मुस्लिमों के एडमिशन का विरोध, हिंदू स्टूडेंट्स की पढ़ाई अटकी: वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता गई; स्टूडेंट लौटे, आगे एडमिशन का पता नहीं

श्रीनगर में श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी, जो एक हिंदू-मेजॉरिटी संस्थान है, ने श्राइन बोर्ड के फंड पर चलना है। यह साल 2004 में बनाई गई थी।
 
बड़ा त्रास, सारा पैसा श्राइन बोर्ड को जा रहा है 🤯। तो एक यूनिवर्सिटी जो हिंदू-मेजॉरिटी है, अब श्राइन बोर्ड पर चलने का निर्णय लेती है। यह साल 2004 में बनाई गई थी, तो क्या शायद तब से कोई बदलाव नहीं आया? 🤔

मुझे लगता है कि यूनिवर्सिटी के पास अधिकारियों को अपने वित्तीय लेखाएं देखनी चाहिए। तभी पता चलेगा कि क्या सब कुछ सही से हो रहा है। शायद यूनिवर्सिटी ने इस बारे में जानकारी नहीं दी है, तो फिर भी पैसा देने से पहले थोड़ा सोच लेना चाहिए। 💡
 
श्रीनगर की यूनिवर्सिटी तो एक अच्छा काम कर रही है 🤗, लेकिन देखो तो उन्होंने श्राइन बोर्ड के फंड पर चलना शुरू कर दिया है, यह तो थोड़ा चिंताजनक लग रहा है। मुझे लगता है कि इससे श्राइन बोर्ड की आय और वित्तीय स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है, जो भविष्य में उनके कामों को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन, यह एक अच्छा अवसर भी है कि यूनिवर्सिटी अपने शिक्षा और अनुसंधान कार्यक्रमों में सुधार करने पर ध्यान दे। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी शिक्षा प्रणाली उच्च गुणवत्ता वाली हो ताकि वह अपने छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सके।
 
🤔 श्रीनगर में वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी की इस समस्या में तो हमारी सरकार के पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन देखिए, यह संस्थान हिंदू-मेजॉरिटी है... 🤷‍♂️ तो इसका भी हकीकत में एक महत्वपूर्ण स्थान है। क्या हम इसे छोड़ सकते हैं?

ज़रूरत है कि हम सभी बाहरी देशों के लिए अलग-अलग विद्यालय बनाएं तो... 🤦‍♂️ इससे और भी बड़ी समस्या आ जाएगी। यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा श्राइन बोर्ड है, जिस पर इसका फंड चल रहा है। क्या हम इसे समझने में सक्षम हैं? 🤔
 
😊 मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण खबर है 🤕। श्रीनगर में श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी को श्राइन बोर्ड के फंड पर चलना सुनकर मुझे बहुत निराशा हुई 😔। लेकिन एक सवाल उठता है, क्या यूनिवर्सिटी को अपना संचालन पूरी तरह से सरकार से दूर रखना चाहिए? 🤔

मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि यूनिवर्सिटी अपने आप में मजबूत और आत्मनिर्भर बने, न कि किसी अन्य एजेंसी पर आश्रित होने का। सरकार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षा संस्थानों को अपने विद्वानों और पेशेवरों को खोजने में मदद किया जाए, न कि किसी अन्य तरीके। 🤝

यह एक अच्छा अवसर है कि हम शिक्षा के महत्व पर चर्चा करें और इसके भविष्य की दिशा को सुरक्षित बनाएं। 👍
 
बिल्कुल! वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं को समर्थन देना जरूरी है, खासकर जब वे हमारे समाज में भ्राष्टाचार और अनावश्यक खर्चों की समस्या से निपटने के लिए काम कर रही हैं **👍**

मुझे लगता है कि श्राइन बोर्ड ने इस स्थिति में सही फैसला लिया है। वैसे तो यूनिवर्सिटी का उद्देश्य शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना है, लेकिन जब उनके पास खुद के नियम बनाए जाते हैं तो यह समाज के लिए बुरा हो सकता है **😬**

लेकिन अगर वे अपने फंड का इस्तेमाल सही तरीके से करेंगे और शिक्षा और अनुसंधान में निवेश करेंगे, तो यह एक अच्छा दिशा होगी। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाएं हमारे समाज के लिए सहायक साबित होंगी **💪**

(नईदुनिया न्यूज - श्राइन बोर्ड ने वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी को समर्थन देने का फैसला किया : https://www.newindianexpress.com/ne...-funding-for-mata-vishno-devi-university.html)
 
श्रीनगर की यूनिवर्सिटी, जो माता वैष्णो देवी के नाम पर है, बहुत बड़ा और पुराना संस्थान है। यहाँ के छात्रों के लिए पढ़ाई करना एक अच्छा मौका है। लेकिन, इसका एक सवाल है - क्या यहाँ की यूनिवर्सिटी को श्राइन बोर्ड द्वारा फंडिंग देना उचित है?
 
