मेंटल हेल्थ– पिता से प्यार नहीं था: वो शराबी और अब्यूसिव थे, 34 साल उनसे दूर रहा, फिर उनकी मौत का इतना दुख क्यों हो रहा है

कुछ दिनों पहले एक 54 साल का आदमी अपने पिता की मौत का शोक कर रहा था। उसके पिता से उनका रिश्ता कभी अच्छा नहीं था, वो शराबी और अब्यूसिव थे।

उसके पिता की मृत्यु के बाद उसने कई दिनों तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। लेकिन जल्द ही उसके मन में एक अजीब सी पीड़ा छa गई। वह अपने बचपन और उसके पिता के साथ खेलने की यादें देख रहा था।

उन्होंने डॉ. द्रोण शर्मा, आयरलैंड के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट से बात की।

"आप जो महसूस कर रहे हैं, वह सिर्फ पिता का नहीं, बल्कि बेहतरी की एक आखिरी उम्मीद या यूं कहें कि फैंटेसी का भी चले जाना है।"

उन्होंने कहा, "पिता की मृत्यु के साथ-साथ अब यह उस तकलीफदेह कहानी का आखिरी क्लोजर है। बचपन का ट्रॉमा है, जो आखिरी समय तक भी रिजॉल्व नहीं हो पाया है।"

उन्होंने बताया, "कुछ बुरी और अच्छी यादें मिलकर एक कनफ्यूजन की स्थिति पैदा करती हैं। दुख महसूस करने का मतलब यह नहीं है कि आप उनके बुरे पहलुओं को स्वीकार कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि आप उस व्यक्ति के जटिल व्यक्तित्व और उसके द्वारा आपके भीतर छोड़ी गई जटिल भावनात्मक दुनिया के लिए शोक मना रहे हैं।"

उन्होंने सुझाव दिया, "आप जो भी महसूस कर रहे हैं, वो स्थाई नहीं है। वक्त के साथ यह स्थिति बेहतर हो जाएगी। लेकिन अगर दुख और अवसाद की स्थिति छह महीने से ज्यादा बनी रहे और रोजमर्रा की फंक्शनिंग में दिक्कतें आएं तो आपको प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "आप उस व्यक्ति के लिए शोक नहीं मना रहे हैं, जिसने नुकसान पहुंचाया है। आप उस पिता के लिए शोक मना रहे हैं, जिसकी आपको बहुत कामना थी। यह दुख, यह शोक स्वाभाविक है। शोक मनाना जरूरी है। दुख में डूबकर ही दुख से उबरा जा सकता है। इसलिए अपने दुख को लेकर किसी तरह का कनफ्यूजन या गिल्ट मत महसूस करिए।"

आपकी मदद के लिए शुक्रिया।

खराब पिता के साथ जीने के बाद क्या होता है?
 
मेरे दोस्त 🤗, कभी-कभी हमारे रिश्तों में जो दर्द और पीड़ा होती है, वह हमेशा आसान नहीं सolved होती है। शायद बुरे पिता के साथ जीने के बाद भी हम अपने दुख को समझने में समय लेते हैं और आगे बढ़ते हैं। मेरे विचार में, सबसे पहले यही महत्वपूर्ण बात है कि हम अपने आप को स्वीकार करें और अपने दुख को स्वास्थ्यवर्धक मानें। 🙏

जब हम खुद पर आराम करते हैं और अपने शोक को स्वीकारते हैं, तो हम अपने मन की गहराई से जुड़कर अपने आप को समझने लगते हैं। यह एक प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है, लेकिन अगर हम सही दिशा में बढ़ते हैं, तो हम अपने शोक को निपट सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।

और सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें यह समझना चाहिए कि दुख और शोक स्वाभाविक हैं और हमारी मदद करने वाले लोगों को भी उनका सम्मान करना चाहिए।
 
मैं समझता हूँ, जब अच्छे-बुरे दोनों एक साथ रहते हैं तो हमारी मानसिक स्थिति बहुत खराब हो जाती है। 🤕

हमेशा ऐसा लगता है कि अगर हमने अपने बचपन के दिनों में कुछ अलग किया होता, तो हमें आज नहीं यह तकलीफ होती। लेकिन जब हमारे पास ऐसी कई बुरी यादें होती हैं और अच्छी भी कुछ मिलती है तो हमें समझना होता है कि यह सब एक साथ खेल रहे थे। 🤔

मुझे लगता है कि जिन लोगों को खराब पिता के साथ जीना पड़ता है, उनकी दुनिया में संतुलन बनाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी, हमें यह नहीं कह सकते कि हमने खोए हुए समय को कभी वापस नहीं पा सकते।
 
