मक्का-मदीना कॉरिडोर इतना खतरनाक क्यों, 45 भारतीय जिंदा जले: इकलौता शोएब कैसे जिंदा बचा, एक परिवार की 3 जनरेशन खत्म

सऊदी बस हादसे की गहराई में एक ही सवाल उठता है - 45 भारतीय जिंदा जले, फिर क्यों? सऊदी अरब में बिना वीजा और पासपोर्ट सहित सभी विदेशियों के लिए उमरा तीर्थयात्रा, यहां तक कि 100 किमी की दूरी पर भी कराने की जारी है इस यात्रा। इस मामले में सऊदी बस को बहुत पैसे में खरीदा गया था। यहां पर जोखिम का डर इतना बढ़ चुका है कि यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देना पड़ता है।
 
सऊदी बस हादसे की बात में तो हमें ज्यादा सुनने को नहीं मिल रहा, लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर वहां पर यात्रियों को अपने वाहन को कचरा समझने दिया जाए, तो क्या अलग फायदा होगा। हमारी सरकार ने भी हमेशा से कहा है, लोगों को अपने वाहन का ध्यान रखने का, लेकि वो चीजें तय कर देनी चाहिए। लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर वहां पर जोखिम से बहुत खिलवाड़ होता है, तो क्यों यात्रियों को इस जोखिम में डालने के लिए कहा जाता है।
 
सऊदी बस हादसे में जिन 45 भारतीयों ने जिंदा जले, उनके पास उमरा कराने जाने की अनुमति थी। यह बहुत ही अजीब बात है! 100 किमी तक की दूरी पर भी यात्रा करनी पड़ती है, और बसें बहुत महंगी खरीदी जाती हैं। लेकिन जोखिम का डर इतना बढ़ गया है कि अब से सिर्फ कचरा नहीं समझने दिया जाएगा, बल्कि यह भी देखने की जरूरत होगी कि हमारी जान सुरक्षित हो या नहीं।
 
मुझे यह सुनकर दिल में दर्द हुआ। 100 किमी की दूरी पर भी उमरा कराना तो एक बड़ा सवाल है, लेकिन जब यात्रियों को जान जोखिम में डालना पड़ता है और उनके वाहन को कचरा नहीं समझने दिया जाता है, तो यह बहुत भयावह है। सऊदी बस को 45 लाख रुपये में खरीदा गया था, यानी इसकी कीमत इतनी अधिक थी कि यह एक बड़ा जोखिम हो सकता था। और फिर इतने पैसे लगातार खत्म करने के बाद भी, सऊदी सरकार अभी भी इसे जारी रखना चाहती है?
 
मेरी राय में सऊदी बस हादसे से हमारे बेटों की जान जानबूझकर ली गई होगी, तो कैसे? 45 भारतीय जिंदा जलने की बात करना कितना सही है ? यह तो एक बहुत बड़ा सवाल है। और फिर सऊदी अरब में उमरा तीर्थयात्रा की जारी रखने की बात, यहां तक कि 100 किमी की दूरी पर भी? इसमें बहुत जोखिम है, लेकिन यात्रियों को यह खतरा उठाने के लिए कहा जाता है। मेरी राय में, इससे सऊदी सरकार को पैसा कमाने का एक और तरीका मिलता है और हमारे विदेशी भाई-बहनों को खतरा बढ़ जाता है।
 
यार, यह सऊदी बस हादसा तो बहुत बुरा हुआ है 🤕, 45 भारतीय जिंदा जलने की बात सुनकर मेरा दिल टूट गया है 😔, लेकिन सवाल उठता है - फिर यह कैसे हो सकता है? यह तो बहुत बड़ा सवाल है 🤔, और जिस तरह यात्रियों को अपने वाहन को भी साफ रखना पड़ता है, वही बात मुश्किल यात्रियों के लिए भी होनी चाहिए 🚨, सरकार से उम्मीद है कि ऐसे हादसों की बार-बार जानकारी न दें और सबक न मिले।
 
सऊदी बस हादसे तो बहुत गंभीर मामला है, जिंदा जले 45 भारतीयों की बात करने पर यह सवाल उठता है कि फिर वे सब क्यों यात्रा करते थे? उमरा तीर्थयात्रा, इसे लेकर सभी विदेशियों को जारी है। 100 किमी तक भी जाने की जारी है, यह तो बहुत खतरनाक है। बस इतनी पैसे में खरीदी गई थी, तो फिर जोखिम का डर इतना बढ़ गया है कि यात्रियों को अपने वाहन को कचरा समझने देने पड़ते। यहाँ पर सऊदी सरकार को कई सवाल उठाने के लिए बाकी तो बहुत सारे सवाल।
 
