बात महाराष्ट्र की है तो लगता है कि शिवसेना-NCP की बुलडोज़ अब कमजोर हो गई है
. मुझे लगता है कि अगर ऐसा चलना जारी रहता है तो भाजपा और अपने दोस्तों ने फिर से खेल खेल लिया होगा।
मुंबई में ठाकरे के पास वोट क्या कमी हुई?
ठाणे में शिंदे को कुछ सीटें मिल गईं, फिर भी यह एक बड़ा सवाल है कि क्या यह बदलाव महाराष्ट्र के भविष्य में संकेतक है?
अगर शिवसेना-NCP ने अपने वोट बांट दिए तो क्या इससे उन्हें फायदा हुआ? या फिर उन्होंने अपनी पार्टी को फिसलन में डाल दिया है?
मुंबई में ठाकरे के पास वोट क्या कमी हुई?
अगर शिवसेना-NCP ने अपने वोट बांट दिए तो क्या इससे उन्हें फायदा हुआ? या फिर उन्होंने अपनी पार्टी को फिसलन में डाल दिया है?