मौसम का अलर्ट: पहाड़ों से मैदान तक ठंड का कहर, कश्मीर-हिमाचल में पारा माइनस; उत्तर भारत घने कोहरे में लिपटा

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत उत्तर भारत में अब गलन वाली ठंड पड़नी शुरू हो गई है। कश्मीर समेत पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की चोटियों पर बर्फबारी के बाद पहाड़ों से आ रही ठंडी हवाएं मैदानी राज्यों में ठिठुरन बढ़ा दी है। कई इलाकों में नदी-नाले और जलस्रोत जम गए हैं। उत्तर से पूर्वोत्तर और पश्चिम से पूर्वी राज्यों तक कोहरे का कहर भी बना हुआ है।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों, खासकर गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड और पाले के कारण नदियां, नाले और झरने जम गए हैं। इससे तापमान शून्य से 11-12 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है। केदारनाथ धाम की चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गई हैं। पाले की कई इंच मोटी परत के बीच भागीरथी नदी में बहुत कम पानी बह रहा है। केदार गंगा, ऋषिकुर नाला, पागल नाला, चीड़बासा नाला भी पूरी तरह जम चुके हैं। गंगोत्री में पानी की आपूर्ति के लिए पाले को आग में पिघलाकर पूरा किया जा रहा है।

उत्तर से पूर्वोत्तर और पश्चिम से पूर्वी राज्यों तक कोहरे का कहर भी बना हुआ है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में भीषण शीतलहर चल सकती है। 5-10 जनवरी के दौरान पश्चिम और पूर्वी राजस्थान में और 6-7 जनवरी के दौरान झारखंड में शीतलहर चलने की संभावना है।

पंजाब में ठंड ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। रविवार को प्रदेश के दिन के तापमान में औसतन 2.1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जिससे अधिकतम तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री नीचे पहुंच गया। अमृतसर में शीत दिवस की स्थिति रही जबकि बेहद घने कोहरे के कारण यहां दृश्यता शून्य रिकॉर्ड की गई। एसबीएस नगर में दृश्यता महज 50 मीटर और गुरदासपुर में 200 मीटर रही।

मौसम विभाग ने सात दिनों के दौरान उत्तर भारत और उससे सटे मध्य भारत में रात और सुबह के समय बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना जताई है। सोमवार को उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में भीषण शीतलहर चल सकती है। 5-10 जनवरी के दौरान पश्चिम और पूर्वी राजस्थान में और 6-7 जनवरी के दौरान झारखंड में शीतलहर चलने की संभावना है।
 
मेरी बात, ये ठंड तो तो आसमान को भी खामोश कर रही है! 🌨️ कश्मीर से लेकर पंजाब तक, हर जगह ठंडने का माहौल है। क्या कोई चुनौती नहीं है? यहाँ पर भी, जैसे कहीं अनुभव किया है, जब हवाएं खुलती हैं तो पानी भी बहता है, लेकिन अब यह ठंडने से जम गया है। यह तो सरकार से कहे बिना हमें पता चल जाता है कि देश में ऐसे बदलाव क्यों हो रहे हैं। मुझे लगता है कि पाले की परतें गहराई से नहीं घिसी गई हैं, लेकिन फिर भी, हम तो ठंडने के लिए दुबारा तैयार हो जाते हैं। 🤔
 
ऐसा लगता है जैसे हम गंभीरता से नहीं लेते 😔, कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक बर्फबारी के बाद ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में आ गई हैं। लोग अपने घरों को तैयार कर रहे हैं पर पूछिए कि जब तक ठंड बहुत गहरी न जाए, हम अपने जीवन कैसे जी सकेंगे। यहाँ हमारा उत्तराखंड, पंजाब जैसे राज्य में बर्फ से ढक जाना आसान हो सकता है, लेकिन ये ठंड एक बार फिर हमारे ऊपर उठने की तैयारी कर रही है।
 
