ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ।
 
सब कुछ ठीक है, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब तो एक नियमित चिंता है। पार्टी से जुड़े व्यक्तियों के बीच इतना तनाव, क्या यही हमारा भविष्य है? मेरे लिए, सबसे जरूरी बात यह है कि हम सब एक-दूसरे को समझें और समर्थन दें। सरकार के निर्णयों पर जोर देने की बजाय, मैं सोचता हूं कि हमें अपनी पार्टी के अंदर खुलकर बात करनी चाहिए। इससे हम अधिक सशक्त और एकजुट रह सकते हैं।
 
जानबूझकर इस सरकार में भ्रष्टाचार का खलने क्या होगा? 🤔

मुख्यमंत्री को और उपमुख्यमंत्री को दिल्ली में बुलाने का मतलब यह है कि सरकार के कुछ बड़े-बड़े लोग अपनी गली-गलीची करने के लिए दिल्ली चले गए हैं। 🚗

क्या ये सरकार हमारे राज्य में तो ही नहीं सुधारने की कोशिश कर रही है, बल्कि अपने व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करने के लिए भी नहीं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है जिस पर हमें बात करनी चाहिए। 🤷‍♂️

क्या इस सरकार में बदलाव आने की संभावना है? या फिर हमें सिर्फ अपने राज्य में समस्याओं को सामने लाने और दूसरों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 🤔
 
इस दुनिया में तो सब भूल जाते हैं कि 12 नवंबर एक दिन है, न कि हमारे भविष्य का दिन 🤔। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार को दिल्ली में बुलाने की बात तो तो सबने खुद ही कही होगी, लेकिन जब तक वे 12 नवंबर पर निकलते हैं तब तक कुछ नहीं होता 🕰️। अच्छा है कि मुख्यमंत्री अपने कार्यों में फिकर न करें और दिल्ली में बैठकर भी तालमेल बिठाएं, फिर सबको सुलझने का मौका मिलता है 👍
 
😐 मुझे यह ख़बर सुनकर बहुत दुःख हुआ... कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस तरह से दिल्ली में बैठने को कहा था, वैसे तो वहाँ पर उन्होंने क्या सोचा? पूरे राज्य के विकास और समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएंगे।

मुझे लगता है कि उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने भी अच्छा काम नहीं किया। अब वह दिल्ली में बैठकर क्या सोचेंगे? उसकी जिम्मेदारी कर्नाटक को छोड़ देनी चाहिए।
 
क्या लगता है, मेरी याद है जब मैं बच्चा था, मेरे पिताजी ने मुझे सिखाया था कि परस्पर सम्मान और संवाद करना बेहद जरूरी है। लेकिन आज के समय में ऐसा लगता है कि हर चीज़ तेज हो गई है, और लोग एक दूसरे पर टिप्पणियाँ करते रहते हैं। शायद यह भी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जी की स्थिति की बात हो रही है। क्या उन्हें कोई गंभीर समस्या थी, या फिर कुछ और था? मुझे लगता है कि ऐसी चीज़ों पर चर्चा करने से पहले हमें पहले उनकी पृष्ठभूमि और स्थिति समझनी चाहिए।
 
🤔 सोचते हैं अगर इस तरह के मामलों में लोग भी जानकारी के लिए विभिन्न सोर्सेज़ चुनने की कोशिश करें, तो फायदा होता। क्या पता ये दोनों प्रमुख मंत्रियों ने एक ही जगह नहीं बुलाया, ना? चाहे सरकार का कोई नया स्टेटमेंट आये, तो फिर जानकारी और फॉर्मेटिंग में भी ध्यान देना जरूरी है। 12 नवंबर की तारीख विशिष्ट है, लेकिन शेड्यूल और समय से जुड़ी जानकारी के बारे में अभी तक कुछ नहीं पता। यह तो सरकार का नियम ही, लेकिन फिर भी जरूरी है कि हम इस तरह की जानकारी को देखें, और फॉर्मेटिंग में विशिष्टता लें।
 
बोलते हैं तो यही सोचते हैं... क्या दिल्ली में खेल खेलने के लिए जाना पड़ता है? 🤔 पार्टी के नेताओं को बुलाने का मतलब है कि कुछ भी गलत तय कर रहे होंगे। 12 नवंबर, यह तेजी से आयोजित होने वाली बैठक की तारीख है, मुझे लगता है कि कोई बड़ा घोषणा करने जा रहे हैं। पार्टी के नेताओं को एक दूसरे के चेहरे पर बैठना पड़ता है, यह तो सुनिश्चित है। सिद्धारमैया और शिवकुमार, दोनों अच्छे मुलाकात करने वाले लोग हैं, लेकिन जब पार्टी के नेताओं की बैठक होती है तो मुझे लगता है कि कुछ भ्रमित करने की कोशिश की जाती है। 🤷‍♂️
 
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