बस हादसे में जिंदा जलने वाले 45 भारतीय, सऊदी अरब में उमरा की गहराई से सवाल उठता है कि इतनी जोखिम में लेने की जरूरत क्यों? सऊदी बस को बहुत पैसे में खरीदा गया था, लेकिन यहां पर जोखिम का डर इतना बढ़ चुका है कि यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देना पड़ता है। मुझे लगता है कि इस मामले में सरकार से सवाल उठने की जरूरत है, ताकि ऐसे हादसों को भविष्य में रोका जा सके।
सऊदी बस हादसे से बहुत दुख हुआ, मेरी भी प्यासी ने 45 भारतीय जिंदा जलने को देखकर बहुत दुःख हुआ । फिर क्यों यात्रियों को वीजा और पासपोर्ट तय कराने की जारी है? उमरा तीर्थयात्रा, यहां तक 100 किमी की दूरी पर भी कराने की? बस में बहुत पैसे लगे, लेकिन जोखिम इतना बढ़ गया है कि यात्रियों को अपने वाहन को कचरा नहीं समझने देना पड़ता है! यह तो एक बड़ा संदेह है, मैं चाहता हूं इसकी गहराई में जाने की कोशिश करूं . क्या हमारी सरकार ने इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए?