माइनस 40 नंबर लाने वाले डॉक्टर से कौन इलाज करवाएगा: SC/ST/OBC सीटों पर 0 पर्सेंटाइल, डॉक्टर बोले- प्राइवेट कॉलेजों की सीट भरेंगे

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले से सहमति व्यक्त नहीं की है और कहा है कि ये एक राजनीतिक निर्णय है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, 'कुछ लोग सीटों को बर्बाद करने की बातें कर रहे हैं लेकिन अगर हम मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान नहीं देते, तो मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाएगा।'
 
बड़ा मुश्किल है ये निर्णय कैसे लिया गया है। अगर मरीजों की जिंदगी पर ध्यान दिया जाए तो फैसला अलग होता। क्या पिछले 20 सालों में हुआ हर प्रयास अच्छा नहीं था? 🤔

मैंने देखा है कि कई जगहों पर मरीजों को विशेषज्ञता नहीं मिल रही है। ऐसे में सरकार से कहना चाहिए कि हमारी हेल्थ सिस्टम में बदलाव होना जरूरी है। लेकिन यह तो एक बड़ी बात है... शायद ही कोई सुनेगा। 😐

मैं बस इतना कह रहा हूं कि हमें अपने पास की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और सरकार को खुद को विशेषज्ञों के साथ मिलाकर सुधारना चाहिए। ना तो एक ही तरह के लोग सभी निर्णय लेंगे। 🤷‍♂️
 
अरे, यह फैसला निकालने की बात ये और भी जटिल हो गई है ... 🤯 सोचते हैं कि अगर लोग स्वास्थ्य सेवाओं में अपना ध्यान नहीं लगाते, तो डॉक्टरों के पास बहुत काम आ जाता है, और फिर ये मरीजों की मदद कैसे करेंगे ? 💊 कम सीटें निकालने से लोगों को दूरन भरते हैं, और यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी पड़ सकता है ... 😬
 
ये तो जानने को मज़ा आया की अब स्कूलों में फिजिक्स और केमिस्ट्री की बात करनी भी आसान न हो… 😒 चाहे शिक्षक कोई भी हो, पुराने दिनों में तो छात्र ज्यादा ध्यान से सीखते थे, और शिक्षक भी अपनी बात समझाते थे। अब तो हर कुछ अच्छा माना जाता है, और कोई भी गलती करने वाला को दोषी समझ लिया जाता है। 🤦‍♂️ स्कूलों में खेलों और मनोरंजन पर अधिक ध्यान देने की बात चल रही है… तो फिर सीखने की बात क्यों भूल जाएं? 📚
 
मेरी राय तो यह है कि इस फैसले ने लोगों को बहुत परेशान कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कह दिया है कि यह एक राजनीतिक फैसला है, और मैंने इसकी बात समझ नहीं पाई। अगर सच्चाई तो यही हो कि लोगों को सीटें बर्बाद करने की जरूरत है, तो फिर हमारे देश के लिए यही सही निकलेगा? मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाने की बात है तो सच्चाई को नकारना आसान है। 🤔🚑
 
नहीं समझ पाऊं, ये तो कुछ नियामक बोर्ड का ही काम है 🤔। सीटों पर फिक्र करने की ज़रूरत नहीं है, मरीज़ों को अच्छा इलाज देना ही सबसे ज़रूरी बात है। ये मेडिकल फाउंडेशनल्ड कोर्ट तो मरीज़ों की ज़िंदगी पर क्या ध्यान देती है? 😒। और अब यह तो राजनीति की खेल ही बन गई है, सिर्फ वोट पाने के लिए 🤷‍♂️
 
बोलते बोलते देख रहा हूँ कि सरकार की योजनाएँ वास्तविकता से कितनी दूर हैं। इस फैसले पर दिल्ली हाई कोर्ट की राय क्यों नहीं थी? लगता है कि यह एक पोलिटिकल डील था। लेकिन मेडिकल स्टैंडर्ड तो हमारी जान-माल की बात है। अगर हम ध्यान नहीं देते तो मरीज़ पर कैसा असर पड़ेगा?
 
