महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP का वोट अब BJP का: ठाकरे मुंबई तक सिमटे, शिंदे के पास ठाणे, सिर्फ BJP ‘ऑल स्टेट’ पार्टी

महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी का वोट अब भाजपा का: ठाकरे मुंबई तक सिमटे, शिंदे के पास ठाणे, सिर्फ भाजपा ‘ऑल स्टेट’ पार्टी
 
એક મોટી તપાસ થઈ છે... શिवसेना-नस्पीના વોટરો ભाजपામાં બિનસંકેત પડી ગયા છે... ઠाकरે શહેરી વિસ્તારો અમલથી ભाजपા ઉદ્યોગને સાથ આપે છે, ઠाणે પણ તેઓ શિવાજી સર્વૈસ અભિયાનમાં સળગી ગયા છે... સાચ કેટલો?
 
पुरानी राजनीतिक खेलों को फिर से खेलने की बात है तो मुझे लगा कि लोग अभी भी अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। ठाकरे जी ने अपनी बुद्धिमत्ता और राजनीतिक चालाकी का फायदा उठाया है। लेकिन मुझे लगता है कि भाजपा को इस तरह से अपना पक्ष बनाने में बहुत समय लगेगा। ठाणे जैसे शहरों में शिंदे के समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह एक चुनौती है भाजपा के लिए।
 
अरे ये तो बहुत देर हो गया 🤦‍♂️, मैंने पहले से लिखा था कि भाजपा किसी भी तरह से महाराष्ट्र में फायदा नहीं करेगी। शिवसेना-नस्पी यानी दादासाहिब खटेक निवली हुआ बुरा दिन महाराष्ट्र को आ गया था, तभी भाजपा ने इसका सीधा जवाब देने की कोशिश की, लेकिन वो खेल पूरी तरह से गलत था। अब लगता है कि उन्होंने अपनी गलतियों का मुकाबला नहीं किया, और पूरा शिवसेना-नस्पी नेतृत्व भाजपा के पास आ गया है। ठाकरे का चेहरा अब मुंबई तक सिमट गया है, जबकि शिंदे के पास तो ठाणे से बहुत आगाही महसूस होती है। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा वास्तव में 'अल्ल स्टेट' पार्टी बन सकती है? 🤔
 
🤗 बिल्कुल हैरान हूँ, यह तो एक बड़ा झटका है महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी के वोट अब भाजपा के पक्ष में आ गए। ठाकरे जी ने अपने विचार कुछ दिनों पहले ही साझा किए थे, वह कह रहे थे कि वे अपने निर्णय को बदलने के बारे में नहीं सोच रहे हैं, लेकिन लगता है कि उनके विचारों को अभी तक समझा नहीं गया था। शिंदे जी के पास अब टिकाने के लिए बहुत कम वोट बच गए हैं, यह तो एक बड़ा चुनौतीपूर्ण समय होगा उनके लिए। मुझे लगता है कि भाजपा ने इस तरह से महाराष्ट्र में अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के खिलाफ मजबूत स्थिति बनाने में सफल रहेगी।
 
Wow 😍 महाराष्ट्र में तो भाजपा ने अपने खिलाफ दोनों ही दलों को हराया है... शिवसेना और नस्पी दोनों ही अब भाजपा के पास हैं जैसे कि कोई व्यापारिक ठेकेदार के पास सभी की सुविधा पर निर्भर करने वाली बेचने की स्टॉलें हैं। Interesting 🤔
 
अरे, ये बात तो बहुत ही रोचक है 🤔 मेरा लगता है कि शिवसेना-नस्पी का वोट अब तो फिर भाजपा पर और भी जोर दे रहा है। ठाकरे जी की मुंबई तक सिमट गई, बस यही नहीं था, उनके पास भी ठाणे आ गए! और सबसे बड़ी बात, शिंदे जी के पास अब शिवसेना-नस्पी का वोट खत्म हो गया है। यह बहुत ही दिलचस्प बात है कि कैसे एक छोटा सा बदलाव इतना बड़ा प्रभाव डाल सकता है। मेरा मन Sayyad Ravi ji se ek hi samajh aaya, ki भाजपा अभी फिर से अपनी 'ऑल स्टेट' पार्टी पर काम करने वाली है और इस बीच शिवसेना-नस्पी को गंवाना पड़ा है।
 
