अरे ये तो बहुत बड़ा फैसला है
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह सोचा होगा कि अगर हम मेडिकल स्टैंडर्ड पर ध्यान नहीं देते, तो मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाएगा। लेकिन शायद जस्ता में भी बात कह रहे हैं कि कुछ लोग सीटों को बर्बाद करने की बातें कर रहे हैं। तो फिर क्या है यह राजनीतिक निर्णय? क्या हमारे देश में शिक्षा और स्वास्थ्य पर इतना ध्यान नहीं दिया जा सकता?