मैंने देखा कि श्रीनगर में माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी ने अब अपने बजट पर श्राइन बोर्ड से मदद लेने की जानकारी दी। यह तो एक अच्छा निर्णय है लेकिन मैं थोड़ा चिंतित हूं कि हमारे देश में अक्सर ऐसी स्थितियां आ जाती हैं जहां सरकार और प्रशासनिक अधिकारी अपने फैसलों को बदलने में असमर्थ रहते हैं।

मुझे लगता है कि यूनिवर्सिटी ने अच्छी तरह से बजट तैयार कर लिया होगा, इसलिए उन्हें श्राइन बोर्ड से मदद लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर वास्तव में व्यवस्थाओं में कोई समस्या आ गई है और यूनिवर्सिटी को सहारा देने की जरूरत है, तो यह एक अच्छा फैसला है। 🤔
 
शिक्षा तो हमेशा सबसे अच्छी निवेश होता है... और यूनिवर्सिटी में भी शिक्षा का महत्व बहुत ज्यादा है। मैंने श्रीनगर में स्कूल जाने के बाद माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी से जुड़ने का फैसला किया। वहां की शिक्षा बहुत अच्छी है, और वहां के प्रोफेसर भी बहुत सहयोगी हैं। लेकिन अब यह बात तो सभी को पता है कि स्कूलों में सरकारी फंडिंग से नहीं चल सकते, हमें विद्यार्थियों और उनकें परिवारों को मदद करनी चाहिए।
 
बड़ा दिलचस्प है यह समाचार... श्रीनगर में जो विश्वविद्यालय है, वह तो एक अलग बात है और श्राइन बोर्ड की स्थिति तो बहुत चुनौतीपूर्ण होगी। यूनिवर्सिटी ने तो अपना नाम बदलने का फैसला कर लिया, लेकिन यह सवाल उठता है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से कोई समझौता नहीं हुआ। शायद यूनिवर्सिटी के पास अपनी स्थिति को सुधारने के लिए कुछ तय करने की जरूरत होगी।

मैं उम्मीद करता हूँ कि विश्वविद्यालय की नई स्थिति में यह सवाल सुलझाया जाएगा और वह श्राइन बोर्ड को भी अपनी पार्टी के साथ मिलकर आगे बढ़ने में मदद करेगा।
 
श्रीनगर में वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के लिए एक बड़ा सवाल उठ रहा है, क्योंकि यह तभी बनाया गया था जब भारतीय जनता पार्टी शासन के दौरान हुआ था। अब यह संस्थान श्राइन बोर्ड के फंड पर चल रहा है। यह एक बड़ा सवाल उठाता है कि क्या यह संस्थान अपने स्वयं के बजट से चलने की क्षमता रखता है, या वह वास्तव में श्राइन बोर्ड से निकाला पैसा चल रहा है।
 
रिया... श्रीनगर की वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी ने अब अपने संस्थापक की याद में एक नए फंड को शुरू किया है। यह बहुत अच्छा काम है, लेकिन मुझे लगता है कि इस फंड की व्यवस्था करने के लिए हमें अपने संस्कृति और परंपराओं को जाना चाहिए।

कुछ लोग कहते हैं कि यह यूनिवर्सिटी हिंदू-मेजॉरिटी है, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक अच्छा बात नहीं है। हमारी देश की विविधता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना ज़रूरी है।

लेकिन मैं इस फंड को तोड़ने का कोई तर्क नहीं दूंगा। यह यूनिवर्सिटी ने बहुत अच्छा काम किया है, और हमें इसकी सफलता का जश्न मनाना चाहिए।
 
बिल्कुल सही किया गया... श्रीनगर में जो कुछ भी निर्णय लिया गया है वो तो समझौते की बात है। यहां से एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि यूनिवर्सिटी के नाम पर चलने से पूरे हिंदू समुदाय पर गंभीर आरोप लग सकते हैं... लेकिन श्राइन बोर्ड ने कहा है कि यह फंड पूरे व्यापारिक समुदाय के लिए है... बस तो समझेंगे और आगे बढ़ेंगे।
 
श्रीनगर में भारी मानसून आ रहा है और लोग खुश होंगे, लेकिन मेरा मन माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी पर चलने वाले श्राइन बोर्ड की बात से तोड़ गया है। मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा है, खासकर जब हमारे पास इतने अच्छे शिक्षण संस्थान भारतभर में बन गए हैं जो देश की युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य की दिशा में ले जा सकते हैं।

मुझे लगता है कि हमारे यहाँ शिक्षा को और भी महत्व देने की जरूरत है, ताकि हर व्यक्ति को अच्छी शिक्षा मिल सके। इससे हमारा देश और भी मजबूत हो सकता है। लेकिन मुझे लगता है कि श्राइन बोर्ड के फंड पर चलना एक अच्छा विचार नहीं है, खासकर जब हमारे पास इतने संसाधन हैं।
 
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