ममता बोलीं- शाह खतरनाक, वे दुर्योधन-दुशासन जैसे: महिलाओं से कहा- SIR में नाम कटे तो आपके खाना बनाने के बर्तन हैं, उनसे लड़ो

ममता ने कहा, "अगर आपके नाम काटे गए तो आपके पास किचन के बर्तन हैं, इनसे लड़िए। अपने नाम को लिस्ट से कटने मत देना। महिलाएं आगे आकर लड़ेंगी, पुरुष इनके पीछे रहेंगे।"

ममता ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, "शाह वोटों के इतने भूखे हैं कि चुनाव से 2 महीने पहले ही SIR करा रहे हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का मकसद गलत मतदाता का नाम हटाना और नए मतदाता जोड़ना है, जो बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए हो रही है।

ममता ने शाह पर कहा, "उनकी आंखों में दहशत है। उनकी एक आंख में आपको दुर्योधन तो दूसरी आंख में दुशासन दिखाई देगा।"

इस बीच, गृह मंत्री अमित शाह ने ममता के विरोध को घुसपैठियों को बचाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा, "SIR से लोकतंत्र को प्रदूषित होने से बचाया जा रहा।"

ममता ने बीजेपी पर राज्य में सांप्रदायिक विभाजन की संस्कृति लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मैं सांप्रदायिक विभाजन में विश्वास नहीं करती, सभी धर्मों के साथ चलना चाहती हूं। गीता पढ़ने के लिए सार्वजनिक सभा की क्या जरूरत? जो भगवान या अल्लाह से प्रार्थना करते हैं, वे दिल से करते हैं। धर्म बांटने के लिए नहीं, जोड़ने के लिए है।"

इसके अलावा, ममता ने गीता पाठ कार्यक्रम में हुए हमलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "दुकानदारों का माल फेंका, सिटअप्स लगवाए थे।"

इस दौरान, पुलिस ने बुधवार रात वीडियो और सबूतों के आधार पर तीनों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
 
मामला देखकर लगता है कि पार्टी स्तर पर लड़ाई हो रही है, लेकिन सिर्फ नाम काटने से लड़ने की बात तो थोड़ी अजीब लगी।

क्या मतदाताओं को चुनाव से पहले भी सिटअप्स लगवाने दिया जाए? और शाह जी की आंखों में क्या दहशत है? क्या हमारे देश में वोटों की इतनी भूख हो गई कि चुनाव से 2 महीने पहले ही लड़ाई हो रही है?

लेकिन सबसे ज्यादा बात यह है कि पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, तो क्या हमले का मकसद थोड़ा और स्पष्ट नहीं हुआ? क्या हमें पता चलेगी कि वास्तविक मालिक कौन था?

और सबसे अजीब बात यह है कि ममता जी ने कहा कि अगर आपके नाम काटे गए तो आपके पास किचन के बर्तन हैं, इनसे लड़िए। लेकिन क्या हमारे देश में ऐसी स्थिति है जहां लोग अपने घर के बर्तनों से लड़ते हैं?

कोई जवाब नहीं दूंगा, लेकिन यह तो साफ़ है कि चुनाव के समय हमें बहुत सावधान रहना होगा।
 
ममता की बातें सुनकर लगता है कि उन्हें अपने अधिकारियों द्वारा कुछ नहीं पता है 🤔। अगर सच में उनके पास इनाम के बर्तन हैं तो वे लड़ सकती थीं, न कि लोगों को घर भेजने का तरीका ढूंढते हुए बाहर जाना।
 
भ्रष्टाचार का मकसद सिर्फ वोट बैंक बनाना ही नहीं है, बल्कि अपने पार्टी के नामचीन लोगों को सुरक्षित रखने के लिए भी यह कोशिश होती रहती है। सिर्फ इतना तो कहना गलत नहीं है कि अगर शाह जी वोट की मांग करने के बजाय अपने नेतृत्व की गुणवत्ता को दिखाने पर ध्यान केंद्रित करें तो कुछ अच्छा हो सकता। 🤔
 
अरे, ये ममता की बात है, क्या करेंगे? अगर आपका नाम कट जाए तो पीछे से लड़ेंगी, आगे से नहीं। और अमित शाह से तो ऐसे आरोप लग रहे हैं जैसे दुर्योधन और दुशासन की तरह, आंखों में दरार। लेकिन ये तो राजनीति है, सब जानता है।

ममता की बात में सांप्रदायिक विभाजन नहीं है, बस यह कि अगर हम सभी धर्मों के साथ चलने का सोचते हैं तो फिर भी कुछ लोग ऐसा नहीं करते। और गीता पाठ कार्यक्रम में हमले? बस दुकानदारों का माल फेंक रहे थे, सबूतों के आधार पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
 
ਇੱਥੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਮਿਲ ਗਈ ਖ਼बरਦਾਰੀ ਵਿੱਚ, ਕਿਹਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਭਾਰਤੀ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਲਈ ਗੱਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।

