महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP का वोट अब BJP का: ठाकरे मुंबई तक सिमटे, शिंदे के पास ठाणे, सिर्फ BJP ‘ऑल स्टेट’ पार्टी

🤔 यह तो बहुत ही रोचक है! स्वभाव सेना के नेताओं ने मुंबई तक अपना समर्थन दिलाया है, जो तो मुम्बई की आर्थिक बाजारों की तरह ही खुशनुमा है। लेकिन ठाकरे और शिंदे ने भाजपा से वोट बांट लिए हैं यार, अब लगता है कि उनके पास राजनीतिक दूरबेस नहीं है।

मुझे लग रहा है कि अगर स्वभाव सेना और भाजपा एक साथ मिलकर फिर से चुनाव लड़ें, तो वह दोनों अपने वोटों को अच्छी तरह से बांट नहीं पाएंगे। लेकिन यह हमारे राजनीतिक खेल की बात है, और हमें यह तो पता चल गया है कि मुंबई की आर्थिक शक्ति कौन से नेता अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकता है।

चलो, अब देखने दिया, क्या यह रुझान मिलकर पूरे महाराष्ट्र में फैलता है, और हमें किस तरह की सरकार मिलती है। 🤞
 
📊 भाजपा को अच्छा वोट मिला है तो ठीक है, लेकिन देखिए, 2019 चुनाव में भाजपा सिर्फ 56 सीटों पर पहुंची, जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है। अब भाजपा को इतनी बढ़ी हुई संख्या कैसे हुई? 🤔

मुझे लगता है कि देशभर में खपत बढ़ती गई है, लोगों को पैसे कमाने के लिए और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे महत्वपूर्ण चीजों पर विचार करने के लिए समय नहीं मिलता! 😬 नतीजतन, हमें यह महसूस होता है कि सरकार सिर्फ कुछ लोगों को फायदा पहुंचाती है, जिन्हें वोट देने का पैसा मिल जाता है। 🤑

मुझे लगता है कि हमें अपने चुनावी तंत्र में सुधार करने की जरूरत है, लोगों को शिक्षित करने की जरूरत है कि वोट देने के बाद उन्हें क्या उम्मीदें होनी चाहिए। 📚
 
मुझे लगा है कि यह बड़ा बदलाव आ रहा है, ये तो सच में जश्न मनाने की बात नहीं हो सकती। ठाकरे और शिंदे दोनों की जगह भाजपा ने ली है इसमें कोई नया सिर नहीं है तो वाकई अच्छा लगता है। मैंने पहले हमेशा कहा था कि ये राजनीतिक खिलाड़ी खुद को इतने बड़े बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को भूल जाएँ। अब तो यह एक नए सिर के साथ शुरू हुआ है मुझे उम्मीद है कि अच्छा नेटवर्क बनेगा।
 
मैं तो लगता है कि यह राजनीतिक खेल देखकर हमें एक बात सीखनी चाहिए - जीवन में भी ऐसे होते हैं कई बदलाव और खिलवाड़, यही जीवन की सत्यता है। महाराष्ट्र में शिवसेना-नस्पी का वोट अब भाजपा का, इससे हमें सोचने का मौका मिलता है कि अपने समर्थन को देने से पहले यह तय कर लेते हैं कि हमारे मूल्यों के साथ या बिना वोट दूंगा या नहीं।
 
अरे, ये बहुत ही दिलचस्प बात है महाराष्ट्र में वोट व्यवस्था में बदलाव की। मुझे लगता है कि भाजपा ने अच्छी रणनीति बनाई है, शिवसेना-नस्पी को वोट देने वालों को उन्हें समर्थन देने के लिए मजबूर किया है। लेकिन मुझे लगता है कि भाजपा ने यहां पर अपने स्वयं के समस्याओं को भी नहीं देखा है, जैसे कि ठाकरे के पास मुंबई तक सिमटे, शिंदे के पास ठाणे की तरह, सिर्फ भाजपा ‘ऑल स्टेट’ पार्टी हो गई है।
 
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