ये बहुत दुखद कहानियाँ सुनकर मुझे अच्छी तरह निराशा हुई है। यह तो ऐसी स्थिति में लड़कियों और लड़कों की मदद करने के लिए हमारी समाज की जिम्मेदारी पर सवाल उठता है । अगर उनके परिवार उनकी मदद नहीं कर सकते तो फिर स्थानीय सरकार और अन्य संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन यह देखकर भी बहुत उदास हुआ कि ऐसी स्थितियाँ कैसे बनती हैं और कैसे सामाजिक प्रतिष्ठा को मुद्दा बना कर स्थिति और खराब होती जाती है ।