मैं देश नहीं झुकने दूंगा…खड़गे ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, विदेश नीति को बताया Wild Pendulum

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना लगाने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, अपने बयान से सरकार को एक नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी टैरिफ और रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर सरकार पर निशाना साधा, लेकिन उनके बयान में एक बड़ा सवाल उठता है - क्या मोदी सरकार वास्तव में अपनी नीतियों को लेकर खड़ी है, या वह खदबू होकर चल रही है।

खड़गे ने कहा, "पीएम मोदी चुप हैं, 'सर' वाली बात सिर्फ सरेंडर ज्यादा दिखती है। हमारे लिए विदेश नीति का मतलब राष्ट्र हित सर्वोपरि होना जरूरी है, पर मोदी सरकार ने हमारी Non-Aligned और Strategic Autonomy की विदेश नीति को गहरी चोट पहुंचाई है।"

उन्होंने यह भी कहा, "मोदी सरकार की विदेश नीति एक Wild Pendulum की तरह कभी इधर, कभी उधर झुलती है और इसका नुकसान भारत की जनता को हो रहा है।"
 
🤔 मुझे लगता है कि खड़गे जी का यह बयान सच्चा नहीं है। पीएम मोदी किसी भी तरह से चुप नहीं हैं। वे हमेशा राष्ट्रीय हितों को देखते हुए निर्णय लेते रहते। 🇮🇳

मुझे लगता है कि सरकार की विदेश नीति में थोड़ा सा बदलाव जरूरी है, लेकिन इतना बड़ा बदलाव क्यों? 🤷‍♂️ खदबू होकर चल रही तो यह कहना मुश्किल है। मुझे लगता है कि हमें सरकार की नीतियों पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि उन्हें नकारने की। 🤝
 
नरेंद्र मोदी पर हमला करने वाले बड़े बोल सुनकर मुझे लगता है कि सब कुछ ठीक है। मल्लिकार्जुन खड़गे जी का बयान देखकर मैं सोचने लगा कि सरकार तो खदबू होकर चल रही है, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि उनका बोलना अच्छा है। वह विदेश नीति पर बहुत सावधानी से सोचते हैं और हमारे देश को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। सरकार तो बदलना चाहती है और उसे नई दिशा मिल सकती है, फिर भी हमें उम्मीद रखनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी के बयान से सरकार के लिए एक नई दिशा मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लेकिन मेरे अनुसार, उनके बयान से कांग्रेस पार्टी को अपने गठबंधन साथियों के साथ बहुत बड़ा मुद्दा उत्पन्न करना पड़ेगा।
 
क्या देखा, रूसी तेल पर ट्रंप से सीधा सामना करने वाली मोदी सरकार, खदबू होकर चल रही है… 🤯 अरे क्या होता है, सरकार अपनी नीतियों को लेकर खड़ी नहीं है। खड़गे जी बोल रहे हैं कि अमेरिका से रूसी तेल पर ट्रंप का रुख, मोदी सरकार की विदेश नीति को कैसे देखा जाए? 🤔

लेकिन सरकार की चाल बिल्कुल भ्रम है। उन्होंने हमें Non-Aligned और Strategic Autonomy की विदेश नीति से दूर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। कहीं यह तो खदबू होकर चल रही सरकार नहीं… 😒
 
मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान सोच-समझकर दिया गया है, लेकिन इसके पीछे एक सवाल उठता है कि क्या वास्तव में हमारी सरकार अपनी नीतियों को लेकर खड़ी है, या वह खुद ही चक्कर लगा रही है? 🤔

मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन जी सही कह रहे हैं कि पीएम मोदी चुप हैं, वे हमेशा 'सर' वाली बातें करते रहते हैं और अपनी नीतियों पर खुद को साबित करने की कोशिश नहीं करते। लेकिन जब उन्हें उनकी नीतियों के फायदों और नुकसान का मूल्यांकन करने का मौका मिलता है, तो वे चुपचाप चले जाते हैं।

मुझे लगता है कि हमारी सरकार की विदेश नीति एक ऐसी पेंडुलम की तरह है जो कभी इधर, कभी उधर झूलती रहती है, और इसका नुकसान भारत की जनता को होता है। लेकिन अगर हम सोच-समझकर अपनी सरकार के प्रति खड़े होकर उनकी गलतियों को सुधारने की कोशिश करते हैं, तो शायद हम अपने देश को एक बेहतर दिशा में पहुंचा सकते हैं। 💪
 