ਪਰ, ਜੇ ਭਾਰਤੀ ਆਮ ਨੇ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਵਾਲੇ ਉਸ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਨੂੰ ਮੰਨ ਕੇ ਜੀਵੀਆ, ਤਾਂ ਉਹਦੇ ਗੱਲਬਾਤ ਵਿੱਚ ਸੱਚਾ ਅਰਥ ਨਹੀਂ ਪੈ ਜਾਏਗਾ।

ਖ਼बरਦਾਰੀ ਵਿੱਚ, ਮਮਤਾ ਬਾਨਰਜੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਜੇ ਆਪਣਾ ਨਾਂ ਕੱਟ ਲਿਆ ਜਾਏ, ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਉਹਦੇ ਖ਼ਰੀਦੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨਾਲ ਲੜੀਏ। ਅਸੀਂ ਬਿਨਾਂ ਮਤ ਕੇ ਉਹਦਾ ਨਾਂ ਗਰਫ਼ਤਾਰੀ ਵਿੱਚ ਛੱਡ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦੇ।

ਪਰ, ਜੇ ਮਮਤਾ ਬਾਨਰਜੀ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਵੱਲ ਦੌੜਨ ਲੈ ਕੇ, ਉਹ ਮਿੱਤਰਾਂ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਲਈ ਕਦੇ ਨਹੀਂ ਬਣ ਜਾਂਦੇ।

ਅਤੇ, ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਹੈ ਕਿ SIR ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਲਗਭਗ 2 ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਚੁਕੀ ਹੈ, ਜੋ ਕਿ VOTING DAY SE PLEH CHAL GAI HAIN.
 
ममता की बोली सुनकर मेरी खुशी हुई 🤩। वह बसपा के नेता हैं और उनकी बातें हमेशा सच्ची होती हैं। अमित शाह पर उनके आरोप सच होंगे। उनकी आंखों में दहशत है और वे चुनाव से 2 महीने पहले ही SIR करा रहे हैं तो यह कोई अजीब बात नहीं है।

ममता ने गीता पाठ कार्यक्रम में हुए हमलों पर भी निशाना साधा, और यह अच्छी बात है कि वह सांप्रदायिक विभाजन की संस्कृति लाने का आरोप लगा रही हैं। हमें ऐसी संस्कृति को कभी नहीं आने देना चाहिए। मैं ममता के प्रति बहुत प्यार करता हूँ और उनकी बोलियों पर भरोसा करता हूँ 🙏
 
अरे, ये सुनकर बिल्कुल हैरान हुआ। ममता दीदी ने बोल दिया है कि अगर आपका नाम कट जाता है तो आप खुद किचन के बर्तनों से लड़ लीजिए। यह तो बहुत मजेदार लगता है। लेकिन मुझे लगता है कि यही बात अमित शाह जी पर भी लागू होनी चाहिए, उनके पास इतनी भूख है कि वे चुनाव से 2 महीने पहले ही वोट लेने लग जाएं। और उनकी आंखों में दहशत है, यह तो सच है। लेकिन क्या हमें वास्तविकता से बात कर सकते हैं?
 
अरे भाई, ये ममता की बहुत ही दिलचस्प बातें हैं 🤔 सिर्फ वोटों की लड़ाई में इतने रोमांचित हो जाते हैं लोग, कभी किसी की खुशियों पर ध्यान नहीं देते। और अमित शाह की आंखों में दहशत है, अरे यह तो थोड़ा भी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है 😂 पूरे देश को मतदाताओं की चिंता करनी चाहिए, न कि अपने पार्टी के राजनेताओं की चालाकियों पर ध्यान देना।
 
ममता का मंच से झगड़ा है पर दिल्ली में भी सीटिंग डिसऑर्डर होने लगी है, यह जानना दिलचस्प होगा 🤔
 
कुछ लोग कहते हैं कि SIR करना फिर भी स्वतंत्रता का मायने रखता है, लेकिन ये तो बस एक माथू बन जाता है। 🤦‍♂️

मुझे लगता है कि अगर हमारे नाम काटे गए तो फिर भी कुछ करना चाहिए, लेकिन SIR करना तो यही था। अब तो बस सोच-समझकर मतदान करना चाहिए।

लोग कहते हैं कि महिलाएं आगे आकर लड़ेंगी, लेकिन मुझे लगता है कि अगर हम सभी एक साथ मिलकर सोचेंगे, तो SIR करने वालों को रोका जा सकता था।

ममता जी ने बीजेपी पर आरोप लगाया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर हमारे नाम काटे गए तो फिर भी SIR करना चाहिए, लेकिन इसके पीछे कुछ सच्चाई होनी चाहिए।

किसी की आंखों में दहशत होना स्वाभाविक नहीं है। 🤔
 
🤔 ममता जी का यह बयान सुनकर लगता है कि वाहिनी का दिल क्या कह रहा है? यह सब SIR के बारे में है, लेकिन इसका फायदा केवल BJD को नहीं होगा। शायद और भी कई पार्टियों के लिए इससे फायदा होगा। 🤷‍♂️