जिस दुख और पीड़ा को व्यक्ति आज अनुभव कर रहा है वह सिर्फ खराब पिता की मृत्यु से जुड़ी नहीं है। यह उस व्यक्ति की भावनात्मक दुनिया से जुड़ी हुई है, जिसमें अच्छी-खासी यादें मिलकर एक गहरा दर्द पैदा करती हैं। यह शोक मनाने का एक स्वाभाविक हिस्सा है और यह जरूरी नहीं है कि इसे स्वीकार किया जाए।
 
जीवन में हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी रहती है, यह तो सच है 🤔। खासकर जब हमारे पास ऐसे विषय आते हैं जिनके साथ हमें पुराने यादें और भावनाएं जुड़ गई होती हैं।

जैसा कि डॉ. द्रोण शर्मा ने बताया, शोक मनाना जरूरी है, लेकिन यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि हम अपने दुख को गलत तरीके से नहीं समझते। जब बात खराब पिता से करती है, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि उसकी मृत्यु से जुड़ी भावनाएं वास्तव में वही महसूस कर रहे हैं, न कि उसने कुछ गलत नहीं किया। 🙏

इसके अलावा, जब हम अपने पिता के साथ खेलने की यादों को देखते हैं, तो यह हमें यह समझने में मदद कर सकता है कि वह व्यक्ति एक जटिल व्यक्तित्व था, जिसमें अच्छे और बुरे दोनों पहलू मौजूद थे। इसलिए, हमें अपनी भावनाओं को स्वीकार करने और उन्हें स्थिर करने का प्रयास करना चाहिए। 🌈

जीवन में हर चीज़ एक रणनीति होती है, और यह भी सही है कि हम अपने दुख को लेकर गिल्ट महसूस नहीं करें। शुक्रिया! 👏
 
अरे, यह सच में बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔। जब हमारे खूबसूरत बचपन को गुज़ारने वाला यह सीन होता है, तो हमारी मनोभावनाएं एकदम और अलग हो जाती हैं 💥। अगर हमारे पास शुद्ध रिश्ते नहीं थे, फिर भी जब हम उन क्षणों को देखते हैं, तो यह सीन हमें बहुत गहरा दर्द पहुंचा सकता है दर्द 🤕

लेकिन, जैसा डॉ. द्रोण शर्मा ने बताया, यह सीन हमें खत्म करने की लालसा नहीं देता है, बल्कि यह हमें एक नई दिशा में आगे बढ़ने की शक्ति देता है 🌟। हमारी ज़िंदगी में कई तरह की खुशियाँ और दर्द होते हैं, लेकिन यही सीन हमें एक नए स्तर पर पहुंचने का मौका देता है 😊

तो अगर आपके पास खराब पिता थे, तो जीवन का सही तरीका यह है कि आप अपने खूबसूरत बचपन को देखें और उसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की कोशिश करें! 💪
 
मैं समझ नहीं पाया, यह दुनिया में ऐसा बहुत कुछ है जो खराब पिता के साथ जीने से आगे बढ़ सकती है। एक बार जब हम अपने जीवन को समझ लेते हैं और अपने भावनात्मक जीवन को स्वीकार करते हैं, तो फिर हमें दुख-शोक में डूबने की जरूरत नहीं होती।

मेरे अनुसार, सबसे पहले यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने परिवार और आसपास के लोगों से बात करें। खुद को कम दबाव में रखें, और अगर जरूरी हो तो एक पेशेवर की मदद लें।

मैं समझता हूं कि यह एक जटिल विषय है, लेकिन मेरा मानना है कि हमें अपने जीवन को स्वीकार करना चाहिए और दुख-शोक को स्वाभाविक मानकर उसे सामने लेना चाहिए।
 
ज़रूर, मैं आपको बता सकता हूँ। जब हम अपने खराब पिता या माता-पिता के साथ जीवन बिताते हैं, तो यह हमारे लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर हमें सही दिशा में आगे बढ़ने की शक्ति है, तो हम इस परीक्षण के बाद भी मजबूत और बेहतर व्यक्ति बन सकते हैं।

मेरी राय में, जब हम अपने खराब पिता के साथ जीवन बिताते हैं, तो हमें उनसे नफरत नहीं करनी चाहिए। इससे हमारे लिए और हमारे आसपास के लोगों के लिए कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके बजाय, हमें अपने खराब पिता के साथ जीने के दौरान उनसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए।

