’मुर्शिदाबाद में बाबरी बनना तय, हिम्मत है तो गिराओ’: कौन हैं मस्जिद का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं, TMC ने सस्पेंड किया

बाबरी मस्जिद पुरानी बात है और फिर भी लोगों में बहुत गर्मागरम होती है... 🤯 मुझे लगता है कि अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ बनाएं तो उसकी स्थिति समझ नहीं मिलेगी। क्योंकि उस परिवार की गहराई और यादगार मूल्य हमारे परिवार की तरह नहीं होते।

अब भी लोग बहुत तर्कसंगत हैं... कुछ लोग कहते हैं कि यह मस्जिद पुरानी है तो उसका भविष्य सुरक्षित नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि हमारे देश में कई मस्जिदें हैं और उनकी खुशी के लिए हमें अपनी परवाह न करनी चाहिए।

लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा सोचना भी गलत है। क्योंकि अगर हम एक-दूसरे की बात नहीं सुनते और समझते, तो देश में शांति से नहीं चल सकता। 🤝
 
बाबरी मस्जिद की बात करते हुए मुझे लगना है कि ये मस्जिद बनाने का सवाल बहुत पुराना हो गया है 🙏, जैसे कि हमारे परिवार के सदस्य भी नहीं बदले हैं। अगर हम अपने परिवार के नाम से कुछ भी करें तो वो हमारे परिवार के सदस्यों की तरह यादगार होता है और उसकी स्थिति हमारी नहीं होती। बाबरी मस्जिद की बात करते हुए मुझे लगता है कि हमें अपने परिवार को पहले सबसे प्यार करना चाहिए और फिर देश को।
 
बाबरी मस्जिद, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है न... लेकिन कबीर जी की बात सुनकर लगता है कि हमें अपने परिवार के नाम से नहीं लड़ता हूं... यादगार बने रहने की बात भी सुंदर है... अगर हम खुद को मूर्त रूप देने की कोशिश करें तो फिर स्थिति और भी जटिल हो जाती। नाहीं, यही सही है, अपने परिवार का नाम हमेशा हमारे साथ रहता है... और कबीर जी की बात सुनकर लगता है कि हमें अपने परिवार की तरह यादगार बनने की कोशिश करनी चाहिए। 🤔
 
मुझे लगता है कि यह बात हुमायूं कबीर जी ने कही तो नहीं? मैंने उनकी कोई पुरानी भाषा पढ़ी है जिसमें ऐसी बातें नहीं थीं। अगर हमारे परिवार के नाम से कुछ किया जाए तो वह अपने परिवार के सदस्यों की तरह यादगार होता। लेकिन मस्जिद बनाने की बात करते हुए, मुझे लगता है कि यह एक अलग मामला है। मैंने सुना है कि मस्जिद का निर्माण करने वालों ने अपने परिवार के सदस्यों की तरह यादगार और महत्वपूर्ण जगह बनाई थी। मुझे लगता है कि यह बात ठीक हो सकती है, लेकिन मुझे अभी तक इसके पीछे के तर्क नहीं दिखाए गए हैं। 🤔
 
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