ममता जी ने अमित शाह पर बहुत सारे आरोप लगाए हैं, लेकिन क्या वास्तविकता यही है? और गृह मंत्री जी ने कहा है कि SIR को बचाया गया, लेकिन क्या इससे लोकतंत्र प्रदूषित हुआ? या फिर कुछ और हो रहा है? 🤔

ममता जी की बात सुनकर लगता है कि वे सच्चाई को दिखाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस मामले में क्या सच्चाई है? और क्या हमारी पुलिस तयगी से काम कर रही है? 🤷‍♂️

एक बात जरूर है, यह सब बहुत ही रोचक है! और हमें जानने में आनंद होगा। लेकिन इससे पहले कि हम कुछ निर्णय लें, हमें ज्यादा जानकारी चाहिए। 🤔
 
बेटा, मुझे यह सुनकर बहुत खेद हुआ कि क्या हुआ दिल्ली में? शाह जी की बात तो वोटों की भूख के बावजूद चुनाव से 2 महीने पहले ही SIR कराने की बात करने से क्या मतलब? यह कैसे लोकतंत्र को बचाया जा रहा है? 🤔

ममता जी की बात तो और भी है। उन्होंने कहा कि उनकी आंखों में दहशत है शाह जी की, एक आंख में दुर्योधन, दूसरी में दुशासन। यह तो बहुत गंभीर बात है।

लेकिन, बेटा, सबसे बड़ी चिंता यह है कि सांप्रदायिक विभाजन की संस्कृति लाने का आरोप लगने पर शाह जी ने कहा कि इससे लोकतंत्र बचाया गया? नहीं, बेटा, यह नहीं ठीक है। हमें सभी धर्मों के साथ चलना चाहते हैं और एक-दूसरे को समझना चाहिए। 🙏

और गीता पाठ कार्यक्रम में हुए हमलों पर बोलते समय ममता जी ने कहा कि धर्म बांटने के लिए नहीं, जोड़ने के लिए है। यह बहुत सच्चा है, बेटा। हमें एक-दूसरे को समझना और एक साथ आना चाहिए। 🌈
 
ਮमता दीदੀ ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਸੁਣ ਕੇ मੈਨੂੰ ਯੋਗ ਹੋ ਗਿਆ। शायद ਉਹ ਖ਼बਰ ਪਛਾਣ ਵਿੱਚ ਲੱਗੀ ਹੋਈ, ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖਣਾ ਚਾਹੇਂਗੇ ਤਾਂ ਵੋਟਿੰਗ ਕੈਲੰडर ਨੂੰ ਪੜ੍ਹੋ। #ਮमतਾਦੀਦੀ #ਚੁਣਾਵਟੀਆਂ #ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਕੰਮ 🤩
 
शायद अब ममता जी अपने सामने के पुरुषों से डर गई हैं 🙄, उनका तरीका देखकर लगता है कि वे किसी भी चीज़ पर निशाना लगा सकती हैं। और तो और, शायद वो अपने बीच में खेल रही हैं, पुरुषों को धमकाने का तरीका सीखने के लिए।
 
अरे, यह बात ममता जी की है लेकिन हमें इस पर सोचने की जरूरत नहीं। अगर आपके नाम काटे गए तो आपके पास किचन के बर्तन हैं, इनसे लड़िए। लेकिन, यह भी सच है कि महिलाएं आगे आकर लड़ने का मौका नहीं देती, वे सिर्फ पुरुषों के पीछे रहती हैं।

और अमित शाह जी को उनके वोटों पर ध्यान देना चाहिए, न कि SIR कराने का। यह तो लोकतंत्र को खराब करने की तरह लगता है।

ममता जी ने कहा है कि उनकी आंखें दहशत में नहीं हैं, बल्कि उन्हें सिर्फ सच्चाई खोजने की जरूरत है। और बीजेपी ने सांप्रदायिक विभाजन लाने की कोशिश की है, लेकिन यह हमारे समाज को तोड़ने का नहीं कि एकजुट करने का काम है।

और गीता पाठ कार्यक्रम में हुए हमलों पर, यह तो जानबूझकर किया गया है। लेकिन, अगर हमें अपनी ताकत खोजनी है, तो हमें अपने दिल से और आपसी समझ से लड़ना चाहिए।
 
अरे, मुझे लगता है कि यह शायद हिंसा से नहीं निपटा जा सकता। अगर दुकानदारों से लड़ते हैं तो सबकुछ और बदतर हो जाएगा, फिर क्या करें? 🤔

ममता की बात में एक बात जरूर है, पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन साथ ही, हमें यह भी समझना चाहिए कि आरोपी क्यों ऐसे काम कर रहे थे। क्या वे परेशान थे, क्या वे गरीब थे? हमें उनके दृष्टिकोण को समझने की जरूरत है।

और अमित शाह जी की बात, मुझे लगता है वह सिर्फ चुनाव लड़ाने में इतने भूखे हैं कि दूसरों की आंखों में दहशत पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। 🤷‍♂️
 
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