अरे ये सचमुच भारी मामला है 😂😅। मैंने पढ़ा है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले से सहमति नहीं व्यक्त की है। मुझे लगता है कि यह फैसला तो बिल्कुल भी सही नहीं है, लेकिन फिर भी हमारे देश में कई चीजें ऐसी हैं जो सचमुच अजीब हैं। मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि मरीजों को अच्छा इलाज मिल सके। लेकिन अगर हमारे नेताओं को खुश करने के लिए बोलते रहें, तो सब कुछ फेल हो जाएगा। 🤦‍♂️😒
 
मुझे यकीन है कि अगर सरकार ने इस फैसले में सहयोग नहीं किया है तो शायद वे इसमें अपनी राजनीतिक लाभ की बात कर रहे हैं। 😐

अगर हम सच्चे दृष्टिकोण से देखते हैं तो यह फैसला खुद को खराब करने जैसा है, क्योंकि अगर मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो मरीजों की जिंदगी सही तरीके से नाहीं चल पाएगी।

मुझे लगता है कि हमें इस फैसले के बारे में और अधिक जानने की जरूरत है, क्योंकि अगर यह राजनीतिक निर्णय है तो इसका परिणाम देश के लिए कैसा होगा। 🤔
 
ज़रूर, ये फैसला बहुत दुखद है... मेडिकल स्टैंडर्ड की बात है, तो हमारे देश में ऐसे कई मामले होते हैं जहां मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिलता। अगर हम सीटों को बर्बाद करने की बात कर रहे हैं, तो ये एक बड़ा खेल है... लेकिन मरीजों की जान जोखिम में न होनी चाहिए। 🤕
मुझे लगता है कि हमारे देश में मेडिकल सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए और काम करने की जरूरत है। अगर हम एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं, तो शायद हम इस समस्या से निपटने में सफल हो पाएंगे। 💡
अब, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने यह फैसला नहीं स्वीकार किया है, तो ये एक बड़ा सवाल उठता है... क्या हम अपने देश में मेडिकल सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कोई कदम उठा पाएंगे? 🤔
 
मुझे लगता है कि ये फैसला बहुत ज्यादा विवादित हुआ है। अगर हम सीटों पर ध्यान न देंगे, तो अस्पतालों में मरीजों की भर्ती होने में भी समस्या हो सकती है। लेकिन अगर हम सीटों को बर्बाद करने वालों की बात नहीं करते, तो मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाएगा। मुझे लगता है कि अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों को बहुत ज्यादा काम होता है। वे लोग हमेशा बीमार होते हैं, उनकी शिफ्ट बदलनी पड़ती है, और फिर भी उन्हें अपने परिवार को खुश रखना होता है।
 
यह देखकर तो बहुत जोश आ गया 🤯 डॉक्टरों की बात सुनते हैं और फिर यह सुनकर क्या करें? हमारे देश में परेशानियां बढ़ रही हैं, लेकिन कभी निकलने वाली सीटें और सरकारी नौकरियाँ तो चोरों की तरह दी जाती हैं 🤑 लेकिन अगर मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिलता, तो इसका मतलब यह है कि हमारी परिवारों के लोग खुद को खतरे में डाल रहे हैं। इससे निकलने वाली सीटें और सरकारी नौकरियाँ क्या दिल्ली हाई कोर्ट की ताकत नहीं? 🤔
 
मुझे लगता है कि ये फैसला भी पहले से ही लेने वाले नेताओं की तरह है। जैसे ही उन्हें कोई समस्या नहीं आती, तो उन्होंने यह फैसला लिया। मैं सोचता हूँ कि अगर पहले हमारे देश के कई छोटे-छोटे शहरों में स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी तरह से प्रदान नहीं की जातीं, तो क्या हमारा यह बड़ा शहर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं वाला है? 🤔

मैं याद करता हूँ कि मेरे पिताजी ने जब भी बीमार थे, हमारे गांव का एक छोटा सा अस्पताल ही था। वहाँ पर डॉक्टरों और नर्सों ने अच्छी तरह से उनका इलाज किया। यहाँ आज भी कई जगहें हैं जहां मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाया है, इसलिए मुझे लगता है कि हमें अपने देश के विकास पर ध्यान रखना चाहिए। 🌳
 
