'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा, 'किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से मिलने पहुंचीं लेकिन उनसे कोई मिलना नहीं आया. लेकिन यह नहीं है सब, रामीज और धर्मांतरण के मामले हमारे साथ चल रहे हैं.

मुझे पता है कि महिलाओं की छेड़छाड़ बढ़ती जा रही है, लेकिन यहाँ क्या चल रहा है, यह सब मौन है। पीड़िता से बात करने के बाद भी, एचओडी ने बताया कि कोई सुनवाई नहीं हुई. परन्तु हमें पता है कि इस मामले में कुछ और जानकारी है।

ये रिपोर्ट विशाखा कमेटी द्वारा जारी की गई थी, लेकिन यह कहां तक सच है, यह नहीं बताया गया। लेकिन हम समझते हैं कि यहाँ दबाव डाला जा रहा है और बयान बदलने की कोशिश की जा रही है।

हमें यह सोचना पड़गा कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था नहीं है? हमारी बातों पर क्या समझ रखा गया है, यह पता चलने में लग रहा है।
 
अरे यार, तो यह मामला कितना गंभीर है! 🤯 किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से मिलने की बात कर रही है, लेकिन कोई मिलना नहीं हुआ? और रामीज़ और धर्मांतरण के मामले तो सब कुछ दबने की कोशिश की जा रही है? 😡 यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, हमारी महिलाओं के अधिकारों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है।

मैं समझता हूं कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था नहीं है? लेकिन यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है, हमें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रहना चाहिए और उन्हें लड़ना चाहिए। 🤝 हमें अपनी आवाज़ उठानी चाहिए और अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए, नहीं तो यह मामला कहां तक ठीक होता है?
 
🤔 यह तो बहुत गंभीर मामला है जैसे कहा जा रहा है। पीड़िता की बात सुनने के लिए एचओडी क्यों नहीं आया? और यह रिपोर्ट विशाखा कमेटी द्वारा तैयार की गई थी, लेकिन क्या यह सच है? दबाव डालने और बयान बदलने की कोशिश किए जा रहे हैं तो यह बहुत शर्मनाक है। मुझे लगता है कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था होनी चाहिए, लेकिन यहां नाराजगी और दबाव की स्थिति बनाई जा रही है। पीड़िता को फिर से बुलाया जाए और इस मामले पर वास्तविक सुनवाई होनी चाहिए।
 
अरे, तो ये कैसे हो सकता है? रामीज और धर्मांतरण के मामले में हमारी बातों पर इतना दबाव डाला जा रहा है? पीड़िता से बात करने के बाद भी, एचओडी ने बताया कि कोई सुनवाई नहीं हुई? यह तो बहुत बड़ा झूठ है, हमें पता है कि इसके पीछे कुछ और है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से मिलने पहुंचीं लेकिन उनसे कोई मिलना नहीं आया, यह तो एक छोटी बात है, लेकिन यह सब मौन है। हमें लगता है कि महिलाओं की छेड़छाड़ बढ़ती जा रही है, लेकिन इस मामले में क्या चल रहा है? पीड़िता से बात करने के बाद भी, एचओडी ने बताया कि कोई सुनवाई नहीं हुई? यह तो बहुत बड़ा झूठ है, हमें पता है कि इसके पीछे कुछ और है।

हमें लगता है कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था नहीं है? हमारी बातों पर क्या समझ रखा गया है, यह पता चलने में लग रहा है। हमें यह जानना चाहिए कि क्या वास्तव में दबाव डाला जा रहा है और बयान बदलने की कोशिश की जा रही है?
 
कुछ दिन पहले मैंने सुना था कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एक महिला डॉक्टर ने अपने काम में कुछ ऐसा गलत किया था। अब यह पता चल रहा है कि उन्होंने किसी पीड़िता से बात नहीं की। लेकिन यह तो पहले भी जानते थे, ना? 🤔 मुझे लगता है कि हमें इस देश में महिलाओं की मदद करने वाली संस्थाएं और सरकार को सही तरीके से समझने की जरूरत है। लेकिन यह तो आसान नहीं है, ना? 🤷‍♂️
 
आपको लगता है कि पीड़िता की बात मानने में निमंत्रण नहीं मिलना और सुनवाई भी नहीं होना एक छोटी सी चीज़ है, लेकिन यह देश में कई जानलेवa समस्याएँ हैं।

आपको लगता है कि महिलाओं की छेड़छाड़ बढ़ती जा रही है? तो आप अपने परिवार और रिश्तों में नहीं देख सकते? अगर नहीं, तो आप कहाँ से पता कर रहे हैं कि यह कैसे बढ़ रही है?

क्या हमें विशाखा कमेटी जैसे नाम देने पर गर्व करना चाहिए, या फिर यह एक प्रतिष्ठित संस्था है जो सच्चाई को ढूंढने की कोशिश करती है?

हमें पता है कि दबाव डाला जा रहा है, लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि दबाव देने वाले कौन से लोग हैं और उन्हें क्यों?
 
मेरी मान्यता है कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी है। अपर्णा यादव जी को क्यों दबाव डाला गया? एचओडी ने तो यह कह दिया कि पीड़िता की बात नहीं मानी गई, लेकिन रामीज और धर्मांतरण के मामले में तो सबकुछ साफ है।
 
मैंने तो पढ़ा है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की छात्राएं हिंदी सीखती हैं, लेकिन अब यह देखकर आश्चर्य हुआ कि अपर्णा यादव जी ने कहा कि वे वहां से मिलने आए पर नहीं मिली। यह तो ठीक है, लेकिन रामीज़ और धर्मांतरण के मामले के बारे में सबकुछ मौन है। मुझे लगता है कि हमें यह समझना चाहिए कि महिलाओं की छेड़छाड़ बढ़ती जा रही है, लेकिन यह तो वास्तविकता नहीं है।
 
मैं तो सोचता हूं कि किसी को भी ऐसी जानकारी पाने की जरूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी एचओडी ने यह बताया कि मामले की सुनवाई हुई तो? और विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में क्या पता चला? कोई तो बताए, लेकिन लगता है कि बहुत सारी बातें धुंधली हो गई हैं... 🤔
 
अरे दोस्त, यह तो बहुत गंभीर मामला है 🤕। जब तक सरकार में स्थिति सुधर नहीं होती, तब तक हमें पूरी तरह से खुलकर बोल नहीं सकते। लेकिन रामीज और धर्मांतरण के मामलों पर विशेष रूप से दबाव डाला जा रहा है, यह सच है। और जब महिलाएं अपने अधिकारों की बात करती हैं, तो उन्हें पता चलता है कि क्या करें, कैसे करें। यह बहुत बुरा है । हमें सरकार से जवाबदेहता मांगनी चाहिए, और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। 🙏
 
मैंने भी कभी ऐसा अनुभव नहीं किया है कि कोई पीड़िता सुनवाई के बाद खेद व्यक्त करने के लिए कुछ नहीं कह पाता। यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है, और जैसे ही हमें पता चलेगा कि महिला आयोग की बातों पर दबाव पड़ रहा है तो हम सभी एक साथ खड़े होकर आवाज उठाएंगे। मेरी बहन ने भी कभी ऐसी गंभीर समस्या का सामना नहीं किया, लेकिन अब जैसे ही हमारी बेटियों को खतरा होता है तो सबकुछ बदल जाता है। यह तो बहुत ही दुखद है, और हमें एक साथ मिलकर इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है।
 
अरे, ये तो बहुत बड़ी चिंताजनक बात है 🤯। मैं भी ऐसा सोच रहा था, कि हमारी आवाज़ सुनी नहीं जा रही है, लेकिन यह बात सच है। हमें लगता है कि हमारे पास सब कुछ है और फिर भी दबाव डाला जाता है। मैंने पहले भी कहा था, कि सोशल मीडिया पर भी बहुत बड़ा प्रभाव होता है, लेकिन अभी भी हमारी आवाज़ नहीं सुनी जा रही है।

हमें लगता है कि महिला आयोग को अपने काम में और और अधिक सख्त होना चाहिए। उन्हें पीड़िताओं की बातों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें। यह तो हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन अभी भी बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है।

हमें एक दूसरे का समर्थन करना चाहिए, और अपनी आवाज़ सुनने वालों को ढूंढना चाहिए। हमारी एकजुटता हमें जीतने में मदद कर सकती है, ताकि हम अपने अधिकारों की लड़ाई जित सकें।
 
क्या तो हुआ, इस तरह की चीजें पुरी तरह छुपी रहती हैं और फिर भी लोग कहीं बैठकर जो फैसला लेते हैं, वह लोगों के दिल में जमा हो जाता है। क्या हमारी महिला आयोग वास्तव में हमारे हित में नहीं है? यह सोचते समय, मुझे याद आता है जब मैं छोटी था, और मेरी बहन ने मुझसे कहा कि अगर मैं ऐसी गलती कर दूं तो माँ-बाप भी मुझ पर नहीं रोक सकते। यही हमारे समाज में महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय की तरह है।
 
मैंने देखा है कि युवतियों को भीड़भाड़ में छेड़ा जा रहा है लेकिन लोग चुप रहते हैं... क्या हमारी आवाज़ों पर शांति रखी जाती है? मुझे लगता है कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में भ्रष्टाचार हो सकता है। एचओडी ने कोई जवाब नहीं दिया, क्या यह सच है? क्या सरकार महिलाओं की बातों पर ध्यान नहीं देती है?
 
मुझे ये सुनकर बहुत निराशा हो रही है 🤕। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऐसे मामलों में शामिल होने से रोकने के लिए तैयार रहना चाहिए, न कि उन्हें इसके लिए दोषी ठहराना। और यह बात भी सच है कि पीड़ित महिला को कोई सुनवाई नहीं मिली, इसके लिए एचओडी पर सवाल उठने चाहिए।

क्यों न हमें जानकारी के बारे में और भी जानने दें, ताकि हम समझ सकें कि क्या हो रहा है और कैसे इसका समाधान होगा। यह बहुत जरूरी है कि हम अपने अधिकारों और संविधान के अनुसार काम करें।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को ऐसी स्थिति में डालने से रोकना चाहिए, न कि उन्हें इसके लिए दोषी ठहराना।
 
कुछ लोग तो कहेंगे कि अपर्णा यादव जी की बातें सही नहीं हैं, लेकिन कुछ और कहेंगे कि सरकार द्वारा दबाव डालने से मामलों को मौन बनाए रखा जा रहा है। मुझे लगता है कि हमें यह तय करना होगा कि महिला आयोग एक ऐसी संस्था है या नहीं - एक ऐसी संस्था जिसका उद्देश्य महिलाओं की समस्याओं को हल करना है। अगर नहीं, तो हमें इसके पीछे कारणों पर विचार करना चाहिए।
 
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