भारतीय युवाओं की जान बचाने की बात तो हमेशा सुनने में आती है, लेकिन 45 भारतीयों की जिंदा जलने के बाद अभी भी उमरा तीर्थयात्रा पर वीजा और पासपोर्ट सहित सभी विदेशियों को कराने की मांग नहीं हुई? यह बहुत अजीब है कि सऊदी बस को बहुत पैसे में खरीदा गया था, लेकिन जोखिम का डर इतना बढ़ चुका है कि यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देना पड़ता है। 🚗😕
 
अगर सऊदी बस में 45 भारतीय जिंदा जले तो यह बहुत ही चोटीला मामला है... ये सवाल हमेशा उठता रहेगा कि फिर क्यों? 🤔 उमरा तीर्थयात्रा, यहां तक कि 100 किमी की दूरी पर भी, विदेशियों के लिए इस तरह से जोखिम भरा कराने की जारी है... बस को बहुत पैसे में खरीदा गया था और फिर इतना जोखिम! 🚨 यह तो निश्चित रूप से यात्रियों के लिए एक बड़ा डर है... वे अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देते तो क्या? 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर बाकी लोगों ने पहले से ही सोचा ही है कि हमें इसके पीछे कारण की जांच करनी चाहिए। जो 45 भारतीय जिंदा जले, वह भी कई सवाल उठाते हैं। सबसे पहले यह तो एक बहुत बड़ा सवाल है की सऊदी अरब में ऐसी यात्रा पर निकालने से पहले वीजा और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। और अगर कोई भी ऐसी यात्रा करता है तो उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी दिशानिर्देशों की जांच करनी चाहिए। यह बस 100 किमी की दूरी पर भी कराई गई थी, तो इसका मतलब यह है कि यात्रियों को अपने सुरक्षित रहने के लिए बिल्कुल भी ध्यान नहीं देने देना चाहिए।
 
अरे, यू गuess व्हाट? सऊदी अरब में उमरा कराने की बात तो हमेशा रही है, लेकिन 45 भारतीय जिंदा जलने की बात तो नई है 🤯। यहां पर यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देना पड़ता है? अरे, यू टोटली राइट, लेकिन इतना जोखिम क्यों? उमरा कराने की बात में जोखिम होना तो थोड़ा सा सही है, लेकिन इतना खतरनाक नहीं 🤷‍♂️। और फिर भी उमरा कराने की जारी रखना चाहिए या न? यह सवाल मेरे लिए बहुत दिलचस्प है...
 
मुझे सऊदी बस हादसे के बारे में बहुत परेशानी हो रही है... 45 भारतीय जिंदा जले, यह तो बहुत गहरा सवाल है... क्यों इन लोगों को इतना खतरा था? उमरा तीर्थयात्रा में वीजा और पासपोर्ट सहित सभी विदेशियों के लिए सऊदी अरब में यात्रा करना आसान है... 100 किमी की दूरी पर भी कराने की जारी है, लेकिन इस मामले में बस को बहुत पैसे में खरीदा गया था। यह तो एक बड़ा सवाल है... सऊदी सरकार ने यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देने के लिए कहा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें जोखिम में डालने की जरूरत नहीं थी। 🤔
 
सऊदी बस हादसे में 45 भारतीय जिंदा जले, फिर क्यों? यह सवाल हमेशा से ही मेरे मस्तिष्क में लगा रहता है। जब तक उमरा तीर्थयात्रा पर यात्रियों को बहुत पैसे देने की जरूरत नहीं है, तब तक भारतीय और अन्य विदेशियों को इस तरह की जोखिम भरी यात्राएं न चलानी चाहिए। सऊदी अरब में कई सवाल उठते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और राजकीय प्रतिनिधि अपने नागरिकों की जान बचाने पर विचार करते हैं या नहीं।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा सवाल है - 45 भारतीय जिंदा जले, फिर क्यों? कोई समझ में नहीं आता कि यात्रा करने वाले लोगों को इतनी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। उमरा तीर्थयात्रा, यहां तक 100 किमी दूरी पर भी, जारी है और इस मामले में बस बहुत पैसे में खरीदा गया था। जोखिम इतना बढ़ चुका है कि यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देना पड़ता है। मुझे लगता है कि ऐसी स्थितियों में तुरंत बदलाव करना जरूरी है। 🚗💔
 
मुझे लगता है कि सऊदी बस हादसे की जांच में यह सवाल उठना जरूरी है कि 45 भारतीयों ने जिंदा जलने के बाद वे वीजा और पासपोर्ट सहित सब कुछ ठीक से तैयार नहीं थे। लेकिन फिर भी, उमरा तीर्थयात्रा में भाग लेने के लिए सऊदी सरकार ने कई देशों के विदेशियों को इसके लिए मजबूर करने की जारी है। बस यही सवाल उठता है कि यात्रियों की जान बचाने के बजाय उनकी जान लेने का मकसद क्या है?
 
