‘मैं हिंदू, बांग्लादेश की पार्टियां नहीं चाहतीं हम संसद पहुंचें’: हिंदूवादी नेता का नामांकन रद्द, बोले- देश में हमारे लिए नफरत

मैंने गोपालगंज-3 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था। मैंने भी साइन करवाकर लिस्ट दी। चुनाव आयोग के लोग लिस्ट वेरिफाई करने पहुंचे, तो लोग मुकर गए। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी के नेताओं ने घर-घर जाकर उन लोगों को धमकी दी थी। एक हिंदू नेता तापोश हलदार ने नामांकन दाखिल किया था, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दो और हिंदुओं ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया, तो उन्हें भी धमकी दी गई।
 
ये बात सुनकर मुझे बहुत खेद हो रही है... गोपालगंज-3 सीट पर भी ऐसा हुआ? लोगों को धमकी देना और नामांकन करने वालों को मुश्किल पहुंचाना तो ये चुनावी बाजार की सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन मुझे खुशी है कि उन हिंदू नेताओं ने अपनी सरकार और सामाजिक जिम्मेदारियों का जश्न मनाने का मौका दिया।

मैं उनकी प्रतिभा और समर्पण को सम्मानित करता हूँ।
 
🤔 ये बहुत ज्यादा अजीब है कि कैसे चुनाव आयोग के लोग लिस्ट वेरिफाई करने पहुंचे, तो लोग मुकर गए। शायद उन्हें पता नहीं था कि यहाँ कुछ और है जो राजनीतिक दबाव से निपटा गया। तापोश हलदार जी को गिरफ्तार कर लेने वाला यह बहुत बड़ा मुद्दा है। क्या हमें लगता है कि चुनाव आयोग के लोगों को अपने काम में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए? 🤷‍♂️
 
बेचारा मुलाकात करने वालों ने गोपालगंज सीट पर हो रहे चुनाव को लेकर बिल्कुल सही तरीके से जानकारी नहीं देते। यह तो बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी के लोगों का खेल है। धमकी और गिरफ्तारी कैसे करें? चुनाव आयोग के लोग भी चुपचाप चले गए। यह सब चुनावी तांत्रिक है! 👀💔 पुलिस को यह सब सीधा लेना चाहिए।
 
अरे यार, यही सोचा जा रहा था! चुनाव में पार्टी भेदभाव कर रही है? गोपालगंज-3 सीट पर तो तापोश हलदार को गिरफ्तार किया गया, और दो और हिंदुओं ने भी धमकी दी गई, लेकिन चुनाव आयोग में कुछ नहीं किया। यहां तक कि चुनाव लड़ने वालों को अपना नाम साइन करना पड़ गया, तो भी। क्या चुनाव आयोग के लोग चुनाव के नियमों की जानकारी नहीं रखते?
 
बस वाह, यह ऐसा लगता है जैसे चुनाव आयोग को अच्छी तरह से शिकायतों का ख्याल रखना होता। अगर नामांकन करने के लिए साइन करवाना तो आसान था, फिर भी उन लोगों को मुश्किलें पड़ रही हैं जिन्होंने पहले ही ऐसा किया है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी के नेताओं की इस तरह की धमकी सिर्फ चुनाव को खराब कर रही है, लोग डर जाएं तो वोट नहीं देंगे। तापोश हलदार जैसे हिंदू नेता को गिरफ्तार करना भी एक बड़ा फैसला था, अब ये देखें, क्या चुनाव आयोग ने उन लोगों को सुरक्षा प्रदान कर देगा?
 
अरे, यह सिर्फ एक ऐसा मामला नहीं है, यह हमारे समाज की गहरी बीमारी को दर्शाता है। किसानों को अपनी खेती के लिए जमीन देने के बदले में उन्हें कुछ भी नहीं दिया जाता है, फिर भी वे लड़ते हैं और अपने अधिकार के लिए आवाज उठाते हैं। लेकिन जब यह आवाज स्वतंत्र रूप से उठती है, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है या धमकी दी जाती है। यह हमारे समाज की भावनात्मक अस्वास्थ्य को दर्शाता है और हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं या नहीं। 🤔
 
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