दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संविधान दिवस पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा, "बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी ने हमारे संविधान में एक नई राह खोली है, जिसमें हर भारतीय को बराबरी, न्याय और सम्मान का अधिकार मिला।"
उन्होंने कहा, "आज के इस दिन पर, हमें यह याद दिलाई जा रही है कि लोकतंत्र मजबूत होता है, जब सत्ता नहीं बल्कि संविधान सर्वोपरि होता।"
उन्होंने आग्रह किया, "हम मिलकर संविधान की आत्मा—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—की रक्षा करने के लिए संकल्प लेने के लिए आग्रह करते हैं।"
इस बयान को सुनकर एक सवाल उठता है कि क्या इस तरह के बयान में सरकार की भूमिका तो साफ रूप से दिखाई दे रही है?
उन्होंने कहा, "आज के इस दिन पर, हमें यह याद दिलाई जा रही है कि लोकतंत्र मजबूत होता है, जब सत्ता नहीं बल्कि संविधान सर्वोपरि होता।"
उन्होंने आग्रह किया, "हम मिलकर संविधान की आत्मा—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता—की रक्षा करने के लिए संकल्प लेने के लिए आग्रह करते हैं।"
इस बयान को सुनकर एक सवाल उठता है कि क्या इस तरह के बयान में सरकार की भूमिका तो साफ रूप से दिखाई दे रही है?