सऊदी बस हादसे की बात करें तो यह बहुत दुखद है लेकिन इससे हमें एक बड़ा सवाल उठता है - सऊदी अरब में उमरा तीर्थयात्रा की क्यों इतनी जोरदार की जा रही है? और फिर यहाँ भारतीय नागरिकों को जिंदा जलने का मामला सामने आ गया। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे देश के लोगों पर विश्वास नहीं है। लेकिन यह सवाल उठता है कि उमरा तीर्थयात्रा की जो प्रक्रिया है, वह इतनी जोखिम भरी और दुर्भाग्यपूर्ण होने दी गई।
 
मुझे सऊदी बस हादसे का पूरा मामला बहुत दुखद लगा 🤕। ये सवाल उठता है कि 45 भारतीय जिंदा जले, तो फिर सऊदी अरब में उमरा तीर्थयात्रा को इतना खतरनाक कर दिया गया है? और इसके लिए उन्होंने बस कितना पैसा खरीदा था? ये सवाल हमेशा से उठता रहेगा 🚗.

मुझे लगता है कि उमरा तीर्थयात्रा में जाने वाले लोगों को यह जानकारी नहीं दी जाती है कि वे कहीं सुरक्षित पहुंचेंगे। और जब वे बस में बैठते हैं तो उनके पास अपने वाहन के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। यह बहुत खतरनाक है 🚨
 
मुझे तो लगता है की सऊदी बस की खरीदारी करने वाले लोगों ने बहुत कम पल्स लगे थे। यात्रा के लिए 100 किमी की दूरी तय करने की चिंता करने की ज़रूरत नहीं होती, बस इतनी दूरी के लिए भी सुविधाजनक रूट बनाने की ज़रूरत थी। और उमरा यात्रा के लिए बिना वीजा और पासपोर्ट सहित सभी विदेशियों को कराने में यह एक बड़ा सवाल है। 45 भारतीय जिंदा जलने से दुनिया को सोचने पर मजबूर हुआ है, लेकिन उमरा यात्रा में इतनी हिम्मत और समझौते की क्या जरूरत थी।
 
🤣 अरे, ये तो सोच लो! हमारे देश में तो उमरा की गाड़ी पर 100 किमी तक जाने वालों को भी पुलिस को पता चलता है, फिर सऊदी बस में जाने वाले लोगों को इतना खतरा नहीं लगता? 🤦‍♂️

और ये तो एक बड़ा सवाल है - 45 लोग जिंदा जले, परन्तु सबके पास जिंदगी बचाने का मौका नहीं था। यह सोच लो कि हमारे देश में तो भी यात्रियों को अपने पासपोर्ट और वीजा सहित सब कुछ पता होना चाहिए, फिर सऊदी बस में जाने वालों को इतना खतरा नहीं लगता? 😂

मुझे लगता है कि सरकार ने यह तय कर दिया है कि हमारे देश के लोगों को खुले आसमान में फँसाकर और उन्हें जिंदगी बचाने के लिए एक बार भी मौका नहीं देने से कुछ कमी आती है। 😂 अरे, यह तो सरकार की बड़ी रणनीति है! 🤣
 
बस हादसे की गहराई में सवाल उठता है - 45 भारतीय जिंदा जले, फिर क्यों? ये सवाल तो सभी के मन में आ रहा है, लेकिन इसका जवाब निकलना थोड़ा मुश्किल है। सऊदी अरब में उमरा तीर्थयात्रा करने की जारी है, लेकिन ये सवाल उठता है कि यह व्यवस्था इतनी सुरक्षित है? क्या 100 किमी की दूरी पर भी कराने की जारी है, तो इसका मतलब है कि सऊदी बस में जोखिम कितना बढ़ गया है?

मेरे अनुसार, यह सवालों का जवाब नहीं देता, लेकिन हमें सोचते रहना चाहिए। क्या हमें अपने पैसे और अपनी जान को समझना चाहिए? ये सवाल हमें आज भी बेचैन कर रहा है।
 
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