अर्बन कंपनी के गुरुग्राम में रहने वाली वर्कर नेहा कहती हैं, 'मैं सिर्फ 20-25 हजार रुपये बचाती हूँ जब 12-13 घंटे काम करती हूँ।'
गिग वर्कर्स नेता भावना कहती है, "हमें ऑर्डर कैंसिल करने की पर्मिशन नहीं दी जाती। हम इंसान हैं, रोबोट नहीं।"
देश में गिग वर्कर्स की संख्या बढ़कर 1.20 करोड़ हो गई है, सरकार ने बताया है। ये देश की कुल वर्क फोर्स का 2% से ज्यादा है।
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के राष्ट्रीय संयोजक निर्मल गोराना कहते हैं, "सरकार ने इन कंपनियों को खुली छूट दे रखी है। इसी छूट की वजह से कंपनियां मनमानी कर रही हैं।"
सीमा सिंह, GIPSWU की अध्यक्ष कहती हैं, "हम अब भी वही मांग कर रहे हैं कि सरकार एक कानून लेकर आए। उनकी जो असल मजदूरी है, उन्हें वो मिले।"
सोशल एक्टिविस्ट और मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक निखिल डे कहते हैं, "इन वर्कर्स को अधिकार तभी मिलेंगे, जब उन्हें 'वर्कर' माना जाएगा। भारत में पूरा असंगठित क्षेत्र ही इसी तरीके से बना हुआ है।"
निखिल आगे कहते हैं, "डेटा से ही पारदर्शिता आ सकती है। अगर कर्मचारी नहीं भी बनाएं लेकिन हर ट्रांजैक्शन पर संस्थान-कर्मचारी का संबंध बना लें और जिम्मेदारी बांध दें तो इस समस्या का हल हो सकता है।"
गिग वर्कर्स नेता भावना कहती है, "हमें ऑर्डर कैंसिल करने की पर्मिशन नहीं दी जाती। हम इंसान हैं, रोबोट नहीं।"
देश में गिग वर्कर्स की संख्या बढ़कर 1.20 करोड़ हो गई है, सरकार ने बताया है। ये देश की कुल वर्क फोर्स का 2% से ज्यादा है।
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के राष्ट्रीय संयोजक निर्मल गोराना कहते हैं, "सरकार ने इन कंपनियों को खुली छूट दे रखी है। इसी छूट की वजह से कंपनियां मनमानी कर रही हैं।"
सीमा सिंह, GIPSWU की अध्यक्ष कहती हैं, "हम अब भी वही मांग कर रहे हैं कि सरकार एक कानून लेकर आए। उनकी जो असल मजदूरी है, उन्हें वो मिले।"
सोशल एक्टिविस्ट और मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक निखिल डे कहते हैं, "इन वर्कर्स को अधिकार तभी मिलेंगे, जब उन्हें 'वर्कर' माना जाएगा। भारत में पूरा असंगठित क्षेत्र ही इसी तरीके से बना हुआ है।"
निखिल आगे कहते हैं, "डेटा से ही पारदर्शिता आ सकती है। अगर कर्मचारी नहीं भी बनाएं लेकिन हर ट्रांजैक्शन पर संस्थान-कर्मचारी का संबंध बना लें और जिम्मेदारी बांध दें तो इस समस्या का हल हो सकता है।"