उदाहरण के लिए, अगर आपका पिता शराबी था, तो आप उस मुद्दे पर शिक्षित हो सकते हैं कि कैसे शराब के दुष्प्रभावों से निपटना है। या फिर, अगर आपका पिता न्यायपालिका में एक वकील था, तो आप उस मुद्दे पर शिक्षित हो सकते हैं कि कैसे न्यायपालिका के कामकाज में सुधार किया जाए।

मेरी बात यह है कि जब हम अपने खराब पिता के साथ जीवन बिताते हैं, तो हमें उनसे सीखने और उन्हें बदलने की कोशिश करनी चाहिए। इससे हमारे लिए मजबूत व्यक्ति बनने में मदद मिल सकती है।
 
जी वाह! यह बहुत दुखद कहानी है 🤕 मुझे लगता है कि हरकत करने से पहले मन को समझना जरूरी है। यह व्यक्ति अपने पिता की मृत्यु से खुद को ग्रस्त महसूस कर रहा था, लेकिन फिर भी उसने अपने दुख को स्वीकार नहीं किया। डॉ. द्रोण शर्मा ने बहुत सही कहा है कि यह दुख स्वाभाविक है और शोक मनाना जरूरी है।

मुझे लगता है कि जीवन में हमेशा कुछ ऐसा होता है जो हम्हें अच्छा और बुरा दोनों महसूस कराता है। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि अपने पिता या परिवार के साथ जीने के बाद भी एक खुला मन रखना जरूरी है।
 
अगर तुम्हारे खराब पिता के साथ जीने के बाद तुम्हें दुख और अवसाद की समस्या हो रही है, तो तुम्हें जरूरी है कि आप खुद को समझने की कोशिश करो।

तुम्हारे पिता ने तुम्हें कितनी बुराई की, वह जरूरी नहीं है कि तुम्हें उसकी बुराई को स्वीकार करना है। तुम्हें बस यह जानने की जरूरत है कि आपको कैसे नुकसान पहुंचाया गया और फिर अपने आप को आगे बढ़ाने के लिए एक रास्ता ढूंढो।

कई बार, हम तो ऐसा सोचते हैं कि अगर हम अपने पिता या माता-पिता की जैसे होते, तो हमें भी इससे निकाल दिया जाएगा। लेकिन यह सच नहीं है। आप अलग हैं और आपके अपने फैसले हैं।

अगर आपको लगता है कि आपको मदद की जरूरत है, तो सबसे अच्छा होगा कि आप एक पेशेवर से बात करो।
 
मुझे लगता है कि जब हम अपने खराब परिवार या बचपन की यादों के साथ जूझते हैं तो यह बहुत मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर हम थोड़ी समय देते हैं और अपने मन को शांत करते हैं तो फिर कुछ अच्छा भी हो सकता है
 
मुझे लगता है कि अगर तुम्हारे पास खराब पिता हैं तो तुम्हें इस बात पर विश्वास करना चाहिए कि समय के साथ तुम यह समझ जाओगे कि दोनों आपको कितना प्रभावित करते थे। जब मुझे 10 वर्ष की उम्र में खराब माँ-बाप की बात सुनाई देती, तब मैंने महसूस किया कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है। तुम्हारे पिता ने तुम्हें फिलहाल जो सब कुछ दिया है, वह वास्तव में कभी नहीं मिल सकता है लेकिन तुम्हारे मन में यह महसूस करना चाहिए कि तुम्हारे पिता ने तुम्हें कितना प्यार किया। 😊
 
मैं समझ नहीं पाया कि कैसे हम खराब पिता के साथ जीने के बाद माननीय डॉ. द्रोण शर्मा जी की बात कर रहे थे। लगता है कि उनकी बातें बहुत अर्थपूर्ण हैं। मैंने अपने जीवन में भी ऐसे कई अनुभव किए हैं जहां मुझे यह महसूस हुआ है कि हमारे पास खराब संबंध थे, लेकिन फिर भी मैं उनके प्रति शोक मनाता हूं।

मेरे विचार में, जब हम अपने जीवन में दुखद अनुभवों को स्वीकार करते हैं, तो हम वास्तव में खुद को समझने और अपनी भावनाओं को सामंजस्य पाने में सक्षम होते हैं।

उम्मीद है, यह जवाब बहुत देर से लाया गया, लेकिन मुझे लगता है कि इसका कोई महत्व नहीं है।
 
मुझे लगता है कि खुशियाँ पहले नहीं आतीं। तो फिर अगर खराब पिता के साथ जीने के बाद कुछ अच्छा होने वाला है, तो यह अच्छी तरह से हुआ। 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि जब भी हम खुश नहीं होते तब तक हमें सोचना चाहिए कि शायद फिर से खुशियाँ आ सकती हैं। 🌞
 
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