’मुर्शिदाबाद में बाबरी बनना तय, हिम्मत है तो गिराओ’: कौन हैं मस्जिद का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं, TMC ने सस्पेंड किया

हुमायूं कबीर कहते हैं, 'मेरी पार्टी TMC में खराब स्थिति में है, वो अपनी नई पार्टी शुरू करने की सोच रहा है। इसके बयानों का कोई मूल्य नहीं। बाबरी मस्जिद के साथ भारतीय मुस्लिमों का कोई लेना-देना नहीं है।'
 
बात तो ये है कि कबीर खलीला जी की पार्टी TMC में खराब स्थिति में आ गई है। अब उन्होंने अपनी नई पार्टी शुरू करने की बात कह दी है, लेकिन यह तो एक बड़ा सवाल है कि क्या वो उनकी पूर्व पार्टी से अलग से आ रहे हैं या बस थोड़ी फेरबदल कर रहे हैं। और बाबरी मस्जिद जैसी चीजों में लेना-देना करने से कोई लाभ नहीं होता। यह तो एक ऐतिहासिक विवाद है जिसका पीछे बहुत सारे राजनीतिक रूप भी हैं। मुझे लगता है कि कबीर खलीला जी का बयान तो एक राजनीतिक अभियान के हिस्से के रूप में होगा, लेकिन यह तो हमारे देश के इतिहास से निकलकर नहीं चल सकता।
 
हाल ही में TMC को खराब स्थिति में देखकर तो बहुत चिंतित हूँ। कबीर जी के बयान सुनने पर लगता है कि पार्टी की भविष्य की योजनाएं अच्छी नहीं हैं। बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर भी बहुत संवेदनशीलता की जरूरत है। हमें अपने देश की एकता और सम्मान को बनाए रखना चाहिए। पार्टियों के बीच खलल फैलने से बचने के लिए हमें एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए 🤗💬
 
कबीर जी की बातें पूरी तरह से सही हैं 🤔। तृणमूल कांग्रेस की स्थिति वास्तव में बहुत खराब हो गई है, और यह देखना मजाक है कि वे अपनी नई पार्टी शुरू करने की सोच रहे हैं। इसका मतलब है कि वे अपनी गलतियों से सीखने के बजाय, फिर से उसी रास्ते पर चलना चाहते हैं।

और बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर, मैं कहूंगा कि यह एक बहुत बड़ा और जटिल मुद्दा है। हमें अपने इतिहास और संस्कृति को समझने की जरूरत है, न कि एक पक्ष या दूसरे पर ध्यान केंद्रित करना। मुस्लिम भारतीयों के साथ लेना-देना नहीं होना चाहिए, लेकिन हमें अपनी विविधता को महत्व देना चाहिए और सभी धर्मों और समुदायों के साथ शांति और समझ मिली। 🙏
 
बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों पर तो हमेशा विवाद बना रहता है लेकिन यह सच है कि पूरे भारतीय समाज में इसके साथ हुए अन्याय और भेदभाव को ठीक करने की जरूरत है। कबीर जी की बात सुनकर लगता है कि TMC में बदलाव जरूरी है, लेकिन नई पार्टी शुरू करने से पहले उन्हें अपनी राजनीतिक विरासत को समझना चाहिए। कबीर जी ने बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर बहुत स्पष्ट और सम्मानजनक तरीके से बात की है, यह हमें एक नई दिशा दिखाता है कि कैसे हम अपने विविधता को एकता में लाकर आगे बढ़ सकते हैं।
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔। कबीर जी की पार्टी TMC में खराब स्थिति में होने की बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके बयानों का कोई मूल्य नहीं। तो वो नई पार्टी शुरू करने की सोच रहे हैं? यह जरूरी नहीं है कि हमें उनकी निजी राजनीतिक योजनाओं की वजह से दूसरों पर ध्यान केंद्रित करना पड़े।

बाबरी मस्जिद जैसी मुद्दों पर बयान देना एक जटिल मामला है। कबीर जी ने अपने बयान को कितना विशिष्ट और स्पष्ट कहा? क्या उन्होंने इस पर प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखा? इन सवालों के जवाब देने से ही हम समझ सकते हैं कि कबीर जी की राजनीति में सच्चाई और ईमानदारी कितनी मजबूत है।
 
बस, हमारे देश में तो कभी ऐसा ही होता है... किस पार्टी का नेता अपनी पार्टी से जाने से पहले तो बाहर निकलकर कुछ कहने लगते हैं, लेकिन ये बहुत ही अस्पष्ट चेहरे से तय नहीं करते हैं कि वो नई पार्टी शुरू करना चाहते हैं या फिर खुद अपनी पार्टी को मजबूत बनाना चाहते हैं। और तो भी बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर उन्हें बहुत स्पष्ट स्थिति लेना चाहिए, हमारे देश में तो ऐसा कभी नहीं होता। और टीएमसी में खराब स्थिति होना? यह तो एक बड़ा सवाल है। क्या उनकी पार्टी की समस्याएं इतनी गहरी हैं?
 
कबीर जी के बयान सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ 🤔। टीएमसी में खराब स्थिति होने की बात सचमुच दुखद है, लेकिन कबीर जी ने कहा कि वो अपनी नई पार्टी शुरू करने की सोच रहे हैं। इसकी वजह क्या है? टीएमसी में इतनी खराब स्थिति होने का मतलब है कि उनके समर्थन वालों को कोई जवाब नहीं मिल रहा था, इसलिए उन्हें नई पार्टी शुरू करने की जरूरत है। लेकिन कबीर जी ने बाबरी मस्जिद से जुड़े मुद्दे पर भी अपना बयान दिया। इससे लगता है कि कबीर जी को लगता है कि भारतीय मुस्लिमों और हिंदू समुदाय के बीच कोई सामंजस्य नहीं है। लेकिन यह सचमुच सच है?
 
अरे, तो कबीर का बयान वाकई दिलचस्प है ... मेरा मानना है कि ये TMC की नई चुनौती हो सकती है, लेकिन कबीर जी का कहना है कि उसके बयानों का कोई मूल्य नहीं... यह तो कुछ और दिखता है। बाबरी मस्जिद की बात करें तो हमें अपने राष्ट्रवादी और सामाजिक समरसता पर ध्यान देना चाहिए। कबीर जी का कहना है कि भारतीय मुस्लिमों के साथ कोई लेना-देना नहीं है, तो यह एक बहुत बड़ा बयान है। हमें अपने समाज में शांतिपूर्ण बातचीत और सहानुभूति की जरूरत है
 
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