सदियों से हमारे राजनेताओं को यही बात कही जाती रही है कि शब्द शक्ति रखते हैं लेकिन काम करना भी जरूरी है. लेकिन आजकल देखकर लगता है कि शब्द और वादे एक पागलपन में फंस गए हैं.
बच्चों की तरह युवाओं ने राजनीतिक दुनिया में प्रवेश किया है. जो लोग भविष्य की बात करते हैं, उनके वादे सुनने के बाद तुरंत अपना दम घूंट लेते हैं और खुद को राजनीति में गिराया रखते हैं.
आजकल युवाओं ने ज्यादातर राजनेताओं पर शब्दों की शक्ति का जोर दिया है. लेकिन यह सुनना भी थोड़ा अजीब लगता है क्योंकि अगर हमारे पास वाकई वफादार और विश्वसनीय युवा नहीं हैं, तो फिर राजनीतिक पार्टियां खुद को दूर कर देंगी.
बच्चों की तरह युवाओं ने राजनीतिक दुनिया में प्रवेश किया है. जो लोग भविष्य की बात करते हैं, उनके वादे सुनने के बाद तुरंत अपना दम घूंट लेते हैं और खुद को राजनीति में गिराया रखते हैं.
आजकल युवाओं ने ज्यादातर राजनेताओं पर शब्दों की शक्ति का जोर दिया है. लेकिन यह सुनना भी थोड़ा अजीब लगता है क्योंकि अगर हमारे पास वाकई वफादार और विश्वसनीय युवा नहीं हैं, तो फिर राजनीतिक पार्टियां खुद को दूर कर देंगी.