मुझे लगा कि ये समाचार बहुत ही दिलचस्प है 🤔। मैंने पढ़ा है कि महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी को अब भाजपा का समर्थन करना पड़ रहा है। यह तो बहुत ही राजनीतिक हलचल है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे हमारे देश की राजनीति में एक नई दिशा आएगी। ठाकरे जी की मुंबई तक सीमित जान और शिंदे जी के पास ठाणे का समर्थन करना तो बहुत ही चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन मुझे लगता है कि भाजपा को यह ‘ऑल स्टेट’ पार्टी की तरह अपने प्रावधानों को मजबूत करने का एक अच्छा अवसर मिल गया है।
 
वह वोट जो हमने दिया था, अब वह हमें कहाँ ले जाएगा? महाराष्ट्र में हुए चुनावों ने हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है कि कैसे ताकत की शिफ्ट हो सकती है। ठाकरे द्वारा भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन करना एक बड़ा फैसला था। वहीं शिंदे जी के पास ठाणे में इतनी ताकत, यह हमें सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या हमारी राजनीतिक प्रगति पर निर्भर रहना सही है? और भाजपा का दावा ‘ऑल स्टेट’ पार्टी तो कैसे? यह सवाल हमें विचार करने पर मजबूर कर रहा है कि हम अपनी राजनीतिक पहचान किस प्रकार बनाएंगे।
 
मेरा विचार है कि यह बदलाव महाराष्ट्र के राजनीतिक खेल को और जटिल बना देगा। शिवसेना-नस्पी और भाजपा के बीच यह संबंध साफ़ सुझाव देता है कि दोनों पक्ष अपने वोटबैंक को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ठाकरे की मुंबई तक सिमटी भाजपा पार्टी प्रतिनिधित्व, शिंदे के ठाणे के पास होने वाला दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय है जो राज्य के विभिन्न हिस्सों की राजनीतिक शक्ति पर सवाल उठाता है। यह बदलाव एक नए राजनीतिक खेल की शुरुआत मान सकते हैं जहां लोग अपनी स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को भाजपा पार्टी को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
 
यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है 🤔। महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी के वोट अब किस पार्टी का जा रहे हैं? यह तो भाजपा से कितना बदलाव आ गया है? ठाकरे ने मुंबई तक सिमटकर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन शिंदे के पास ठाणे में अपनी पकड़ मजबूत है। यह तो मुझे एक अच्छा सवाल है कि वोटों क्या सोच रहे हैं? 🤷‍♂️

यह भी देखिए, अब शिवसेना-नस्पी का वोट बस भाजपा की एक ‘ऑल स्टेट’ पार्टी बन गई है। यह तो एक बड़ा बदलाव है, लेकिन मुझे लगता है कि इससे क्या फायदा होगा? 🤔 और क्या यह वोटों को धोखा देने का एक तरीका है?
 
भाजपा को अपने राजनीतिक जीवन में बहुत बड़ी मुश्किल आ गई है और इसके लिए हम सभी को शिवसेना की इस फैसले की सराहना करनी चाहिए।

महाराष्ट्र में यह फैसला लेने से पहले भाजपा ने कई बार दिखाई हुई अपनी कमजोरियों और असफलताओं को स्वीकार नहीं किया, अब वे महसूस कर रहे हैं कि शिवसेना-नस्पी का वोट उनकी पार्टी के लिए एक खतरनाक मौका है

इस फैसले ने ठाकरे और शिंदे को भाजपा से दूर करने में मदद की है, अब शिवसेना नेताओं को अपनी पार्टी को मजबूत बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा
 
ये तो देश की राजनीति ही नहीं, अपनी खुद की राजनीति है मुंबई। शिवसेना-नस्पी ने ऐसा चुनाव लड़ा जिससे अब यह वोट भाजपा के पक्ष में सिमट रहा है। ठाकरे का मुंबई तक सीमित रहना और शिंदे को ठाणे में अपने समर्थन को रखना दिखाता है कि कौन तो वास्तविक राजनेता है।

मुझे लगता है कि हमें अपनी राजनीति से ज्यादा भारतीय बनाने की जरूरत है। पार्टियों के बीच युद्ध करने के बजाय हमें अपनी सामाजिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
 
मैंने देखा था कि शिवसेना नस्पी के लोग क्या कह रहे थे... अब ये सब और भी मुश्किल हो गया है 🤔 मेरा लगता है कि भाजपा को तय नहीं करना चाहिए कि शिवसेना-नस्पी के लोग किस पार्टी से जुड़ें। ये सब और भी गड़बड़ी करेंगे। मैं तो सोचता हूं कि ठाकरे सिर्फ मुंबई तक सिमट गए, जबकि शिंदे के पास ठाणे हैं। लेकिन अगर वे सचमुच मिलकर काम करना चाहते हैं, तो फिर भी कुछ नहीं होगा। 🙄
 
