अरे, ये तो बहुत ही ज़रूरी बात है! हमारी पार्टियों को सत्ता में रहने से न केवल उनकी विचारधारा मजबूत होती है, बल्कि समर्थकों की जरूरतों को समझने में भी सफल होने की संभावना बढ़ती है । लेकिन, सत्ता में रहने से हमें अपने निर्णयों में थोड़ा भी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि हमारी विचारधारा और मूल्यों को नहीं तोड़ दिया जाए।
अरे, आज तो पवार जी ने महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम बनने के बाद अपनी पार्टी की विचारधारा पर सवाल उठाए हैं... मुझे लगता है कि उनके बयान से यह साफ हो गया है कि सत्ता में रहने के दौरान जरूरी है अपने समर्थकों की जरूरतों को समझना। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या पवार जी ने अपनी पार्टी की विचारधारा को बनाए रखने के लिए सत्ता में रहने के दौरान कुछ गलत किया था?