भाई, यह ठंड बिल्कुल अजीब लग रही है 🥶 यारों को साथ में बैठकर देखें, खास तौर पर उत्तराखंड जैसे जगहों पर। कभी भी नदियां और नाले जम गए हैं और फिर पानी बहना शुरू होता है। यह बिल्कुल अजीब है 🤔 मौसम को समझने की कोशिश करने वाले लोगों से भी मजाक उड़ाने लगे हैं। शीतलहर निकलने से पहले ठंड का एहसास नहीं होता है, फिर तो कहीं भी खाने-पीने जाने पर सोचें। यह ठंड तो उत्तराखंड, पंजाब जैसे जगहों पर ही महसूस हो रही है 🤯
 
वाह, यह ठंड तो बहुत गड़बड हो गई है! 🥶 उत्तर भारत में जैसे ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गलन वाली ठंड पड़नी शुरू हो गई, तभी पंजाब और हरियाणा में ठंड ने फिर से जोर पकड़ लिया। इसका मतलब है कि उत्तर से पूर्वोत्तर और पश्चिम से पूर्वी राज्यों तक कोहरे का कहर भी बना हुआ है। यह ठंड तो तेजी से बढ़ती जा रही है, नदियां, नाले और झरने जम गए हैं, तापमान शून्य से 11-12 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है। केदारनाथ धाम की चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गई हैं। यह ठंड तो बहुत दुर्गम है, लेकिन हमें होठों पर चुंबन देना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि ये ठंड बहुत ज्यादा हो रही है, मैं अपने गाँव में भी तापमान 10 डिग्री नीचे चला गया था। मेरे दोस्तों और परिवार के लोग ठीक हैं, लेकि मेरे पिताजी को फेफड़ों में संक्रमण हुआ है और हमें इसका इलाज करने के लिए अस्पताल जाना पड़ रहा है।
मुझे लगता है कि ठंड बहुत ज्यादा होने से नालियों और नदियों में पानी जम गया है, इससे हमारे समुदाय को बहुत परेशानी होगी।
 
🌨️ यह ठंड बहुत ज्यादा बढ़ गई है कि मैदानी इलाकों में तापमान शून्य से 11-12 डिग्री सेल्सियस नीचे चल गया है। गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है तो नदियां, नाले और झरने जम गए। 🌊 केदारनाथ धाम की चोटियां बर्फ से ढककर बहुत खूबसूरत दिख रही हैं। लेकिन फिर भी ठंड बहुत ज्यादा बढ़ गई है कि यह ठंद मैदानी इलाकों को बहुत परेशान कर रही है। 🌨️
 
अरे ये तो फटाफट बदलाव आ गया है! पहले गर्मियों में ठंड पड़नी और अब सर्दियों में तापमान इतना बढ़ जाता है कि नदियां जम जाती हैं... यह कैसे संभव है? मुझे लगता है कि हमारे जलवायु परिवर्तन को लेकर सरकार और मौसम विभाग को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करना चाहिए। तापमान की यह बढ़ती सीमा के पीछे की जड़ें समझने की जरूरत है। हमें जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट होने की जरूरत है और सरकार को हमारी बात माननी चाहिए।
 
अरे, यह ठंड तो बहुत ज्यादा हो गई है 🥶, नदियां नाले और झरने जम गए हैं... केदारनाथ धाम की चोटियां बर्फ से ढकी हैं! पूरे उत्तर भारत में ठंड बढ़ रही है और लोग खुद को सुरक्षित रखने के लिए घरों में बैठने लगे हैं। कोई इलाज नहीं है, बस ठंड से लड़ना ही बाकी चीज है ❄️
 
अब ठंड तो भारी हो गई, मैंने बाहर खेलने नहीं जाया 😂। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई तो चोटियां पर टपक रही हैं, लेकिन मैदानी राज्यों में ठिठुरन बढ़ गई, नदी-नाले जम गए, यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है 🤕। केदारनाथ धाम की चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढकी हैं, लेकिन पाले की परत इतनी मोटी है कि भागीरथी नदी में बहुत कम पानी चल रहा है, यह तो एक बड़ा समस्या है 🌊
 
तो यह तो बहुत ही भयावह स्थिति है जैसे कि कोई बड़ा तूफान आ गया है 🌪️, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि हमें इन परिवर्तनों की बात करनी चाहिए और उनके पीछे क्या कारण हैं? क्या यह ग्रीनहाउस गैसों के कारण हो रही है? और अगर हां, तो हमें इसके बारे में बोलना चाहिए और सावधानियां बरतनी चाहिए।
 
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