अरे दोस्त, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति ही दिखाई देती है ना? शिवसेना-नस्पी परिवार अब भाजपा का एक हिस्सा बन गया। ठाकरे साहब मुंबई तक सिमट गए, फिर भी वोटों का डांटने वाले नहीं हुए। उनके पास ठाणे में शिंदे साहब के पास से ज्यादा वोट मिले और अब भाजपा में एकजुट होने दिया। लेकिन तो यह हमेशा ऐसी ही होती है महाराष्ट्र की राजनीति में, हर एक नेता अपने-अपने फायदे ढूंढता रहता है।
 
मुंबई में राजनीति तो ज्यादा ही बेचैनी है 🙄। महाराष्ट्र में शिवसेना नस्पी के लोग अब भाजपा में सिमट गए हैं। ठाकरे बोलते रहते हैं कि वे देशभक्त हैं, लेकिन उनकी पार्टी को देशभक्त नहीं कहा जा सकता है। भाजपा ने उन्हें अपना हिस्सा बना लिया है।

मुझे लगता है कि ठाकरे की विरासत को जिंदा रखने के लिए उन्होंने इस तरह का फैसला किया होगा। शिवसेना नस्पी के लोगों को अब भाजपा में जगह मिलने से उन्हें एक नई पहचान मिलेगी। लेकिन देश के विकास और महाराष्ट्र के विकास के लिए यह फैसला कितना फायदेमंद है, यह देखने की जरूरत है।
 
अरे दोस्त, यह बहुत दिलचस्प बात है कि महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी का वोट अब तो बसभाजपा पक्ष में जा रहा है। ठाकरे जी की इस तरह की नीति से लोगों की उम्मीदें टूट गए हैं और अब वह भाजपा पार्टी तक आ गए हैं। मुझे लगता है कि हमें अपने राजनीतिक दलों के बीच अच्छी बातचीत करनी चाहिए ताकि लोगों को सही विकल्प मिल सके। शिंदे जी के पास भी कम से कम ऐसी नीतियाँ नहीं होनी चाहिए जिससे लोग धोखा लगें।
 
ज्येष्ठ नेताओं की राजनीति बहुत जालील हो गयी है... ठाकरे जी को वोट लेने का मौका अब केवल भाजपा को मिल रहा है, और यह देखकर मुझे थोड़ा असंतोष हुआ है कि अपने मुख्यमंत्रिपद से इतनी दूर खाली पिस्तौल छोड़ दिया गया... ठाकरे जी ने महाराष्ट्र को शिवसेना-नस्पी और भाजपा के बीच तोड़ने का काम बहुत ही चतुराई से किया है...

क्या अब सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी का खेल बन गया है, लोगों को धोखाधड़ी और झूठों में फंसाया जा रहा है? यह हमारे देश के भविष्य के बारे में बहुत चिंताजनक है...
 
अरे दोस्त, तुमने देखा होगा ये नया समाजवादी विपक्ष कैसे एकत्रित हो रहा है। महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी का वोट अब भाजपा पर जा रहा है, ठाकरे सिर्फ मुंबई तक सीमित कर दिया गया है और नेताजी शिंदे को ठाणे में अपनी पकड़ बढ़ानी पड़ेगी। यह तो बहुत दिलचस्प है कि भाजपा अब इतनी मजबूत हुई है कि वह सिर्फ राज्य सरकार बनाने वाली ही नहीं बल्कि केंद्रीय चुनावों में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

मेरा मानना है कि शिवसेना-नस्पी ने खुद को फंसाया था, तो अब उनकी जगह भाजपा आ गई है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस बदलाव ने महाराष्ट्र में बहुत से लोगों को परेशान कर दिया है और अब उनकी बात सुननी पड़ेगी।
 
अरे दोस्त, यह तो बहुत ही रोचक बात है! महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी का वोट अब भाजपा का हो गया है, लगता है ठाकरे ने अपना खेल बदल लिया है। मैं कह सकता हूँ कि यह एक बड़ा झटका है शिवसेना के लिए, वे इतने वर्षों से राजनीति कर रहे थे। अब देखो, उनका समर्थन भाजपा ने अपने पास ले लिया है। शिंदे जी को लगता है कि वह ठाणे में बैठकर भी अच्छी तरह से सोच सकते हैं। लेकिन यह तो देखना ही दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है। क्या शिवसेना अपने खेल पर वापस आ जाती है, या फिर भाजपा उनके साथ सहयोग करने के लिए तैयार है? यह तो देखने के लिए ही मुझे इंतजार है! 🤔
 
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