प्रधानमंत्री मोदी पर बयान देने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे की बात करने में अच्छी बात है, लेकिन उनकी राय में एक छोटा सा त्रुटि है - "सर" को "साहब" कहकर सही तरीके से कहना चाहिए, नहीं तो यह सुनने में जोरदार लगेगा। 😊

और उनकी बात में सच्चाई है, प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में बहुत सारी अनिश्चितता है। लेकिन अगर हम उन्होंने चुनौती देनी है तो अपनी राय को सही तरीके से रखना जरूरी है, "Wild Pendulum" शब्द को अच्छे से नहीं समझ रहे लगते।
 
नामुमकिन बातें करने में आसान है लेकिन सच्चाई बताना दुर्लभ है 🤔। मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान से यह साफ होता है कि वे अपनी पार्टी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना एक अच्छी बात नहीं है, इसका मतलब यह है कि हमें अपनी सरकार को ठिकाना से देखना होगा। 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि खड़गे जी वास्तव में कुछ गहराई पर नहीं गए हैं। सरकार को फिर से बदलने की जरूरत नहीं है, इसके लिए हमें अपनी नीतियों को समझने और उनका विकास करने की जरूरत है। खड़गे जी अमेरिकी टैरिफ पर रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप के रुख से सरकार को पूरी तरह से निशाना बनाकर दिख रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार की जटिलता और गहराई में बहुत सारे कारक शामिल हैं।
 
अरे यार, मल्लिकार्जुन खड़गे दी बात से सरकार को एक नई दिशा मिल सकती है, तो फिर भी उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि पीएम मोदी भी उनकी बात समझते हैं और बदलाव लाने की कोशिश करते हैं। अगर वास्तव में सरकार खदबू होकर चल रही है, तो हमें एक-दूसरे पर भरोसा करना चाहिए और सामूहिक रूप से बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए 🤝
 
अरे दोस्तों! तो मोदी सरकार वास्तव में अपनी नीतियों पर खड़ी है? या वह बस खदबू से चल रही है? मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान बहुत ही महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार बिल्कुल सही नहीं है। देखो हमेशा ऐसे में जब कोई विपक्षी दल अपनी नीतियों पर हमला करता है, तो वहीं पर अपनी पकड़ ढूंढने की कोशिश करता है।

लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे के सवाल को ध्यान में रखते हुए, यह सच है कि मोदी सरकार विदेश नीति पर थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। भारत की जनता को हमेशा अपने देश की हितों के लिए सबसे ज्यादा बात करनी चाहिए, न कि खुद की पकड़ बढ़ाने। तो यह देखकर अच्छा लगेगा कि सरकार मिलकर विदेश नीति पर कुछ सुधार करेंगी। 🤔
 
बिल्कुल सही, मोदी सरकार की विदेश नीति में बहुत सारे सवाल हैं... खदबू होकर चल रही है तो ठीक है, लेकिन पूछने का मतलब यह नहीं है कि हम अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा छोड़ दें। लेकिन ये सच है कि विदेश नीति में बहुत सारे विपरीत हैं।

किस बात पर खड़गे ने कहा? अमेरिका और रूसी तेल... ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं। हमें अपनी विदेश नीति में स्थिरता और संतुलन बनाए रखना होगा।
 
🤔 मुझे यह सवाल आया कि हमेशा तो अमेरिकी टैरिफ और रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप के रुख से सरकार को निशाना साधते हुए तो क्यों नहीं? शायद उन्हें लगता है कि इमरान खान से भी बेहतर दोस्त बनना और पाकिस्तानी टैरिफ को कम करना आसान है, लेकिन हमारे देश में ऐसा कुछ नहीं हुआ। 🙄
 
मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान सिर्फ विपक्षी दलों के लिए ही अच्छा नहीं लगेगा। सरकार की नीतियों में बहुत सुधार करने के बजाय, उनका ध्यान राजनीतिक मुसीबतों पर लगा रहता है। अगर वे सच में अपनी नीतियों को लेकर खड़े हैं, तो उन्हें यह देखना चाहिए कि कैसे पार्टी के भीतर एकजुटता बनाई जाए।
 