बस यह तो सरकार जैसी ही सड़कें भरने का खेल है ना... और अब मेडिकल फील्ड में भी यही दंगाई हैं। कुछ लोग सीटों की बातें कर रहे हैं लेकिन अगर हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते, तो आगे चलकर और भी ज्यादा समस्याएं आ जाएंगी। यह फैसला जरूर एक राजनीतिक निर्णय है, लेकिन क्या इससे मरीजों की मदद होगी, यह तो मुझे संदेह है... 🤔
 
🤔 यह फैसला मुझे बहुत अजीब लगता है... दिल्ली हाई कोर्ट ने सोचा कि अगर हम इंटर्न्स को कम कर देते हैं तो सब अच्छा चलेगा, लेकिन मेरा mann say hai ki यह बहुत wrong hai... 🚫 अगर हम इंटर्न्स को कम करते हैं तो निकलने वाली बीमारियों को ठीक करने वाले डॉक्टरों की कमी बढ़ जाएगी... मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान नहीं देते हैं तो मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाएगा, यह बात बहुत sahi hai... 🤷‍♀️
 
अरे ये फैसला बिल्कुल सही नहीं है 🤔 कुछ लोग फिक्र कर रहे हैं कि क्या 50 सीटें बर्बाद होंगी लेकिन ये एक डॉक्टर को पेशेवर बनाने का मौका नहीं देते। अगर हम मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान न दें, तो मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिलेगा। और फिर भी इस फैसले को अपने आप में एक राजनीतिक निर्णय होने की बात कह रहे हैं। मुझे लगता है कि हमारे पास यह सब सोचकर कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हम डॉक्टरों के लिए अच्छे विकल्प दें और युवाओं को अपने भविष्य की ओर इशारा करें।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔। मुझे लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने बिल्कुल सही कहा है। अगर हम मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान नहीं देते, तो मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाएगा। और लोग सीटों को बर्बाद करने की बातें कर रहे हैं, लेकिन इससे किसी काम कुछ नहीं होता। हमें अपने देश के महान नेताओं जैसे डॉ. अम्बेडकर जी का संदेश याद रखना चाहिए - 'स्वास्थ्य दिल्ली का राज' 🏥💊। लोगों को अच्छा इलाज मिलने के लिए, हमें अपने डॉक्टरों और अस्पतालों की सराहना करनी चाहिए।
 
इस फैसले से लोगों में जोश भरने की क्या जरूरत है? हम इतने बेचारे हैं कि सरकार ने तो एक ही मंजूरी देने से ही खुश होना चाहिए, और फिर भी हम लोग उसकी राजनीतिक रणनीतियों पर विश्वास करते रहे। तो क्या यह सचमुच हमारी जरूरत का समाधान है? मैंने जिस बेटी की माँ है जो आगामी डॉक्टर बनने की सोचती है, उसे अपनी पढ़ाई को पूरा करने देने की जरूरत है।
 
कोर्ट का यह फैसला बिल्कुल सही नहीं लग रहा है 🤔। अगर सरकार ने ऐसी योजना बनाई थी, तो फिर इससे भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए, लेकिन कोर्ट की बात समझ में नहीं आ रही है 🙅‍♂️। सरकार का दावा है कि यह योजना कम महंगी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह तो एक राजनीतिक फैसला था, न कि सच्चे उद्देश्यों से 🤑। मैं खुश हूं कि कोर्ट ने ऐसी योजनाओं पर सवाल उठाया है, लेकिन अब यह देखना होगा कि सरकार कैसे आगे बढ़ती है 💪
 
यार, यह फैसला मुझे बहुत चिंतित कर रहा है 🤔। अगर सीटें बर्बाद हो जाएं तो क्या मरीजों की देखभाल कैसे होगी? यह तो एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला लेने में सीताराम येचुरी जी की भूमिका थोड़ी अस्पष्ट 🙄। राज्य सरकार और केंद्र सरकार को एकजुट होकर इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर हम व्यवस्था और सेवाओं को सुधारने में लगे रहते हैं तो मरीजों की मदद करने के लिए हमारी पूरी कोशिश कर सकते हैं। 🙏
 
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