😊
नेताओं की बातों में ज़िंदगी होती है, लेकिन वादे तो वादे ही हैं... 🤔
अगर उनके वादे सच हों तो देश का नाम भी बदल जाएगा।
 
ਮेरੇ ਲਈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਆਕਰਸ਼ਕ ਹੈ ਕਿ ਕਾਂਗਰਸ ਦੇ ਨੇਤਾ ਅਜੇ ਵੀ ਮੋਡੀ ਸਰਕਾਰ 'ਤੇ ਕਾਬਜ਼ਾ ਰੱਖਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪੁੱਛ-ਖਿਚੜੇ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਸ਼ੱਕ ਨਹੀਂ, ਮੈਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦੌਰ 'ਤੇ ਕੀ ਗੱਲ ਕਰਦਾ ਸੀ?

ਪਰ ਜਿਵੇਂ ਮੈਨੂੰ ਬਹੁਤ ਲੱਗਦਾ ਹੈ, ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਕੋਈ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਮੁਹਿੰਮ ਨਹੀਂ ਵਿਖਾਉਣ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਨੇਤਾ ਦੀ ਮੁੱਖ ਬਲਦ ਕੀਹ ਵਜੋਂ ਵਰਤਣ?

ਅਸੀਂ ਆਪਣੇ ਨੇਤਾ ਦਾ ਅਸਲ ਹੱਥ ਬਿਆਨ ਕਰਨ ਜੋਗਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਮੁਜ਼ਤਭਰ ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੂਰੂਆਤ ਕਰਦੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ।
 
मोदी सरकार के पास खुद से सवाल उठने की जरूरत नहीं तो यह देश में कुछ भी हो सकता है 😂. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अच्छा बोला, विदेश नीति में स्थिरता और संतुलन लाने की जरूरत है, लेकिन यह तो सिर्फ सरकार की बात है। राजनीति में खदबूपन छुपा नहीं जा सकता। पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने भारतीय जनता पर विश्वास बनाने का समय है, लेकिन उनकी सरकार की नीतियों से विश्वास को तोड़ने की कोशिशें जारी रखें।
 
नेताजी की बोली सुनकर मुझे यह खुशी हुई कि हमारे देश के नेताओं ने अपने विदेश नीति पर इतनी बात की, लेकिन जैसे ही मैं उनके बयान पढ़ा, तो मुझे लगता है कि कई सवाल उठते हैं। 🤔

क्या हमारी सरकार वास्तव में अपनी नीतियों को लेकर खड़ी है, या वह खदबू होकर चल रही है? यह सवाल जरूरी है और हमें अपने देश की जनता की उम्मीदों को पूरा करना होगा।

आजकल दुनिया में बदलाव बहुत तेज हो रहा है, और हमें अपने देश को उस बदलाव के साथ चलने की कोशिश करनी चाहिए। 🌎
 
मोदी सरकार के बारे में लोगों का मनोबल तोड़ना तो एक अच्छा तरीका है! 😂 मैंने हमेशा कहा है, "सरकार को अपने देश के नुकसान करने वाली नीतियों पर खुद से जवाबदेह होना चाहिए"। खड़गे जी ने बिल्कुल सही कहा है कि मोदी सरकार वास्तव में अपनी नीतियों को लेकर खड़ी है? 🤔 मुझे लगता है कि वह एक खदबू सरकार है, जो हमेशा देश के हित में नहीं चलती। 🚫
 
मुझे लगता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान से सरकार को एक नई दिशा मिल सकती है 🔄, लेकिन सवाल यह है कि अगर उन्होंने सच कहा तो मोदी सरकार को अपनी नीतियों पर खड़े रहने का क्या जवाब देगी। विदेश नीति का मतलब राष्ट्र हित सर्वोपरि होना जरूरी है, लेकिन अगर सरकार खदबू होकर चल रही है तो यह हमारे लिए सहायक नहीं होगा। मुझे लगता है कि हमें सरकार से जवाब देने के बजाय, अपने विरोध को और मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए 🗣️.
 
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